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बंगाल,बिहार समेत 9 राज्‍यों के बदले राज्‍यपाल, दिल्‍ली को मिला नया LG, किसे कहां की और क्‍यों मिली जिम्‍मेदारी

States got new Governor and lG: केंद्र सरकार ने देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बड़े संवैधानिक बदलावों की घोषणा की है। इस फेरबदल के तहत दिल्ली, लद्दाख, बिहार, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, नागालैंड, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में नए उपराज्यपाल और राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपालों और उपराज्यपालों की नियुक्तियों तथा स्थानांतरण से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी है।

इस फेरबदल के तहत कुछ राज्यपालों के इस्तीफे स्वीकार किए गए हैं, जबकि कुछ को नए राज्यों में स्थानांतरित किया गया है और कुछ नई नियुक्तियां की गई हैं। इन नियुक्तियों में कई वरिष्ठ राजनयिकों, सैन्य अधिकारियों और अनुभवी राजनेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जानिए किसे कहां की कमान मिली और क्यों?

9 states got new Governor

पश्चिम बंगाल में बोस का अचानक इस्‍तीफा, आर एन रवि बने राज्‍यपाल

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने राष्‍ट्रपति को अचानक इस्‍तीफा सौंपा। सी.वी. आनंद बोस के अचानक इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद ही R. N. Ravi को नया राज्यपाल नियुक्त किया गया। तमिलनाडु में राज्‍यपाल पद संभाल रहे R. N. Ravi की नियुक्ति पश्चिम बंगाल चुनाव से ठीक पहले की गई है।

चुनाव से पहले रवि को क्‍यों सौंपी गई बंगाल की कमान?

रवि 1976 केरल कैडर के IPS अधिकारी हैं। CBI और IB जैसी संवेदनशील एजेंसियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां है। निभा चुके पूर्व आईपीएस अधिकारी R. N. Ravi ने खुफिया तंत्र और केंद्र सरकार में कई अहम पदों पर कार्य किया है।पूर्व आईपीएस अधिकारी रवि का करियर उग्रवाद विरोधी अभियानों और पूर्वोत्तर भारत में नागा शांति वार्ता जैसी महत्वपूर्ण शांति वार्ताओं के लिए विशेष तौर पर जाना जाता है।

वर्ष 2021 से ये Tamil Nadu के राज्यपाल के रूप में कार्यरत रहे हैं। पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले एक पूर्व आईपीएस अधिकारी को यह अंतरिम प्रभार सौंपना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनकी नियुक्ति पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति और राजनीतिक उठापटक को देखते हुए काफी अहम मानी जा रही है।

कड़े प्रशासनिक निर्णयों और संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति उनकी गहरी निष्ठा अक्सर चर्चा में रहती है। ऐसे में बंगाल में केंद्र और राज्य के बीच संबंधों तथा स्थानीय प्रशासन के लिए उनका कार्यकाल बेहद महत्वपूर्ण होने की उम्मीद है।

सैयद अता हसनैन को क्‍यों बनाया गया बिहार का राज्‍यपाल?

लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (रिटायर्ड) को बिहार का नया राज्यपाल बनाया गया है। भारतीय सेना के एक सम्मानित अधिकारी, जनरल हसनैन को रणनीति मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। उनके पास कश्मीर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में काम करने का लंबा अनुभव है। उन्होंने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं। बिहार जैसे राज्य में उनकी नियुक्ति से प्रशासन में अनुशासन और सुरक्षा पर मजबूत दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

तरनजीत सिंह संधू को क्‍यों बनाया गया दिल्‍ली का राज्‍यपाल?

अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। संधू, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के व्यापक अनुभव वाले एक मंझे हुए राजनयिक हैं, जिन्होंने वाशिंगटन डीसी और श्रीलंका में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। दिल्ली जैसे संवेदनशील केंद्र शासित प्रदेश में उनकी नियुक्ति को केंद्र और राज्य प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। उनकी पहचान एक शांत और प्रभावी प्रशासक के रूप में है।

विनय कुमार सक्‍सेना को क्‍यों बनाया लद्दाख LG?

दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को अब लद्दाख का नया उपराज्यपाल बनाया गया है, जहां उन्होंने कविंदर गुप्ता का स्थान लिया है। सक्सेना दिल्ली में अपने सक्रिय और विकास-केंद्रित दृष्टिकोण के लिए मशहूर थे। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और दुर्गम लद्दाख क्षेत्र में उनकी नियुक्ति से बुनियादी ढांचे के विकास और सीमावर्ती सुरक्षा चिंताओं को सुलझाने में सहायता मिलेगी। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के अध्यक्ष के तौर पर उनके अनुभव से लद्दाख के स्थानीय उद्योगों और पर्यटन को भी नई दिशा मिलने की संभावना है। यह पहाड़ी क्षेत्र के आर्थिक विकास को तेज़ी देगा।

जिष्‍णु देव वर्मा को क्‍यों बनाया गया महाराष्‍ट्र राज्‍यपाल?

तेलंगाना के राज्यपाल रहे जिष्णु देव वर्मा को अब महाराष्ट्र का कार्यभार सौंपा गया है। वर्मा त्रिपुरा के पूर्व उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और वे राज्य के शाही परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पास लंबा राजनीतिक अनुभव है और उन्हें पूर्वोत्तर में भाजपा के आधार को मजबूत करने वाले प्रमुख नेताओं में से एक माना जाता है। महाराष्ट्र जैसे देश के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक केंद्र में उनकी नियुक्ति का उद्देश्य राज्य की स्थिरता और केंद्र सरकार के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।

नंद किशोर यादव को क्‍यों बनाया गया नागालैंड का राज्यपाल?

बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। यादव बिहार विधानसभा में कई बार विधायक रह चुके हैं और उन्होंने सड़क निर्माण जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला है। संगठन और प्रशासन में उनकी गहरी पकड़ उन्हें नागालैंड जैसे राज्य के लिए उपयुक्त बनाती है, जहाँ शांति प्रक्रियाओं और विकास को संतुलित करना एक प्रमुख चुनौती है।

शिव प्रताप शुक्ला को क्‍यों बनाया तेलंगाना का राज्‍यपाल?

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे शिव प्रताप शुक्ला को अब तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। शुक्ला केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री रह चुके हैं और उन्हें उत्तर प्रदेश की राजनीति का लंबा अनुभव है। वे अपनी सादगी और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। तेलंगाना जैसे तेजी से विकसित हो रहे राज्य में उनकी नियुक्ति संवैधानिक मर्यादाओं के पालन और कई विकास परियोजनाओं की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को क्‍यों सौंपी तमिलनाडु राज्‍यपाल की जिम्‍मेदारी?

केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को अब तमिलनाडु के राज्यपाल के कार्यों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। अर्लेकर गोवा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रह चुके हैं। उन्हें एक अनुभवी राजनीतिज्ञ और संसदीय प्रक्रियाओं के गहरे जानकार माना जाता है। तमिलनाडु में आर.एन. रवि के जाने के बाद, अर्लेकर वहां राजभवन और राज्य सरकार के बीच संवैधानिक संतुलन बनाए रखने का महत्वपूर्ण कार्य करेंगे। उनका उद्देश्य सुचारु संवैधानिक कामकाज सुनिश्चित करना होगा।

कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का राज्‍यपाल क्‍यों बनाया गया?

लद्दाख के पूर्व उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता को अब हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। उन्होंने शिव प्रताप शुक्ला का स्थान लिया है, जिन्हें तेलंगाना भेजा गया है। गुप्ता जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और उनके पास लंबा राजनीतिक व प्रशासनिक अनुभव है।

हिमाचल जैसे खूबसूरत पहाड़ी और पर्यटन प्रधान राज्य में उनका शांत स्वभाव और जमीनी पकड़ प्रशासन के लिए लाभदायक सिद्ध होगी। वे राज्य के विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र के साथ प्रभावी सेतु का काम करेंगे।

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