Nitish Kumar की विपक्षी एकता की कवायद पर 'ग्रहण', 12 जून की मीटिंग कैंसिल, अगली तारीख दो हफ्ते बाद!
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में राजधानी पटना में होने वाली विपक्षी दलों की मीटिंग कैंसिल होने की खबर है। बता दें कि तमिलनाडु के सीएम और कांग्रेस प्रमुख खड़गे 12 जून की डेट से असहज थे।

Nitish Kumar पिछले कई हफ्तों से विपक्षी पार्टियों के साथ समन्वय कर रहे हैं। हालांकि, विपक्षी एकता की उनकी कवायद कितनी कारगर सिद्ध होगी, इसका जवाब आने वाले समय में मिलेगा। फिलहाल विपक्षी दलों की बैठक पर ग्रहण लगता दिख रहा है।
दरअसल, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने कुछ कारणों से मीटिंग की डेट आगे खिसकाने का सुझाव दिया था। 12 जून को पटना आने में कई गैर बीजेपी नेताओं ने असमर्थता जाहिर की थी।
बड़े विपक्षी दल के नेताओं की गैरहाजिरी के कारण 12 जून को पटना में प्रस्तावित विपक्षी दलों की बैठक स्थगित होने की खबर है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया, पहले से तय प्रोग्राम के कारण कई नेताओं ने अपनी परेशानी बताई, जिस कारण बैठक रद्द करनी पड़ी।
इसी बीच रविवार आधी रात के ठीक बाद करीब 12-09 बजे समाचार एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि विपक्षी दलों की बैठक 23 जून को होने की संभावना है। इस संबंध में किसी आधिकारिक नेता का बयान नहीं आया है।
इससे पहले रविवार को अचानक Bhagalpur Bridge Collapse की खबर भी सामने आई। हजारों करोड़ की ये परियोजना जिस तरीके से विफल हुई है, नीतीश सरकार को विपक्षी दल कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।
भाजपा नेता और बिहार विधानसभा में अध्यक्ष रहे विजय कुमार सिन्हा ने नीतीश की मानसिकता पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि भागलपुर हादसा नीतीश की राजनीतिक अस्थिरता की मानसिकता का परिणाम है, इसके कारण राज्य में प्रशासनिक अराजकता और भ्रष्टाचार है।
भागलपुर में निर्माणाधीन अगुवानी-सुल्तानगंज पुल का बड़ा हिस्सा भरभराकर गिरने पर बिहार में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में कमीशन (रिश्वत) मांगने की परंपरा है। व्यवस्था ध्वस्त हो रही है लेकिन वे विपक्षी एकता की बात कर रहे हैं।"
ऐसे में भागलपुर हादसे के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई और मेजबानी में राजधानी पटना में होने वाली अपोजिशन की मीटिंग स्थगित होने की खबर चौंकाने वाली है। फिलहाल सूत्रों के हवाले से मीटिंग में कई बड़े गैर भाजपाईयों के न पहुंचने के आधार पर स्थगन की खबर ही सामने आई है।

बता दें कि विगत एक-दो महीने में अपोजिशन यूनिटी की कवायद में नीतीश के दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मुलाकात की खबरें सुर्खियों में रही हैं। नीतीश दिल्ली में सीएम अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात कर चुके हैं।
इसके अलावा नीतीश महाराष्ट्र में पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कांग्रेस आलाकमान- मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी सरीखे नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं।
पड़ोसी राज्य झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भी नीतीश की बैठक में आने का आश्वासन दे चुके हैं। इस कवायद के बारे में सियासी पंडितों का मानना है कि CM नीतीश 475 लोक सभा सीटों पर साझा रणनीति बना रहे हैं।












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