सावधान: बच्‍चों में फैल रही ये कोरोना से रिलेटेड अजीब बीमारी, जानें क्या हैं उसके लक्षण

सावधान: बच्‍चों में फैल रही ये कोरोना से रिलेटेड अजीब बीमारी, जानें क्या हैं उसके लक्षण

नई दिल्‍ली। कोरोनावारस का संक्रमण भारत में बढ़ता ही जा रहा हैं। देश में कोविड 19 पॉजिटिव के मरीजों की संख्‍या 1 लाख को पार कर चुकी हैं। इस संकट के बीच भारत में कोरोना वायरस से संबंधित एक अजीब बीमारी बच्‍चों में देखने को मिल रही हैं। चिकित्‍सक इस नई और अजीब बीमारी को कोरोनावायरस से जोड़ कर देख रहे हैं। आश्‍चर्य की बात ये हैं कि इसमें कोरोना संक्रमण जैसे कोई भी लक्षण देखने को नहीं मिल रहे हैं। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने भी इसे लेकर एक अलर्ट जारी किया है।

ये सिंड्रोम कोरोना वायरस का एक गंभीर लक्षण हो सकता हैं

ये सिंड्रोम कोरोना वायरस का एक गंभीर लक्षण हो सकता हैं

डॉक्टरों की मानें तो जो भी बच्चे मल्टी सिस्टम इंफ्लामेंट्री सिंड्रोम से ग्रसित हैं उनका बहुत ख्‍याल रखने की जरुरत है। यहां तक कि डाक्‍टरों ने चेताया हैं कि ऐसे में ये भी हो सकता हैं कि उन्‍हें अस्‍पलात तक में एडमिट करवाना पड़े। बच्‍चों में पाया जा रहा ये सिंड्रोम कोरोना वायरस का एक गंभीर लक्षण हो सकता हैं। डाक्टरों के अनुसार इस बीमारी के सभी सिम्टम कोरोना वायरस संक्रमण से अलग होते हैं।

तमिलनाडु में पाया गया एक केस

तमिलनाडु में पाया गया एक केस

भारतीयों बच्‍चों में इस सिंड्रोम के सिम्‍टम दिखने शुरु हो चुके हैं। पिछले दिनों तमिलनाडु की राजधानी चेन्‍नई में कोरोनावायरस से जुड़े ये लक्षण 8वर्ष के बच्‍चें में पाए गए। डॉक्टरों के अनुसार इस बीमारी की वजह से बच्चे के पूरे शरीर में सूजन आ गई और शरीर पर लाल चकत्ते पड़ गए। कोरोना वायरस जैसे लक्षण भी दिख रहे थे। उसे आनन-फानन में अस्‍पताल के आईसीयू में एडमिट करवाया गया। हालांकि राहत भरी खबर ये हैं कि अब वो बच्‍चा बिलकुल ठीक हो चुका हैं। जर्नल ऑफ इंडियन पीडियाट्रिक्स में पब्लिश की रिपोर्ट के मुताबिक, चेन्नई के इस बच्चे में टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम, कोरोना वायरस, निमोनिया और कावासाकी बीमारी के लक्षण एकसाथ मिले थे। इम्युनोग्लोबुलिन और टोसीलीजुंबैब दवाएं देने के बाद वह बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो गया है।

जानें इंफ्लेमेट्री मल्टी-सिस्टम सिंड्रोम क्या हैं

जानें इंफ्लेमेट्री मल्टी-सिस्टम सिंड्रोम क्या हैं

हाल ही में जारी एक रिपेार्ट के अनुसार इटली के विशेषज्ञों ने कोरोना वायरस और इस बीमारी के बीच संबध को ढुढ़ निकाला है। उन्‍होंने बताया कि ये रेयर किस्म की बीमारी है और इसे पीडिएट्रिक इंफ्लेमेट्री मल्टी-सिस्टम सिंड्रोम नाम दिया गया है। उत्तरी इटली के उन क्षेत्रों में जहां कोरोना वायरस के मामले ज्यादा सामने आए थे वहां पिछले दो महीने में इससे बच्चों के बीमार पड़ने की दर 30 गुना ज्यादा पाई गई है। अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने भी सिंड्रोम से पीड़ित 145 मामलों के कोरोना से संबंध होने की पुष्टि की है। बता दें इंफ्लेमेट्री मल्टी-सिस्टम सिंड्रोम बीमारी से शरीर में मल्टी सिस्टम इंफ्लामेंट्री सिंड्रोम यानी शरीर में जहरीले तत्व उत्पन्न होने लगते हैं और पूरे शरीर में फैल जाते हैं। इसका असर कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है। इससे एकसाथ कई अंग काम करना बंद कर सकते हैं और बच्चे की जान भी जा सकती है।

