#BBCShe: शोहदों को सबक सिखाने वाली पंजाबी कुड़ियां

पिछले साल के अगस्त महीने में प्राक्षी खन्ना रविवार की एक शाम को अपने ऑफ़िस से घर लौट रही थीं. रविवार की वजह से रास्ते में पड़ने वाले बाज़ार में भी सन्नाटा पसरा हुआ था. तभी एक कार ने प्राक्षी का पीछा करना शुरू कर दिया.

प्राक्षी तेजी से अपने कदम बढ़ा ही रही थीं कि कार आगे बढ़कर उनके आगे आकर रुक गई. इसके बाद एक व्यक्ति ने उन पर चाकू से धावा बोल दिया.

पंजाब के जालंधर की एक म्युजिक कंपनी में राइटर के रूप में काम करने वाली प्राक्षी कहती हैं, "उसने मुझे कार में बैठने के लिए कहा. लेकिन मैंने उसके चाकू से बचते हुए, उसे पूरी ताकत से धक्का दिया और वह बोनट पर गिर पड़ा. फिर मैंने दौड़कर पास ही खड़े एक ऑटो वाले को पकड़ा. लेकिन अगर मैं उस दिन डर गई होती तो मैं आज शायद ज़िंदा नहीं होती."

कॉलेज स्टूडेंट संदीप कौर अपने साथ घटी एक ऐसी ही घटना को याद करते हुए बताती हैं कि वह अपने कज़िन को लेने के लिए गई थीं तभी एक आदमी ने नशे की स्थिति में अपनी बाइक से उनकी स्कूटी में टक्कर मार दी.

'हां, हम लड़के हैं और हमारा यौन शोषण हुआ'

मुक्तसर ज़िले से आने वाली संदीप कहती हैं, "इसके बाद उसने मेरे साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी तो मुझे गुस्सा आया और मैंने उसकी पिटाई कर दी."

संदीप और प्राक्षी दोनों इससे पहले भी बसों में उनके साथ छेड़छाड़ करने वाले लड़कों की ख़बर ले चुकी हैं.

अपने साथ छेड़छाड़ करने वालों की ख़बर लेने वाली ये युवा महिलाएं अकेली नहीं हैं. इन लड़कियों ने हरियाणा में ऑटो रिक्शा में अपने कराटे स्किल्स से पुलिसकर्मी को पीटने वाली लड़की की तरह अख़बारों की सुर्खियों में जगह नहीं बनाई होगी. लेकिन ये लड़कियां अपने दफ़्तरों और कॉलेजों में सनसनी पैदा कर रही हैं.

संदीप कहती हैं, "छेड़छाड़ करने वालों को रोकने वालों का यही तरीका है." पंजाब के छोटे-छोटे कस्बों और गांवों से आने वाली इन युवा महिलाएं ने सड़कों पर न रुकने वाले छेड़छाड़ को रोकने का अपना तरीका तलाश लिया है.

प्राक्षी भी कहती हैं, "इस तरह से हम अपनी इज्जत बचाने में सफल हो रहे हैं और इससे मैं अपनी मर्जी से जब चाहें जहां चाहें वहां जा सकती हैं."

नेशनल क्राइम ब्यूरो के मुताबिक़, साल 2016 में पंजाब में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के पांच हज़ार से ज़्यादा मामले सामने आए थे. इनमें से 1038 महिलाओं ने यौन शोषण और यौन उत्पीड़न के मामले दर्ज कराए हैं.

इसके बावजूद कई मामलों की शिकायतें दर्ज नहीं होती हैं. इनमें संदीप और प्राक्षी जैसे मामले शामिल हैं.

संदीप कहती हैं, "हमारे यहां सड़कें सुरक्षित नहीं हैं. ऐसे में एक ही रास्ता है कि हम आदमियों को सबक सिखाएं"

'8 साल की उम्र में पादरी ने मेरा यौन शोषण किया'

प्रतीकात्मक तस्वीर
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जालंधर के एक कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई कर रहीं प्रीति ऐसी ही महिलाओं में शामिल हैं जो अपने सम्मान की ख़ातिर लड़ने के लिए तैयार हैं.

वह कहती हैं, "मैं एक बैडमिंटन खिलाड़ी हूं और प्रैक्टिस पर जाते समय शॉर्ट्स पहनकर जाती हूं. कमेंट्स तो रोज ही सुनने को मिलते हैं लेकिन मैं डरती नहीं हूं. ऐसे कमेंट्स करने वालों को जवाब भी मिलता है, लेकिन जब चार-पांच लड़के होते हैं तब हमें डर लगता है."

लेकिन सभी लड़कियां प्रीति, प्राक्षी और संदीप की तरह नहीं सोच रही हैं.

हिमाचल प्रदेश से आने वाली शिवानी कहती हैं, "लोग हर रोज कमेंट्स पास करते हैं. आप हर किसी से लड़ाई नहीं कर सकते. कल वो आपको नुकसान भी पहुंचा सकते हैं."

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Getty Images
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ग्राफ़िक डिज़ाइनिंग करने वाली एक स्थानीय महिला जसलीन कौर कहती हैं कमेंट्स पास करने वालों पर ध्यान न देना ही ठीक है.

"अगर आपको लगता है कि कोई इलाका सुरक्षित नहीं है तो आप वहां जाएं ही क्यों. ये मुसीबत मोल लेने जैसा है."

प्राक्षी इसके जवाब में कहती हैं, "अगर हम इस तरह सोचना शुरू कर देंगे तो हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं. हम इस तरह अपनी ज़िंदगियों में आगे नहीं बढ़ सकते."

संदीप भी कहती हैं, "डरना समाधान नहीं है. आपके डर से वे मजबूत होते हैं. आज के दौर की लड़कियों को मजबूत होना पड़ेगा. ऐसे मामलों को अनदेखा करने वाली लड़कियों की वजह से कमेंट्स पास करने वालों को सड़क पर चल रही हर लड़की पर कमेंट करने की हिम्मत पैदा होती है."

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प्राक्षी भी कहती हैं, "पुलिसवालों के पास जाने का मतलब है कानूनी कार्यवाई में पड़ना जिससे घरवालों को शामिल होना मतलब है. इसका मतलब महिलाओं पर और प्रतिबंध होता है.

भारतीय कानून में अलग-अलग अपराधों के लिए अलग-अलग धाराओं के तहत कार्रवाई किए जाने का प्रावधान है.

साल 2014 के क्रिमिनल लॉ कानून संशोधन पास होने के बाद यौन शोषण (354-A, IPC), निर्वस्त्र करने (354-B, IPC), वोयेरिज़्म (354-C, IPC), पीछा करना (354-D, IPC) जैसे मामलों में इन धाराओं के तहत पुलिस में शिकायत कराई जा सकती है.

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AFP
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पंजाब यूनिवर्सिटी के समाजशास्त्र विभाग में प्रोफ़ेसर मंजीत कहते हैं, "ये सच है कि लड़कियां छेड़छाड़ करने वालों से टक्कर ले रही हैं. इसका कारण उनके अंदर पैदा होता हुआ आत्मविश्वास है. इसकी वजह से यहां की लड़कियां खेलों में भी पदक जीत रही हैं. हालांकि, ये सिर्फ पढ़ी लिखी महिलाओं के साथ हो रहा है. अशिक्षित महिलाएं आज भी शोषण का सामना कर रही हैं."

ये कहना मुश्किल है कि छेड़छाड़ के विरोध में पंजाब की लड़कियों ने मोर्चा खोल दिया है लेकिन इसके खिलाफ़ खड़ी होने वाली लड़कियों की संख़्या बढ़ रही है.

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