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Bengaluru Metro: खुशखबरी, बेंगलुरू में नम्‍मा मेट्रो का नहीं बढ़ेगा किराया, आखिर क्‍यों वापस लिया गया फैसला?

Bengaluru Metro: बेंगलुरू में नम्‍मा मेट्रो पर सफर करने वाले यात्रिायों के लिए बड़ी खुशखबरी की खबर सामने आई है। बेंगलुरू मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) ने अपनी एनुअल ऑटोमैटिक फ़ेयर रिविज़न स्कीम को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है। याद रहे ये 9 फरवरी (सोमवार) से लागू होने वाली थी। इस स्‍कीम के तहत शहर में सभी लाइनों की नम्‍मा मेट्रो के किराए में 5 फीसदी की बढोत्‍तरी होने वाली थी।

लेकिन मेट्रो का किराया बढ़ाए जाने के फैसले पर जनता के तीव्र विरोध और राज्य के कांग्रेस नेतृत्व तथा केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के बीच तीखी राजनीतिक तकरार के बाद ये मेट्रो के टिकट का किराया बढ़ाने का फैसला वापस ले लिया गया है।

Bengaluru Metro

क्‍या नहीं बढ़ेगा मेट्रो का किराया?

BMRCL ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पुष्टि की है कि अगले आदेश तक मौजूदा किराया ही लागू रहेगा। निगम निदेशक मंडल संशोधित मूल्य स्लैब की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई तय करेगा।कॉर्पोरेशन ने अपने बयान में कहा, "5 फरवरी 2026 की मीडिया विज्ञप्ति में 9 फरवरी 2026 से वार्षिक किराया संशोधन की घोषणा की गई थी, उसे अब अगले आदेश तक स्थगित रखा गया है। संशोधित किराए पर निर्णय बोर्ड की समीक्षा के बाद ही घोषित किया जाएगा।"

क्‍यों मेट्रो का किराया बढ़ाने का फैसला लिया गया वापस?

यह विवाद तब गरमाया जब बेंगलुरु दक्षिण के सांसद तेजस्वी सूर्या ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर से याचिका करके उन्होंने इस किराया वृद्धि को रुकवाया है। सूर्या ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के प्रशासन पर "कमजोर वित्तीय स्थिति" की भरपाई के लिए किराया बढ़ाने का आरोप लगाया, जिसे उन्होंने कांग्रेस की "जनता-लुभावन गारंटी योजनाओं" का परिणाम बताया।

सांसद ने किराया निर्धारण समिति (FFC) की रिपोर्ट में "mathematical errors" का भी जिक्र किया। उन्होंने तर्क दिया कि बेंगलुरु में पहले से ही भारत का सबसे महंगा मेट्रो सिस्टम है, और किसी भी अतिरिक्त वृद्धि से मध्यम वर्ग के लिए सार्वजनिक परिवहन बहुत महंगा और दुर्गम हो जाएगा।

जवाब में, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भाजपा के आरोपों को "जनता को गुमराह करने का जानबूझकर किया गया प्रयास" बताते हुए जिम्मेदारी से इनकार किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेट्रो रेलवे (संचालन और रखरखाव) अधिनियम, 2002 के तहत किराए केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक स्वतंत्र समिति तय करती है, राज्य का इसमें कोई कानूनी अधिकार नहीं।

BMRCL ने क्‍या कहा?

डी.के. शिवकुमार ने जानकारी दी कि BMRCL बोर्ड ने उनसे इस संशोधन पर कोई परामर्श नहीं किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति के अध्यक्ष एक केंद्रीय सरकारी सचिव हैं, जिससे विवाद का केंद्र प्रभावी रूप से केंद्र सरकार की ओर चला जाता है।

इस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच, कल होने वाली BMRCL बोर्ड की बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भाजपा का आग्रह है कि राज्य लागतों को तर्कसंगत बनाने के लिए एक नई किराया निर्धारण समिति का औपचारिक रूप से अनुरोध करे। वहीं, कांग्रेस नेतृत्व का मत है कि मूल्य वृद्धि का प्राथमिक चालक वास्तव में केंद्रीय ढांचा ही है।

बेंगलुरु के लाखों दैनिक यात्रियों को फिलहाल अस्थायी राहत मिली है, हालाँकि "नम्मा मेट्रो" की दीर्घकालिक वहनीयता शहर के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।

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