Bagmati Express ने हरे किए रेल हादसों के जख्म! 8 साल में 8 बड़ी दुर्घटनाएं, 500 से ज्यादा मौतें
Tamil Nadu Train Accident: तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले के पास मैसूर-दरभंगा बागमती एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त (Mysore-Darbhanga Bagmati Express Accident) हो गई। घटना में लगभग 12 से 13 डिब्बे पटरी से उतर गए। इस घटना के कारण कई यात्री घायल हो गए, हालांकि इस समय किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
बागमती एक्सप्रेस की घटना ने पूरे देश को हिला दिया। हादसे ने एक तरफ नवीनतम तकनीकों और रेल सुरक्षा पर सवाल उठाए। वहीं, दूसरी तरफ, भारतीय रेल के हादसों की पुरानी यादों को ताजा कर दिया। आइए जानते हैं रेल हादसों (Train Accidents)के बारे में...

कंचनजंगा एक्सप्रेस दुर्घटना (17 जून, 2024)
पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के पास कंचनजंगा एक्सप्रेस एक मालगाड़ी से टकरा गई, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई और 41 लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद सिग्नलिंग सिस्टम की विफलता पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई। ट्रेन की गति और सिग्नल सिस्टम की गलतफहमी को इस टक्कर के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।
गोंडा ट्रेन हादसा (18 जुलाई, 2024)
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के 12 डिब्बे पटरी से उतर गए, जिसके कारण 4 लोगों की मौत हो गई और 31 लोग घायल हो गए। इस दुर्घटना की जांच से पता चला कि रेल पटरियों की मरम्मत में लापरवाही बरती गई थी। एक इंजीनियर द्वारा पहले ही पटरियों में गड़बड़ी का पता लगाया जा चुका था, जिसे समय पर ठीक नहीं किया गया था।
बालासोर ट्रेन दुर्घटना (जून 2023)
यह भारत की सबसे घातक ट्रेन दुर्घटनाओं में से एक मानी जाती है। ओडिशा के बालासोर में कोरोमंडल एक्सप्रेस, यशवंतपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस और एक खड़ी मालगाड़ी की टक्कर में 293 लोगों की मौत हो गई थी और 1000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। यह हादसा रेलवे के सिग्नलिंग सिस्टम में गड़बड़ी के कारण हुआ था, जिससे ट्रेनों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे।
बीकानेर-गुवाहाटी एक्सप्रेस दुर्घटना (13 जनवरी, 2022)
पश्चिम बंगाल के न्यू डोमोहानी स्टेशन के पास बीकानेर-गुवाहाटी एक्सप्रेस की 12 बोगियां पटरी से उतरी। हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई। वहीं, 50 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। यह घटना रेलवे के रखरखाव और मॉनिटरिंग सिस्टम की कमजोरियों को दर्शाती है।
अमृतसर ट्रेन हादसा (19 अक्टूबर, 2018)
दशहरा के अवसर पर अमृतसर में रेलवे पटरियों पर खड़े दर्शकों की भीड़ में एक ट्रेन घुस गई थी, जिससे 59 लोगों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। यह हादसा सुरक्षा प्रोटोकॉल और भीड़ नियंत्रण की कमी का एक गंभीर उदाहरण था।
पुरी-हरिद्वार कलिंग उत्कल एक्सप्रेस (19 अगस्त 2017)
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के खतौली स्टेशन के पास यह दुर्घटना हुई, जिसमें ट्रेन पटरी से उतर गई। इस हादसे में 23 लोगों की मौत हो गई और लगभग 97 लोग घायल हुए। पटरी की मरम्मत कार्य के दौरान हुए गलतियों को इस दुर्घटना का कारण माना गया।
जगदलपुर-भुवनेश्वर हीराखंड एक्सप्रेस (21 जनवरी 2017)
विजयनगरम जिले के कुनेरू स्टेशन के पास यह ट्रेन पटरी से उतर गई। इस हादसे में 41 लोग मारे गए और 69 घायल हो गए। ट्रेन के ट्रैक की खराबी को इस हादसे का मुख्य कारण माना गया।
इंदौर-राजेंद्र नगर एक्सप्रेस हादसा (20 नवंबर, 2016)
उत्तर प्रदेश के पुखरायां के पास इंदौर-राजेंद्र नगर एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतर गए थे, जिसमें 152 लोगों की मौत हो गई थी और 260 लोग घायल हो गए थे। यह हादसा भारतीय रेलवे की सबसे घातक दुर्घटनाओं में से एक था और इसने रेलवे के सुरक्षा उपायों पर गंभीर सवाल उठाए।
भारतीय रेलवे, जो दुनिया के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क में से एक है, ने वर्षों में कई घातक दुर्घटनाओं का सामना किया है। सुरक्षा प्रोटोकॉल और बुनियादी ढांचे में सुधार की आवश्यकता लगातार बढ़ती जा रही है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दुर्घटनाओं पर कड़ी निगरानी और सुधार का वादा किया है, लेकिन बार-बार होने वाली घटनाएं इस ओर इशारा करती हैं कि रेलवे को और अधिक सतर्क और जिम्मेदार होने की आवश्यकता है। सुरक्षा के लिए भारी बजट आवंटन के बावजूद, इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।












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