पीएम मोदी पर बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री 'प्रोपेगेंडा का हिस्सा' : भारत
भारत ने आधिकारिक रूप से पीएम मोदी के खिलाफ बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीबीसी की कोशिशों को प्रोपेगेंडा का हिस्सा और औपनिवेशिक मानसिकता वाला बताया है।

भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बीबीसी की सीरीज को लेकर उसे जमकर लताड़ लगाई है। केंद्र सरकार की ओर से आज बीबीसी की इन कोशिशों के बारे में कहा गया है कि यह 'प्रोपेगेंडा का हिस्सा' है और ऐसी फिल्मों का महिमामंडन नहीं होना चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने यह प्रतिक्रिया दी है। केंद्र सरकार की ओर से यह डॉक्यूमेंट्री बनाने के पीछे के एजेंडे पर भी सवाल उठाया गया है कि एक नरेटिव को फिर से फैलाने की कोशिश की गई है। गौरतलब है कि एक ब्रिटिश सांसद भी इस मामले पर बीबीसी पर पक्षपातपूर्ण रवैए का आरोप लगाकर उसकी कड़ी आलोचना कर चुके हैं।
यह एक प्रोपेगेंडा का हिस्सा है- विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है कि 'यह डॉक्यूमेंट्री उस एजेंसी की प्रतिबिंब है, जिसने इसे बनाया है- यह एक प्रोपेगेंडा का हिस्सा है, पूर्वाग्रह और एक सतत औपनिवेशिक मानसिकता है। ऐसी फिल्म का महिमांडन नहीं कर सकते।' विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि यह डॉक्यूमेंट्री एक विशेष नरेटिव को आगे बढ़ाने के लिए डिजाइन की गई है। उन्होंने कहा कि इसमें 'पूर्वाग्रह, निष्पक्षता का अभाव और स्पष्ट रूप से औपनिवेशिक मानसिकता का जारी रहना दिखता है।'
'इसके पीछे के एजेंडे पर सोचने को मजबूर करता है'
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक 'अगर इसमें कुछ भी है तो वह ये कि इस फिल्म या डॉक्यूमेंट्री में उस एजेंसी और व्यक्तियों की झलक दिखती है, जो इस कहानी को फिर से फैला रहे हैं। यह हमें इस कार्य के इरादे और इसके पीछे के एजेंडे पर सोचने को मजबूर करता है। सच कहें तो हम इस तरह की कोशिशों को महिमामंडित नहीं करना चाहते।
क्यों हो रही है बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की आलोचना ?
दरअसल, बीबीसी की दो पार्ट वाली सीरीज, जिसे 'India: The Modi Question' का नाम दिया गया है, उसकी कड़ी आलोचनाएं हो रही हैं। सीरीज का वर्णन करते हुए बताया गया है, 'भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के मुस्लिम अल्पसंख्यक के बीच तनाव पर एक नजर, 2002 के दंगों में उनके रोल के बारे में दावों की पड़ताल, जिसमें एक हजार से अधिक लोग मारे गए थे।' बीबीसी ने इसका पहला एपिसोड मंगलवार को प्रसारित किया था और बुधवार को इसे यूट्यूब से हटा लिया गया। सीरीज का दूसरा हिस्सा 24 जनवरी को प्रसारित होने वाला है।
ब्रिटिश सांसद भी उठा रहे हैं बीबीसी पर सवाल
इस बीच सोशल मीडिया पर बीबीसी की इस डॉक्यूमेंट्री के खिलाफ जमकर नाराजगी देखी जा रही है। उसकी निष्पक्षता पर फिर सवाल उठाए जा रहे हैं। और तो और इस हरकत के लिए यूके में हाउस ऑफ लॉर्ड के एक सदस्य Lord Rami Ranger भी उसकी खिंचाई कर चुके हैं। उन्होंने बीबीसी पर पक्षतापूर्ण रिपोर्टिंग का आरोप लगाया है।
गौरतलब है कि 2002 में गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन की दो बोगियां जलाने की घटना के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगे के समय नरेंद्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री थे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी तत्कालीन मुख्यमंत्री को उनकी भूमिका पर क्लीन चिट मिल चुकी है। लेकिन, फिर भी एक विदेशी मीडिया के इस तरह के बर्ताव पर सवाल उठने स्वाभाविक हैं।
Do note that this has not been screened in India...We think that this is a propaganda piece, designed to push a particular discredited narrative. The bias, lack of objectivity & continuing colonial mindset is blatantly visible: MEA on the BBC documentary on PM Narendra Modi pic.twitter.com/BImPzX9LUX
— ANI (@ANI) January 19, 2023












Click it and Unblock the Notifications