Bengaluru Second Airport: बेंगलुरू में कहां बन रहा दूसरा नया एयरपोर्ट? डी.के. शिवकुमार ने कर दिया खुलासा
Bengaluru Second Airport Location: बेंगलुरू के रहने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी की खबर सामने आई है। मुंबई के बाद अब बेंंगलुरू को एक दूसरा एयरपोर्ट मिलने वाला है। कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने बड़ा खुलासा करते हुए, ये भी बताया है कि आखिर बेंगलुरू के नए एयरपोर्ट शहर की किस लोकेशन में होगा।
डिप्टी सीएम शिवकुमार ने 18 नवंबर को बेंगलुरु के दूसरे हवाई अड्डे के संभावित स्थान का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि यह नया हवाई अड्डा बेहतर और व्यापक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

दरअसल, 18 नवंबर को बेंगलुरु टेक समिट 2025 में शिवकुमार ने बेंगलुरु में एक और एयरपोर्ट के निर्माण की योजना का अनावरण किया। बेंगलुरु टेक समिट 2025 में बोलते हुए, शिवकुमार ने घोषणा की कि सरकार शहर के दूसरे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए साउथ बेंगलुरु में एक स्थान पर विचार कर रही है।
साउथ बेंगलुरू में कहां बनेगा नया एयरपोर्ट?
अक्टूबर महीने से, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) बेंगलुरु के दूसरे हवाई अड्डे के लिए संभावित स्थानों को शॉर्टलिस्ट कर रहा है। बता दें मार्च महीने में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए तीन स्थानों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। इनमें कग्गालिपुरा और हारोहल्ली के पास कनकपुरा रोड पर दो स्थान, और उत्तरी बेंगलुरु में कुनिगल रोड पर एक अन्य स्थान शामिल है। हालांकि डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक किसी भी स्थान को औपचारिक रूप से अंतिम रूप नहीं दिया गया था।
कब तक तैयार हो जाएगा बेंगलुरू का नया एयरपोर्ट?
यह निर्णय इस साल की शुरुआत में किए गए प्रारंभिक कार्य के बाद आया है, क्योंकि कर्नाटक सरकार ने मार्च 2025 में प्रस्तावित हवाई अड्डे के लिए तीन स्थानों को अंतिम रूप दिया था। कर्नाटक के बुनियादी ढांचा विकास और उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल ने कहा कि सरकार ने नए हवाई अड्डे के लिए प्रारंभिक कार्य शुरू कर दिया है। एक नियम के अनुसार, मौजूदा केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (केआईए) के 150 किमी के दायरे में 2033 तक नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण नहीं किया जा सकता है।
यह प्रारंभिक कार्य यह सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया है कि नया हवाई अड्डा उस वर्ष तक तैयार हो जाए, क्योंकि ऐसे बड़े पैमाने की परियोजनाओं को पूरा होने में कम से कम पांच या छह साल लगते हैं।












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