लोकसभा चुनावों से पहले तेलंगाना चुनाव कांग्रेस और भाजपा के लिए है ये अहम परीक्षण?
तेलंगाना विधान सभा चुनाव 2023 के लिए मतदान 30 नवंबर को हो रहा है और चुनाव परिणाम 3 दिसंबर को वोटों की गिनती के बाद आएगा। तेलंगाना चुनाव का परिणाम 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों में के सत्ता की महत्वपूर्ण लड़ाई में दो राष्ट्रीय दलों-कांग्रेस और भाजपा- के भाग्य का निर्धारण करेंगे। तेलंगाना के चुनाव परिणाम ये संकेत देंगे कि क्या ये राष्ट्रीय दल किसी राज्य में एक मजबूत क्षेत्रीय राजनीतिक दल को चुनौती देने की स्थिति में हैं?

बता दें कांग्रेस जहां इस चुनाव परिणाम से अपना आत्म मूल्यांकन करना चाहती है कि कांग्रेस राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और कर्नाटक विधानसभा चुनाव में प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद क्या पूरे देश में पुनरुत्थान की स्थिति में हैं?
वहीं भारतीय जनता पार्टी में तेलंगाना चुनाव ये परीक्षण कर रही है कि क्या भाजपा का नरेंद्र मोदी केंद्रित अभियान पार्टी को मजबूत क्षेत्रीय दलों के खिलाफ स्थिति बदलने में मदद करेगा क्योंकि पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में क्षेत्रीय दल मजबूती से स्थापित है।
देखा जाए तो तेलंगाना का चुनाव कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए केवल एक दूसरे के खिलाफ ही नहीं बल्कि एक क्षेत्रीय राजनीतिक ताकत के खिलाफ एक लड़ाई है जो तेलंगाना राष्ट्र समिति के भारत राष्ट्र समिति में तब्दील होने के बाद से शुरू हो गई है।
हालांकि कि केसीआर की गुलाबी पार्टी बीआरएस के लिए ये अग्निपरीक्षा भी है क्योंकि बीआरएस तेलंगाना में सत्ता बरकरार रखकर हैट्रिक हासिल करने के लिए दोनों राष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वियों की ताकत का मुकाबला कर रही है। जिस दो विरोधी पार्टियों की लड़ाई में क्षेत्रीय दलों के लिए कोई जगह नहीं है।
तेलंगाना के चुनाव प्रचार में जिस तरह से दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के दिग्गज जुटे हैं, उससे साफ है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों तेलंगाना में एक गंभीर लड़ाई लड़ रहे हैं। देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस और भाजपा की भगवा ब्रिगेड के सभी शीर्ष नेता देश भर से तेलंगाना पहुंचे।
राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा, मल्लिकार्जुन खड़गे, अन्य एआईसीसी पदाधिकारियों और पूर्व केंद्रीय मंत्रियों के साथ-साथ कर्नाटक के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों ने तेलंगाना विधानसभा चुनाव के लिए कई दिनों तक प्रचार किया।
वहीं भाजपा के प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों ने तेलंगाना में भाजपा के लिए रोड शो, सार्वजनिक बैठकें और रैलियां की। वहीं भाजपा से संबंधित सभी विंग- आरएसएस, विहिप, बजरंग दल, दुर्गा वाहिनी आदि के कार्यकर्ता पैदल जाकर मतदाताओं से संपर्क करते रहे।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनकी पार्टी के पक्ष में हवा है। भाजपा नेताओं को यह भी लगता है कि मोदी-शाह की बयार चल रही है। हालांकि कांग्रेस को अपनी छह गारंटियों के बलबूते चुनाव में जीत पर पूरा भरोसा है।
कांग्रेस और भाजपा के साथ पूरा देश वास्तव में 3 दिसंबर का बेसब्री से इंतजार कर रहा है, लोग ये जानने के लिए बेताब है कि केसीआर की बीआरएस की क्या यह ट्रिपल हैट्रिक होगी और केसीआर का तीसरा कार्यकाल होगा, या लगातार तीन बार सत्ता हासिल करने में कांग्रेस की विफलता, और लगातार तीन चुनावों में तीसरे स्थान पर खिसकने का बीजेपी का अविश्वसनीय रिकॉर्ड बनाएगी। क्या आगामी चुनाव परिणाम पिछली दो बार 2014 और 2018 से अलग होंगे?












Click it and Unblock the Notifications