'ममता हमारी मार्गदर्शक, अभिषेक से हमारा कोई लेना-देना नहीं’, TMC हथियाने वाले ऋतब्रत बनर्जी का आया बड़ा बयान
Bengal New LoP Ritabrata Banerjee: पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बड़ा नाटकीय मोड़ आ गया है। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को नवगठित 18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया है। उनके इस अप्रत्याशित पदभार ग्रहण ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से झकझोर दिया है।
2026 विधानसभा चुनाव में करारी हार और संगठन में बढ़ते बिखराव के बीच नेता प्रतिपक्ष (LoP) की कमान संभालते ही बागी खेमे के प्रमुख नेता ऋतब्रत बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसा तीखा और बड़ा बयान दिया, जिसने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है।

'TMC की सर्वोच्च नेता सिर्फ ममता बनर्जी'
नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद ऋतब्रत बनर्जी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट की। ऋतब्रत बनर्जी ने उन सभी चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि बागी गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती देना या उनके राजनीतिक वजूद को खत्म करना चाहता है। उन्होंने साफ कहा कि ममता बनर्जी के प्रति उनकी निष्ठा अडिग है, पार्टी की सर्वोच्च नेता आज भी सिर्फ ममता बनर्जी ही हैं।
'ममता हमारी मार्गदर्शक और संरक्षक
ऋतब्रत बनर्जी ने जोर दिया कि औपचारिक निष्कासन के बावजूद, पार्टी की संस्थापक ममता बनर्ती के नेतृत्व के प्रति उनकी निष्ठा कायम है। ऋतब्रत बनर्जी ने उम्मीद जताई कि ममता बनर्जी आगे भी मार्गदर्शक और संरक्षक की भूमिका में रहकर संसदीय दल का सही दिशा में नेतृत्व करती रहेंगी, क्योंकि इसी संघर्ष और नेतृत्व की नींव पर पार्टी खड़ी हुई है।
...लेकिन अभिषेक से कोई लेना-देना नहीं
लेकिन ऋतब्रत बजर्नी ने पार्टी की मौजूदा स्थिति और संगठनात्मक कमजोरी के लिए सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराते हुए स्पष्ट किया कि 18वीं विधानसभा के संदर्भ में अभिषेक बनर्जी की किसी तरह की भूमिका अब नहीं बची है और इस सदन की राजनीतिक जिम्मेदारियों से उनका कोई संबंध नहीं है।
ऋतब्रत बनर्जी कैसे अचानक बन गए LoP?
गौरतलब है कि ऋतब्रत बनर्जी ने विधानसभा परिसर का दौरा कर स्पीकर के समक्ष विपक्ष के नेता के रूप में अपना दावा औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया। उन्होंने शक्ति प्रदर्शन करते हुए दावा किया कि सदन में मौजूद कुल 80 टीएमसी विधायकों में से 59 विधायकों का उन्हें स्पष्ट समर्थन प्राप्त है। यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस की विधायी शाखा में एक बड़े संरचनात्मक विद्रोह का सशक्त संकेत है।
हालांकि नाटकीय राजनीतिक विभाजन और निष्कासित सदस्य को विपक्ष का नेता घोषित करने से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। टीएमसी नेतृत्व इस घटनाक्रम को असंवैधानिक राजनीतिक चाल मान रहा है। वे कानूनी माध्यमों से इसे चुनौती देने की तैयारी में तेजी से जुटे हैं, जिससे एक बड़ा राजनीतिक द्वंद्व शुरू होगा।













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