Bengaluru सीवेज प्लांट में हादसा, 40 फीट गहरे जहरीले टैंक में डूबा बिहार का मजदूर, NDRF का रेस्क्यू जारी
Bengaluru Sewage Tank Accident: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के वरथुर इलाके से एक बेहद दर्दनाक और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। यहां 'बेंगलुरु वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड' (BWSSB) के एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में काम करने के दौरान तीन मजदूर अचानक 40 फीट गहरे जहरीले टैंक (पंपिंग वेट वेल) में गिर गए।
हादसे में एक मजदूर किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकलने में कामयाब रहा, जबकि दो अन्य मजदूरों के टैंक में डूबने की आशंका जताई जा रही है।

लापता मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और अग्निशमन सेवा के जवान कल रात से ही युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह घटना गुरुवार 18 जून 2026 शाम करीब 6:10 से 6:30 बजे के बीच वरथुर के बेलागेरे स्थित 90 MLD क्षमता वाले बेलान्दूर एसटीपी प्लांट में हुई।
यहां सीवरेज बोर्ड के तीन आउटसोर्स मजदूर प्लांट के ट्रीटमेंट सिस्टम में लगे तीन गेटों की रिपेयरिंग करने के लिए करीब 40 से 60 फीट गहरे सीवेज टैंक के पास काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक अनियंत्रित होने के कारण तीनों मजदूर गहरे सीवेज टैंक के भीतर गिर गए।
बिहार और तमिलनाडु के मजदूर लापता,तीसरे मजदूर ने बचाई जान
डेकेन हेराल्ड के मुताबिक- हादसे के बाद से जिन दो मजदूरों का पता नहीं चल पाया है, उनकी पहचान बिहार निवासी बृजेश कुमार और तमिलनाडु निवासी अगिलन मोहन के रूप में हुई है। दोनों को खोजने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
घटना के समय तीसरे कर्मचारी कार्तिक भी टैंक के अंदर मौजूद थे। कार्तिक किसी तरह टैंक से बाहर निकलने में सफल रहे और उन्होंने अन्य कर्मचारियों को हादसे की जानकारी दी। इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। रेस्क्यू अधिकारियों के मुताबिक, कार्तिक ने ही बचाव टीम को बताया कि हादसे के समय टैंक के अंदर क्या हुआ था।
विषैली गैसों और अंधेरे के कारण रेस्क्यू में आ रही भारी रुकावट
NDRF और फायर ब्रिगेड की टीमों ने गुरुवार की पूरी रात सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन परिस्थितियों ने बचाव कार्य को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है। बचाव दल के सामने दो बड़ी चुनौतियां आ रही हैं। NDRF के मुताबिक सीवेज टैंक के भीतर भारी मात्रा में मीथेन और अन्य जहरीली गैसें भरी हुई हैं।
NDRF की टीमें पहले टैंक के भीतर ऑक्सीजन पहुंचाने और जहरीली गैसों को बाहर निकालने में जुटी हैं, ताकि गोताखोर बिना किसी खतरे के अंदर जा सकें। गंदे पानी के तेज बहाव और अंधेरे के कारण भी रेस्क्यू टीम को टैंक के तल तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
लापरवाही पर BWSSB ने बैठाई उच्च स्तरीय जांच समिति
हादसे की खबर मिलते ही BWSSB की चेयरपर्सन एन. मंजुला ने घटनास्थल का दौरा किया और अधिकारियों को तलाशी अभियान और तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सीवरेज बोर्ड (BWSSB) ने इस पूरे हादसे की जांच के लिए शुक्रवार को तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है। यह समिति बेलंदूर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में हुए हादसे की विस्तृत जांच करेगी।
जांच समिति में शामिल अधिकारी
- के.एन. राजीव - मुख्य अभियंता
- के.एस. रेनुकुमार - अतिरिक्त मुख्य अभियंता
- विनुता डीएस - उप मुख्य अभियंता
समिति को यह पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, सुरक्षा नियमों का पालन हुआ या नहीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। BWSSB ने समिति को 20 जून दोपहर 12 बजे तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।














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