बालासोर रेल हादसे के वक्त कोरोमंडल ट्रेन में था NDRF का ये जवान, सबसे पहले भेजा लाइव लोकेशन फिर की मदद
Balasore Train Accident: ओडिशा बालासोर रेल हादसे में अब तक 275 लोगों की मौत हो चुकी है। जिसमें से 200 मृतकों की पहचान नहीं हो पाई है। लगभग एक हजार लोग घायल हैं।

Balasore Train Accident: ओडिशा के बालासोर रेल हादसे ने पूरे देश तो झकझोर कर रख दिया है। इस हासदे में तीन ट्रेन शालीमार-चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस (12841) , बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12864) और मालगाड़ी बालासोर जिले के बहनागा बाजार स्टेशन पर 2 जून की शाम 7 बजे आपस में टकरा गई थी।
अब एक राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के एक जवान वेंकटेश एनके संभवत पहले ऐसे शख्स थे, जिन्होंने इसके बारे में अधिकारियों को अलर्ट किया था।
एनडीआरएफ के जवान वेंकटेश एनके बालासोर रेल हादसे के वक्त कोरोमंडल एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे थे, वो पश्चिम बंगाल से तमिलनाडु जा रहे थे। वेंकटेश एनके छुट्टी पर थे। 2 जून की शाम बालासोर जिले के बहनागा बाजार स्टेशन के पास लगभग 7 बजे शालीमार-चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस पटरी से उतर गई थी। इस ट्रेन में वेंकटेश एनके हावड़ा से चेन्नई जा रहे थे।
वेंकटेश एनके ने कहा, 'मैंने एक बड़ा झटका महसूस किया और अपने कोच में कुछ यात्रियों को गिरते देखा। मैं थर्ड एसी कोच B7 में थे और मेरा सीट नंबर 58 था। उसी वक्त कोरोमंडल एक्सप्रेस पटरी से उतर गई थी।'
इसके बाद वेंकटेश एनके ने सबसे पहले NDRF के अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी थी। पीटीआई-भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने कहा कि वेंकटेश ने व्हाट्सएप पर एनडीआरएफ कंट्रोल रूम को सबसे पहले बताया था और एक्सीडेंट का लाइव लोकेशन भेजा था। इसी लाइव लोकेशन को ट्रैक कर NDRF के बचाव दल दुर्घटना स्थल पर पहुंचे थे।
कोलकाता में एनडीआरएफ की दूसरी बटालियन में तैनात 39 वर्षीय जवान वेंकटेश ने एनडीआरएफ कंट्रोल रूम को सूचना देने के बाद कोचों के अंदर फंसे लोगों को बचाने का काम किया। उसने पहले यात्री को बाहर निकाला, रेलवे ट्रैक के पास एक दुकान में बिठाया और फिर दूसरों की मदद के लिए आगे गए।
एनडीआरएफ के जवान वेंकटेश ने लोगों की मदद करने के बारे में बात करते हुए कहा, ''मुझे जोर का झटका लगा...और फिर मैंने अपने कोच में कुछ यात्रियों को गिरते हुए देखा। मैंने पहले यात्री को बाहर निकाला और उसे रेलवे ट्रैक के पास एक दुकान में बिठाया...फिर मैं दूसरों की मदद में लग गया।''
वेंकटेश ने कहा, ''मैंने घायल और फंसे हुए यात्रियों का पता लगाने के लिए अपने मोबाइल फोन की रोशनी का इस्तेमाल किया। मैं उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले गया। वहां बहुत ज्यादा अंधेरा था। स्थानीय लोगों ने भी अपने मोबाइल फोन और टॉर्च का इस्तेमाल करते हुए लोगों को बचाने का काम किया।''
वेंकटेश ने कहा, "मैं जो कुछ भी कर सकता थ, मैंने किया। दुर्घटना के बाद एनडीआरएफ और ओडिशा राज्य बचाव दल को घटनास्थल पर पहुंचने में लगभग एक घंटे का समय लग गया था। उस दौरान मेरे साथ-साथ कई स्थानीय लोगों ने लोगों को बचाया। वह असली रक्षक थे।''
वेंकटेश 2021 में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) से एनडीआरएफ में शामिल हुए थे।












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