सिंड्रोम से कई बच्चों के दिल को नुकसान पहुंचा है

सिंड्रोम से कई बच्चों के दिल को नुकसान पहुंचा है

वहीं अमेरिका के सेंटर फार कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के डॉक्टर ने बताया कि इसके लक्षण कोरोना वायरस के स्पष्ट लक्षणों की तरह नहीं हैं।डॉक्टरों ने बताया कि ये नए सिंड्रोम से कई बच्चों के दिल को नुकसान पहुंचा है और उन्हें तुरंत अस्‍पताल भेज कर इलाज करवाया गया। डॉक्टर इस बारे में पूर्ण रुप से आश्‍वस्‍त हैं कि इसमें कोरोना वायरस की ही भूमिका है। डाक्‍टरों के अनुसार इसमें भले बच्‍चें की कोरोना टेस्‍ट की रिपोर्ट निगेटिव आए लेकिन कोरोना संक्रमण जैसे कोई लक्षण ना दिखें फिर भी ये कोरोना ही हैं। डॉक्टर जेम्स श्नाइडर ने सलाह दी कि 'घर पर किसी भी बच्चे को बुखार, पेट में दर्द या शरीर पर चकत्ते और कंजक्टिवाइटिस जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, उन्हें तुरंत किसी चाइल्‍ड स्‍पेशलिस्‍ट को दिखाना चाहिए।

डब्ल्यूएचओ दे चुका है ये चेतावनी

डब्ल्यूएचओ दे चुका है ये चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस नई दुर्लभ बीमारी को लेकर पहले ही गाइडलाइन जारी कर चुका हैं। डॉक्टर मारिया वैन कोरखोव ने कहा कि बच्चों में इंफ्लामेट्री सिंड्रोम जैसे हाथों या पैरों पर लाल चकत्ते निकलना, सूजन आना या पेट में दर्द होना कोरोना के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखें तो बच्‍चों तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। वहीं संगठन के कार्यकारी निदेशक माइकल जे. रेयान ने कहा कि हो सकता है कि बच्चों में दिखने वाला मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेट्री सिंड्रोम सीधे कोरोना वायरस के लक्षण न होकर वायरस के खिलाफ शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र की अत्यधिक सक्रियता का परिणाम हो। इसलिए अभी और जांच जरूरी है।

शुरुआत में ये सिंड्रोम कावासाकी जैसी दुर्लभ बीमारी का लगा

शुरुआत में ये सिंड्रोम कावासाकी जैसी दुर्लभ बीमारी का लगा

बता दें डॉक्टरों का कहना है कि पहली नजर में ये सिंड्रोम कावासाकी जैसी दुर्लभ बीमारी का लगा लेकिन वास्‍तव में ये कोरोना से रिलेटेड बीमारी थी। अमेरिका के बच्चों में ये बीमारी तेजी से बढ़ रही हैं। टेक्सास के कुक चिल्ड्रन मेडिकल सेंटर में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर निकोलस रिस्टर ने कहा कि उन्होंने इस तरह के लक्षणों वाले कई बच्चों की जांच की है। इनमें से ज्यादातर बच्चों का कहना था कि यह बहुत भयानक है और उन्हें कई तरह का दर्द महसूस हो रहा था। बच्चों के शरीर में सूजन देखी गई, विशेष रूप से हाथों, पैरों और यहां तक कि मुंह में भी।

बच्चे में ये लक्षण हैं, तो तुंरत डाक्टर से संपर्क करें

बच्चे में ये लक्षण हैं, तो तुंरत डाक्टर से संपर्क करें

अगर बच्‍चे को पांच दिन तक लगातार फीवर हैं
बच्‍चा को खाने पीने में दिक्‍कत हो रही हो पेट में दर्द
बच्चों के होठ या जीभ पर लाल दाने भी आ जाना
आंखों का लाल हो जाना और उसमें दर्द महसूस होना
उल्टियां हो रही स्किन का कलर में परिवर्तन हो रहा
या स्किन पर चकत्‍ते या कलर ब्लू हो रहा
सांस लेने में दिक्कत हो रही या बच्‍चा जल्‍दी-जल्‍दी सांस ले रहा
चेस्‍ट और हार्ट में दर्द की शिकायत
मूत्रविर्सनज कम हो जाना
बच्‍चें में आलस और चिडचिड़ाहट,
ध्‍यान न लगा पाना
कन्‍फयूजन के स्‍टेटस में रहना
खाने में कठिनाई या कुछ भी पीने में समस्या आना
हाथों और पैरों में सूजन और लालिमा आ जाना
गर्दन में सूजन हो जाना भी प्रमुख लक्षण

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