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Bihar elections:महागठबंधन को लग सकता है झटका, उपेंद्र कुशवाहा फिर NDA में जाने को तैयार!

नई दिल्ली- बिहार में चुनाव शुरू होने के ठीक पहले विपक्षी महागठबंधन का समीकरण गड़बड़ता दिख रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन से निकलकर फिर से सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल हो सकती है। पार्टी के एक बड़े नेता ने इसके बारे में सीधा संकेत दिया है कि राजनीति में सबके दरवाजे हमेशा खुले होते हैं और कोई राजनीतिक दुश्मन स्थाई नहीं होता। दरअसल, महागठबंधन में सीटों पर तालमेल को लेकर मामला अटका हुआ है, जिसकी वजह से सहयोगी पार्टियों के सब्र का बांध टूटता जा रहा है। कुशवाहा लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए छोड़कर महागठबंधन में शामिल हुए थे।

बिहार: फिर एनडीए में जा सकते हैं उपेंद्र कुशवाहा

बिहार: फिर एनडीए में जा सकते हैं उपेंद्र कुशवाहा

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आरएलएसपी के नेता बिहार चुनाव को लेकर जेडीयू और भाजपा नेताओं से लगातार संपर्क में हैं और उनके बीच कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है। आरएलएसपी के सूत्रों के मुताबिक पार्टी महासचिव माधव आनंद पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को वापस एनडीए में ले जाने के लिए मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। जब न्यूज एजेंसी एएनआई ने माधव आनंद से आरएलएसपी के फिर से एनडीए में जाने को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा, 'हमारी पहली प्राथमिकता महागठबंधन है। मुझे उम्मीद है कि जल्दी सबकुछ ठीक हो जाएगा। जहां तक एनडीए की बात है, राजनीति में दरवाजे हमेशा खुले होते हैं। कोई स्थाई राजनीतिक दुश्मन नहीं है, इसलिए कुछ दिन इंतजार कीजिए और तस्वीर साफ हो जाएगी।'

महागठबंधन को लेकर जनता में कंफ्यूजन- आरएलएसपी

महागठबंधन को लेकर जनता में कंफ्यूजन- आरएलएसपी

आरएलएसपी महासचिव ने कहा है कि महागठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है और बिहार के लोगों में कंफ्यूजन बढ़ रहा है कि यह गठबंधन एनडीए को गभीर चुनौती देने में नाकाम साबित हो रहा है। उन्होंने कहा, 'गठबंधन के दलों में समन्वय का बहुत ही अभाव है। कल हमारी पार्टी ने महागठबंधन की मौजूदा परिस्थितियों और बिहार की अभी के राजनीतिक हालातों को लेकर एक राष्ट्रीय और प्रदेश काउंसिल की बैठक बुलाई है।' इस बीच महागठबंध छोड़कर एनडीए में जाने वाले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता जीतनराम मांझी कुशवाहा की स्थिति पर कहा है कि आरजेडी अपने हिडेन एजेंडे पर काम कर रही है। उसे सहयोगियों की चिंता नहीं है। हमारे साथ जैसा व्यवहार था, वही अब उपेंद्र कुशवाहा के साथ हो रहा है।

लोकसभा चुनाव से पहले छोड़ा था एनडीए का साथ

लोकसभा चुनाव से पहले छोड़ा था एनडीए का साथ

गौरतलब है कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले दिसंबर, 2018 में एनडीए से निकल गई थी। कुशवाहा ने मोदी सरकार के मानव संसाधन राज्यमंत्री के पद से भी इस्तीफा दे दिया था और लोकसभा चुनाव महागठबंधन के साथ लड़ा। खुद कुशवाहा ने दो-दो सीटों से संसदीय चुनाव लड़ा, लेकिन पार्टी 5 में से एक भी सीट जीत नहीं सकी। कुशवाहा तब इसलिए भाजपा से नाराज होकर एनडीए से निकले थे कि बीजेपी ने उन्हें लोकसभा चुनाव में 2 से ज्यादा सीटें देने से साफ मना कर दिया था। जबकि,2014 की मोदी लहर में आरएलएसपी बिहार की 3 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। वहीं, 2015 के विधानसभा चुनाव में कुशवाहा भाजपा के साथ थे और उनकी पार्टी 23 सीटें लड़कर 2 पर विजयी रही थी।

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