बाबरी मस्जिद मामला: बचाव पक्ष के रवैये से कोर्ट नराजा, लेटलतीफी के लिए लगाई फटकार
नई दिल्ली। बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की सुनवाई कर रही विशेष सीबीआई अदालत ने बुधवार को बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की ओर से दो बार समय दिए जाने के बावजूद अदालत में अपनी लिखित दलीलें पेश करने में विफल रहने पर नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि बचाव पक्ष मुकदमे के समापन में देरी करना चाहता है। बता दें कि सुनवाई के दौरान अब बचाव पक्ष के वकीलों ने विशेष न्यायाधीश एस के यादव से लिखित दलीलें पेश करने के लिए 31 अगस्त तक का समय मांगा है।

हालांकि न्यायाधीश ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए बचाव पक्ष के वकील के लिखित दलीलें दायर करने के लिए उन्हें 31 अगस्त तक का समय देने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। जज ने गुरुवार तक उन्हें लिखित दलीलें दायर करने का निर्देश दिया है। बता दें कि इससे पहले अदालत बचाव पक्ष को दलीलें पेश करने के लिए 21 अगस्त और 24 अगस्त को समय दे चुकी है। वहीं, सीबीआई ने पहले ही अपने 400 पेज की लिखित दलीलें पहले ही दायर कर चुकी है।
बता दें कि इस मामले के जल्दी निपटारे के लिए अदालत भी मजबूर है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुनाने के लिए सीबीआई कोर्ट के लिए सितंबर अंत तक का समय निर्धारित किया है। अदालत ने कहा कि फैसले को लिखते समय विचार करने के लिए पढ़े जाने वाले दस्तावेजों की संख्या बहुत है, इस तरह इसे लिखने में काफी समय लगेगा लेकिन जिस तरह से बचाव पक्ष बार-बार समय मांग रहा है, ऐसा लगता है कि यह कार्यवाही में देरी करना चाहता है।
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बता दें कि इस केस में आडवाणी बीते 24 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अपना बयान दर्ज करवा चुके हैं। चार घंटे से भी ज्यादा चली इस सुनवाई के दौरान बुजुर्ग नेता से 100 से भी ज्यादा सवाल पूछे गए थे। बाद में आडवाणी के वकील ने बताया कि उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई को सुनवाई के बाद स्पेशल कोर्ट को 31 अगस्त तक ट्रायल पूरा करने को कहा था। बता दें कि यह मामला 28 साल पुराना है, जब अयोध्या में राम जन्मभूमि पर बनी बाबरी मस्जिद को कारसेवकों ने 6 दिसंबर,1992 को गिरा दिया था।












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