बर्दवान ब्लास्ट के आरोपी पहुंचे दक्षिण भारत पर खतरा, बढ़ा आतंकी खतरा
बैंगलोर। पश्चिम बंगाल के बर्दवान में दो अक्टूबर को हुए बर्दवान ब्लास्ट के बाद अब दक्षिण भारत पर खतरा और बढ़ता जा रहा है। वजह, इसके ज्यादातर दोषी अबदक्षिण भारत आ पहुंचे हैं।

एनआईए के अधिकारियों की ओर से इस बाबत जानकारी दी गई है। इस जानकारी पर अगर यकीन किया जाए तो ज्यादातार आरोपी यहां पर अंडरकवर के तौर पर प्लांटेशन और कंस्ट्रक्शन के कामों से जुड़े गए हैं।
भारत में ही है कौसर
एनआईए की ओर से जो जानकारी दी गई है उसके मुताबिक इस ब्लास्ट का मुख्य संदिग्ध शायद बांग्लादेश पहुंचा ही नहीं है और वह भारत में ही कहीं हो सकता है। एनआईए के अनुसार जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश यानी
जेएमबी किसी भी तरह से उन 18 करोड़ रुपयों को यूं ही व्यर्थ नहीं जाने देगी खासतौर पर जब संगठन ने इस पूरी साजिश में पैसे के अलावा अपना कीमती समय भी लगाया हो।
उनके पास भारत में कई बैक अप मॉड्यूल्स मौजूद हैं। ऐसे में जब यह मामला पूरी तरह से ठंडा पड़ जाएगा तो वह फिर से सक्रिय होने की कोशिश कर सकते हैं।
असम और बंगाल से पहुंचे 6000 बांग्लादेशी
इस बात की आशंका है कि संगठन के ज्यादातर ऑपरेटिव्स दक्षिण भारत आ पहुंचे हैं। इस समय करीब 6000 बांग्लादेशी नागरिक ऐसे हैं जो असम और पश्चिम बंगाल से आकर यहां पर कंस्ट्रक्शन और प्लांटेशन जैसे कामों से जुड़ गए हैं।
एनआइए की ओर से जो जानकारी दी गई है कि कई घुसपैठिए भी इन समूहों में शामिल हो चुके हैं। इन सभी के पास वैध दस्तावेज हैं जो इस पूरी स्थिति को और खतरनाक बनाते हैं।
वह लंबे समय तक अवैध तरह से यहां पर रहकर फिर से अपने ऑपरेशन को सक्रिय कर सकते हैं। वह पिछले कई वर्षों से अपनी सभी
गतिविधियों के लिए इंतजार कर रहे हैं। एनआईए सूत्रों की मानें तो वर्ष 2005 में जब बांग्लादेश में इस संगठन को खत्म करने के लिए अभियान चलाया गया था उसके बाद से ही संगठन और इसके ऑपरेटिव्स ने अपना धैर्य बांधा हुआ है।
केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में मौजूद
जेएमबी ने अपने साथ अल-उम्माह को बतौर रणनीतिक साझीदार जोड़ा हुआ है। यह दोनों ही संगठन एक ही जैसी विचारधारा की वजह से मिले हुए है और कई वर्षों तक दोनों ही संगठनों के सिमी से भी संपर्क रहे हैं। इस बात में
कोई शक नहीं है कि अल-उम्माह ने पूरी साजिश का भांडाफोड़ होने के बाद जेएमबी के उन सदस्यों की मदद की है जिन्हें शरण की जरूरत थी। अल-उम्माह के साथ आने का मतलब है कि जेएमबी के कैडर्स को केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में शरण दी गई है।
एनआईए अब स्थानीय पुलिस की मदद से सभी बाहरी नागरिकों की जांच करेगी। खासतौर पर वह नागरिक जो असम या पश्चिम बंगाल से आकर यहां पर बसे हैं। इसके अलावा एक एडवाइजरी भी अलग से इस बाबत जारी की जाएगी।












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