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Bengaluru Bike Taxi Relief: बेंगलुरु में फिर लौटेंगी 'बाइक टैक्सी'! Ola-Uber को कर्नाटक हाईकोर्ट से मिली राहत

Bengaluru Bike Taxi Relief: बेंगलुरु के हजारों राइडर्स के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। बेंगलुरु में बाइक टैक्सी सेवाओं (Rapido, Ola, Uber) पर लंबे समय से चल रहा कानूनी संकट अब खत्म हो गया है।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार 23 जनवरी 2026 को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बाइक टैक्सी पर लगे प्रतिबंध को पूरी तरह हटा दिया है। उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा बाइक टैक्सी सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंध को अवैध करार देते हुए उसे रद्द कर दिया है।

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अदालत ने स्पष्ट किया कि दोपहिया वाहनों को 'कॉन्ट्रैक्ट कैरिज' के रूप में संचालित करने से नहीं रोका जा सकता। विस्तार से पढ़िए कोर्ट ने अपने आदेश में क्या-क्या कहा...

Karnataka High Court Order: हाईकोर्ट ने अपने फैसला में क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरु और न्यायमूर्ति सीएम जोशी की खंडपीठ ने ओला (ANI Technologies), उबर और रैपिडो (Roppen Transportation) द्वारा दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे मोटरसाइकिलों को 'परिवहन वाहन' (Transport Vehicles) के रूप में पंजीकृत करें।

सरकार अब इस आधार पर परमिट देने से इनकार नहीं कर सकती कि मोटरसाइकिलें टैक्सी के रूप में नहीं चल सकतीं। हालांकि, कोर्ट ने क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) को यह छूट दी है कि वे सुरक्षा और संचालन के लिए जरूरी शर्तें और नियम लागू कर सकते हैं।

Ola Uber Bike Taxi Ban: बाइक टैक्सी पर क्यों लगा था प्रतिबंध?

इससे पहले 2 अप्रैल, 2025 को हाईकोर्ट की एक एकल पीठ ने बाइक टैक्सी पर रोक लगा दी थी। उस समय तर्क दिया गया था कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 93 के तहत राज्य सरकार ने कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं बनाई है। इसके अलावा, ऑटो-रिक्शा यूनियनों के भारी विरोध और सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने इन सेवाओं को 'अवैध' घोषित कर दिया था।

6 लाख परिवारों को मिलेगी संजीवनी

बाइक टैक्सी ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने अदालत में दलील दी थी कि इस प्रतिबंध से राज्य भर के लगभग 6.5 लाख परिवारों की आजीविका संकट में पड़ गई थी। कई युवाओं ने कर्ज लेकर बाइक खरीदी थी ताकि वे पार्ट-टाइम काम करके अपना घर चला सकें। आज के फैसले के बाद इन गिग वर्कर्स (Gig Workers) ने खुशी जाहिर की है।

यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?

बेंगलुरु जैसे भारी ट्रैफिक वाले शहर में बाइक टैक्सी को 'लास्ट माइल कनेक्टिविटी' के लिए सबसे सस्ता और तेज विकल्प माना जाता है।

  1. किराया: ऑटो और कैब की तुलना में बाइक टैक्सी का किराया काफी कम होता है।
  2. समय की बचत: संकरी गलियों और भारी ट्रैफिक के बीच बाइक टैक्सी यात्रियों को जल्दी मंजिल तक पहुँचाती है।
  3. महिलाओं की सुरक्षा: सुनवाई के दौरान एक महिला यात्री ने कोर्ट को बताया था कि बाइक टैक्सी उनके लिए बसों और ऑटो की तुलना में अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित विकल्प साबित हुई हैं।

क्या होगा सरकार का अगला कदम?

परिवहन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा है कि सरकार अभी फैसले की कॉपी का इंतजार कर रही है। आधिकारिक आदेश पढ़ने के बाद ही तय किया जाएगा कि क्या सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी या नई नियमावली (Policy) तैयार करेगी।

यह फैसला न केवल स्टार्टअप्स और गिग इकोनॉमी की जीत है, बल्कि यह बेंगलुरु की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। अब देखना यह होगा कि ऑटो यूनियनों के विरोध के बीच सरकार इस नई व्यवस्था को कैसे लागू करती है।

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