Bhima Koregaon Case: एक्टिविस्ट फादर स्वामी के कंप्यूटर में थे फेक दस्तावेज, US की फर्म का सनसनीखेज दावा
एक्टिविस्ट फादर स्टेन स्वामी भारत के वो सबसे उम्रदराज व्यक्ति थे जिन पर आतंकवाद का आरोप लगा था।

Bhima Koregaon Case: देश के चर्चित भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है,अमेरिका की एक फॉरेंसिक फर्म ने दावा किया है कि एक्टिविस्ट फादर स्टेन स्वामी के कंप्यूटर को हैकर ने हैक किया था और उस पर आपत्तिजनक दस्तावेज जानबूझकर प्लांट किए थे और स्वामी को एक सोची-समझी साजिश के तहत फंसाने की कोशिश की गई थी। उनके कंप्यूटर की हार्ड ड्राइव में फेक दस्तावेज डाले गए थे।। आपको बता दें कि 84 वर्षीय स्वामी की 5 जुलाई, 2021 को हृदयगति रुकने से मौत हो गई थी, वो अस्थायी जमानत पर मेडिकल आधार पर अस्पताल में भर्ती थे।

भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े केस में एक्टिविस्ट फादर स्टेन स्वामी को अरेस्ट किया गया था और जिस दिन उनकी मौत हुई उसी दिन बॉम्बे हाईकोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी। स्वामी के बार में ये खुलासा मैसाचुसेट्स की डिजिटल फॉरेंसिक फर्म, आर्सेनल कंसल्टिंग की ओर से किया गया है। 'द वाशिंगटन पोस्ट' में कंपनी की ओर से ये बात कही गई है।
स्वामी के कंप्यूटर पर 50 से ज्यादा फेक दस्तावेज
खबर के मुताबिक स्वामी को अरेस्ट वैसे ही किया गया था जैसे कि मानवाधिकार कार्यकर्ता रोना विल्सन और सुरेंद्र गाडलिंग की डिजिटल सबूत के आधार पर गिरफ्तारी हुई थी। स्वामी के कंप्यूटर पर 50 से ज्यादा फेक कॉपियां बनाई गई थी, जो कि उनके और माओवादी ग्रुप के करीबी रिलेशन को बयां करते थे, जो कि असल में पूरी तरह से गलत था। ये सारी फेक कॉपी 5 जून, 2019 को लोड की गई थीं यानी कि स्वामी के अरेस्ट होने के एक हफ्ते पहले।

कौन थे एक्टिविस्ट फादर स्टेन स्वामी?
आपको बता दें कि एक्टिविस्ट फादर स्टेन स्वामी भारत के वो सबसे उम्रदराज व्यक्ति थे जिन पर आतंकवाद का आरोप लगा था। जनवरी 2018 में भीमा कोरेगांव में भड़की हिंसा के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था, उन्हें NIA ने अरेस्ट किया था और उन पर कई गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। 26 अप्रैल 1937 को तमिलनाडु के त्रिची में जन्मे स्वामी ने झारखंड में आदिवासियों के लिए काफी काम किया था, उन्होंने शुरुआती दिनों में पादरी थे। उन पर झारखंड सरकार के खिलाफ बयानबाजी करने के भी कई आरोप भी लग चुके थे। पत्थलगढ़ी आंदोलन के कारण उन पर राजद्रोह का भी केस दर्ज हुुआ था। मालूम हो कि पुणे के भीमा कोरेगांव में 1 जनवरी 2018 को दलित समुदाय के कार्यक्रम में हिंसा भड़क गई थी। स्वामी पर एल्गार में भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा था इसी वजह से वो अरेस्ट हुए थे, हालांकि उन्होंने लगातार कहा था कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है।












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