क्या बीबीसी ने चीन के पैसों से बनाई विवादित डॉक्यूमेंट्री ? सांसद का UK की वेबसाइट के हवाले से बड़ा दावा
BBC Documentary Row:राज्यसभा सांसद महेश जेठमलानी ने बीबीसी पर चीनी कंपनी से पैसे लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस विवाद को 'कैश-फॉर-प्रोपेगेंडा डील' कहा है। ब्रिटिश वेबसाइट की रिपोर्ट का हवाला दिया है।

बीबीसी की विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री को लेकर एक बहुत बड़ा दावा किया गया है। राज्यसभा सांसद महेश जेठमलानी ने एक ब्रिटिश वेबसाइट के हवाले से ही आरोप लगाया है कि बीबीसी को पैसों की सख्त आवश्यकता रही है और वह इसके लिए चीन की कंपनियों से पैसे लेता रहा है। उन्होंने इस विवाद को 'कैश-फॉर-प्रोपेगेंडा डील' करार दिया है। उन्होंने खुलकर तो नाम नहीं लिया है, लेकिन संकेतों में साफ कहा है कि यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक बड़ी राजनीतिक साजिश का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने चीन की जिस टेक्नोलॉजी कंपनी Huawei का नाम लिया है, वह पहले ही सुरक्षा चुनौतियों को लेकर संदेह के घेरे में रहा है।
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क्या बीबीसी ने चीन के पैसों से बनाई विवादित डॉक्यूमेंट्री ?
गुजरात दंगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री में एक नया मोड़ आ गया है। राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने बीबीसी की इस विवादास्पद सीरीज को चीनी कंपनी Huawei से लिंक जोड़ दिया है। बीबीसी की सीरीज में 2002 के गुजरात दंगों के दौरान उनकी लीडरशिप पर सवाल खड़े करने की कोशिश की गई है, जिसे भारत सरकार ने प्रोपेगेंडा का हिस्सा बताया है और उसको लेकर भारी आपत्ति जताई जा रही है। लेकिन, जेठमलानी ने द स्पेक्टेटर का जो लिंक शेयर किया है, उसमें स्पष्ट तौर पर ब्रिटिश सरकार के ब्रॉडकास्टर पर पाबंदी के बावजूद Huawei से पैसे उगाही के आरोप लगाए गए हैं।

'बीबीसी एक सहयात्री, कामरेड? जयराम?'
spectator.co.uk की रिपोर्ट को शेयर करते हुए राज्यसभा सांसद महेश जेठमलानी ने ट्वीट किया है, 'बीबीसी इतना भारत-विरोधी क्यों है? क्योंकि इसे चीनी सरकार से जुड़े Huawei (लिंक देखिए) से पैसे लेने की सख्त आवश्यकता है और बाद वाले के एजेंडे को आगे बढ़ाना है (बीबीसी एक सहयात्री, कामरेड? जयराम?)। यह एक सामान्य कैश-फॉर-प्रोपेगेंडा डील है। बीबीसी बिकाऊ है। ' हालांकि, लगता है कि जेठमलानी ने कामरेड और जयराम को सवालों के घेरे में रखकर एक बड़ा राजनीतिक संकेत देने की भी कोशिश की है, लेकिन खुलकर ज्यादा नहीं लिखा है।

बीबीसी के खिलाफ थी यह पैसे लेने वाली रिपोर्ट
स्पेक्टेटर की जो रिपोर्ट महेश जेठमलानी ने शेयर किया है, उसकी हेडलाइन है- 'बीबीसी स्टिल टेकिंग मनी फ्रॉम सैंक्शंड Huawei'। इसमें आरोप लगाया गया है कि चाइनीज टेक्नोलॉजी कंपनी, जिसे सुरक्षा कारणों से अमेरिका 2019 में ही प्रतिबंधित कर चुका है और यूनाइटेड किंगडम ने 5जी नेटवर्क में 2020 में ही घुसने पर रोक लगा दी थी, फिर भी बीबीसी का उसके साथ पार्टनरशिप है और वह उससे पैसे ले ही रहा है।

Huawei पर लगे थे ये आरोप
रिपोर्ट के मुताबिक Huawei पर आरोप है कि उसने कथित तौर पर उइगर मुसलमानों पर निगरानी रखने वाली सर्विलांस टेक्नोलॉजी तैयार करने में चीन सरकार के अधिकारियों की सहायता की है।
स्पेक्टेटर की रिपोर्ट के अनुसार, 'लेकिन, यह सब बीबीसी को रोकने के लिए काफी नहीं है, जो अभी भी अपनी विदेशी पत्रकारिता के लिए फंड जुटाने के वास्ते Huawei से पैसे ले रहा है।'
सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है बीबीसी डॉक्यूमेंट्री वाला विवाद
इस बीच बीबीसी डॉक्यूमेंट्री से जुड़ा विवाद सोमवार को सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है। वरिष्ठ पत्रकार एन राम, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और चर्चित वकील प्रशांत भूषण ने केंद्र सरकार की ओर से इसपर प्रतिबंध लगाए जाने को चुनौती दी है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने इसपर सुनवाई के लिए 6 फरवरी की तारीख तय की है। उधर केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने बीबीसी की विवादास्पद सीरीज को रोकने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट के 'कीमती समय की बर्बादी' करार दिया है।












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