शाह पर नर्म आजम पर गर्म चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट ही आखिरी सहारा

सपा नेता ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'क्या आयोग सुप्रीम कोर्ट से ऊपर हो सकता है। चुनाव आयोग को गलतफहमी है कि उसके मनमाने अधिकारों को किसी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है।' आयोग ने कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के मामले में 11 अप्रैल को शाह के साथ आजम खान को प्रदेश में प्रचार करने से प्रतिबंधित कर दिया था।
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हालांकि चुनाव आयोग ने गुरुवार को शाह को उत्तर प्रदेश में प्रचार करने की अनुमति दे दी। शाह ने चुनाव आयोग को आश्वासन दिया था कि वह सार्वजनिक शांति और कानून व्यवस्था में दखल नहीं देंगे।
आजम से जब सवाल किया गया कि उन्हें इस तरह की राहत क्यों नहीं दी गई तो उन्होंने संवाददाताओं से कहा, 'एक अपराधी, एक हमलावर और मानवता के हत्यारे को प्रचार करने की आजादी दे दी जाती है, जिसके गुजरात में प्रवेश पर भी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई थी। वहीं उस आदमी की आवाज को दबाया गया है, जिसकी पूरी कौम पीड़ित है और जिसका बेदाग चरित्र रहा है।'
चुनाव आयोग पर कांग्रेस के इशारे पर काम करने और संविधान के अनुरूप उच्च आदर्शों तथा निष्पक्ष कामकाज की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए आजम ने कहा, 'मैं शीर्ष अदालत में गुहार लगाउंगा और मुझे भरोसा है कि इंसाफ मिलेगा।'
उन्होंने कहा, 'आयोग की कार्रवाई से अघोषित आपातकाल की बू आती है। मुझे नहीं पता कि चुनाव आयोग मुझसे क्या चाहता है। उसने मेरे जवाब पर विचार किए बिना मुझे दंडित किया। उन्होंने मेरे मामले में बड़ी कानूनी त्रुटि की है।' इसी तरह समाजवादी के सभी नेताओं की नजर में अब चुनाव आयोग खटकने लगा है। इस सम्बंध में सपा के 'नेता जी' फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं।












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