'फैसला चाचा को करना है..': चिराग पासवान हाजीपुर से ही लड़ेंगे चुनाव, पशुपति पारस से पूछ लिया ये सवाल

Bihar Lok Sabha Election News 2024: लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कह दिया कि हाजीपुर सीट से वही अपनी पार्टी के प्रत्याशी होंगे। साथ ही उन्होंने अपने चाचा पशुपति पारस के लिए एक सवाल उठाते हुए कहा है कि वे क्या करेंगे, इसका फैसला उन्हें ही करना है।

अभी हाजीपुर सीट से पशुपति पारस सांसद हैं। लेकिन, एनडीए में सीटों के बंटवारे के तहत बिहार में चिराग पासवान की अगुवाई वाली एलजेपी (आर) को 5 सीटें दी गई हैं, जिनमें हाजीपुर सीट भी शामिल है। पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के लिए एक भी सीट नहीं छोड़ी गई है।

chirag paswan on pashupati paras

हाजीपुर से मैं लड़ूंगा चुनाव- चिराग पासवान
बुधवार को नई दिल्ली में एलजेपी (आर) की संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद चिराग पासवान ने कहा, 'इस बात को लेकर सहमति बनी है.. केंद्रीय संसदीय बोर्ड की ओर से इस बात पर औपचारिक मुहर लगा दी गई है... इतना तय है कि हाजीपुर... जो मेरे पिता रामविलास पासवान की कर्मभूमि रही है... वहां से एनडीए प्रत्याशी के रूप में एलजेपी (रामविलास) का उम्मीदवार मैं खुद होऊंगा...'

चिराग अभी बिहार की जमुई लोकसभा सीट से सांसद हैं। जब उनसे यह पूछा गया कि वहां से उनके सामने उनके चाचा भी उम्मीदवार हो सकते हैं, क्योंकि वह केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दे चुके हैं, तो वे बोले कि वह उनके इस फैसले का स्वागत करेंगे।

चाचा के सामने भतीजे ने रखा बड़ा सवाल
साथ ही उन्होंने मीडिया वालों से यह भी कहा, 'इसका फैसला मेरे चाचा को करना करना है। उन्होंने हमेशा कहा है कि वे हमेशा पीएम मोदी के साथ खड़े रहेंगे। अब उन्हें फैसला करना है कि क्या वे एनडीए की 400 सीटें जीतने की राह में बाधा बनना चाहते हैं।'

हाजीपुर सीट को लेकर चाचा-भतीजे में रही है तल्खी
उत्तर बिहार की गेटवे मानी जाने वाली हाजीपुर लोकसभा सीट चिराग के पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत रामविलास पासवान की परंपरागत सीट रही है। 2019 में उन्होंने इस सीट पर अपने भाई पारस को मौका दिया था। लेकिन, रामविलास पासवान के निधन के बाद से चाचा-भतीजे में सियासी अनबन शुरू हो गई।

भाजपा ने चाचा की जगह भतीजे के वोट बैंक पर किया भरोसा
अब जब चिराग के साथ संभावित 5.5% पासवान वोट होने की संभावना में बीजेपी ने सिर्फ उसे ही 5 सीटों का ऑफर दिया है तो हाजीपुर का गणित पारस के लिए बिगड़ गया है। इस सीट को लेकर दोनों में सुलह करवाने के पिछले कुछ समय में काफी कोशिशें भी हो चुकी हैं, लेकिन आखिरकार बात नहीं बन पाई।

अब पशुपति पारस ने जिस तरह से मोदी सरकार से किनारा किया है और हाजीपुर सीट से ही चुनाव लड़ने का संकेत दे रहे हैं, उससे इस बार यहां मुकाबला रोचक हो सकता है।

इस बीच पारस का इस्तीफा राष्ट्रपति की ओर से मंजूर कर लिए जाने के बाद उनका खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरेन रिजिजू को अतिरिक्त जिम्मेदारी के तौर पर आवंटित कर दिया गया है।

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