Ayodhya Ram Mandir: प्राण-प्रतिष्ठा से पहले दक्षिण की यात्रा पर पीएम मोदी, क्या सनातन से जुड़ेगा नया अध्याय?
PM Modi Visit Tamil Nadu and South India: अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाले भगवान राम लला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद को पूरी तरह से राम की भक्ति में समर्पित कर चुके हैं। उनका हालिया दक्षिण भारत का दौरा भी इससे पूरी तरह से प्रभावित है।
प्रधानमंत्री इसी हफ्ते आंध्र प्रदेश और केरल का दौरा कर चुके हैं। पवित्र राम जन्मभूमि में प्राण-प्रतिष्ठा से पहले वे दो दिवसीय तमिलनाडु के दौरे पर जा रहे हैं। पीएम मोदी के दक्षिण भारत की इन सारी यात्राओं की एक विशेषता है। यह भगवान राम और सनातन संस्कृति से ओत-प्रोत नजर आ रही है।

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दक्षिण भारतीय मंदिरों में पूजा-अर्चना में जुटे हैं पीएम मोदी
वह जहां भी जा रहे हैं, वहां भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को तो निभा ही रहे हैं। मसलन, किसी प्रोजेक्ट की आधारशिला रख रहे हैं या फिर उसे देशवासियों को समर्पित कर रहे हैं। वह इन सभी राज्यों के पवित्र और प्रसिद्ध मंदिरों में भी जा रहे हैं और पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
ज्यादातर धर्म-स्थलों का है भगवान राम से संबंध
पीएम मोदी के मंदिरों की इस तीर्थयात्रा की एक विशेषता है। इनमें से अधिकतर मंदिर वे हैं, जिनका भगवान राम से सीधा संबंध है। मसलन, तमिलनाडु में वे शनिवार और रविवार को रहेंगे तो वे जिन-जिन धार्मिक स्थलों पर जाएंगे, उनका किसी न किसी रूप में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम से धार्मिक तार जुड़ा हुआ है।
श्रीरंगनाथ स्वामीजी का अयोध्या से है कनेक्शन
जैसे पीएम मोदी त्रिची के श्रीरंगम स्थित श्री रंगनाथस्वामी मंदिर पहुंचेंगे, जिसे देश के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है और कई पुराणों और संगम साहित्य में इसका वर्णन मिलता है।
यहां वे श्रीरंगनाथ स्वामीजी की पूजा में शामिल होंगे, जो भगवान विष्णु का लेटे हुए रूप हैं। यहां की प्रतिमा और अयोध्या के बीच संबंधों का धर्मग्रंथों में उल्लेख बताया जाता है।
ऐसी मान्यता है कि भगवान राम के पूर्वज भगवान विष्णु की जिस प्रतिमा को पूजते थे, उन्हें विभीषण को लंका ले जाने के लिए दी गई थी। रास्त में यह मूर्ति श्रीरंगम में स्थापित कर दी गई।
तमिल कवि कंबन से भी है संबंध
इस मंदिर का महत्त्व ये भी है कि इसी के परिसर में पहली बार तमिल कवि कंबन ने अपनी प्रसिद्ध धर्म-ग्रंथ कंबन की रामायण का यहीं विमोचन किया था।
रामेश्वरम भी जाएंगे पीएम मोदी
वहीं पीएम मोदी रामेश्वरम में श्री रामनाथस्वामी का भी दर्शन करेंगे। यह प्रसिद्ध शिव मंदिर है, जहां शिवलिंग की स्थापना खुद भगवाना राम और माता सीता ने की थी। यह हिंदू धर्म के 12 ज्योतिर्लिंगों और चार धामों बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी और रामेश्वरम में भी शामिल है।
श्री कोठंडाराम स्वामी मंदिर जाएंगे पीएम मोदी
पीएम मोदी धनुषकोडी में श्री कोठंडाराम स्वामी मंदिर भी पहुंचेंगे। कोठंडाराम नाम का मतलब है धनुषधारी राम। ऐसी मान्यता है कि यहीं पर विभीषण पहली बार भगवान श्रीराम से मिले थे और उनसे शरण मांगी थी। इसे उस स्थान के रूप में भी जानते हैं जहां भगवान राम ने उनका राज्याभिषेक किया था।
'श्री रामायण पारायण' कार्यक्रम में भाग लेंगे पीएम मोदी
धनुषकोडी के बाद वे पास के अरिचल मुनाई भी जाएंगे। इसके बारे में कहा जाता है कि यहीं पर राम सेतु बनाया गया था। रामेश्वरम में वे 'श्री रामायण पारायण' कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे।
'एक भारत श्रेष्ठ भारत' का मंत्र
इस कार्यक्रम में 8 अलग-अलग पारंपरिक मंडलियां संस्कृत, अवधी, बांग्ला, मैथिली, कश्मीरी, गुरुमुखी, असमिया और गुजराती में भी रामकथा का पाठ करेंगी।
इसमें भगवान राम की अयोध्या वापसी का वर्णन होता है। पिछले दिनों पीएम मोदी जिन भी धर्म स्थलों में गए हैं, वहां वे मराठी, मलयालम और तेलुगू जैसी कई भाषाओं में होने वाले पाठ में शामिल हो चुके हैं।
पीएमओ के मुताबिक प्रधानमंत्री का इस तरह का कार्यक्रम भारतीय सांस्कृतिक लोकाचार और भावनाओं के मुताबिक है, जो 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' के मूल में है।
इससे पहले पीएम मोदी आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साईं जिले के लेपाक्षी स्थित वीरभद्र मंदिर भी जा चुके हैं। यहां वे रंगनाथ रामायण का भी पाठ सुन चुके हैं, जो रामायण का तेलुगु अनुवाद है।
तेलुगू में लेपाक्षी का अर्थ पक्षी से है। पवित्र रामायण में लेपाक्षी का वर्णन उस स्थान के रूप में है, जहां रावण से लड़ते हुए जटायु घायल होकर गिर पड़ा था।
इसी तरह से वे त्रिशूर के त्रिप्रयार मंदिर में भी पूजा-अर्चना कर चुके हैं, जो केरल में मुख्य देवता के तौर पर भगवान राम की प्रतिमा वाला प्रसिद्ध मंदिर है। इन्हें स्थानीय स्तर पर त्रिप्रयार थेवर के रूप में पूजते हैं।
सनातन संस्कृति के माध्यम से उत्तर-दक्षिण को एक सूत्र में पिरोने की कोशिश
इस तरह से शायद प्रधानमंत्री भारतीय सांस्कृतिक लोकाचार और सनातन संस्कृति के माध्यम से कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक को एक सूत्र में पिरोने की कोशिश कर रहे हैं।
पीएम मोदी की ओर से यह सब ऐसे समय में किया जा रहा है, जब आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले दक्षिण भारत की कुछ क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियां सनातन संस्कृति के खिलाफ द्रविड़ भावना को भड़का कर उत्तर और दक्षिण भारत को भाषा के नाम पर बांटकर राजनीतिक रोटी सेंकने की कोशिश कर रहे हैं।
द्रविड़ राजनीति का विकल्प देने की कोशिश में बीजेपी!
अगर बीजेपी के नजरिए से देखें तो पार्टी शायद उस स्थान को भरना चाहती है, जो द्रविड़ राजनीति से व्याकुल हो चुकी है, लेकिन उसके पास अबतक मजबूत विकल्प का अभाव रहा है। जबकि, सांस्कृतिक तौर पर पूरे दक्षिण भारत में सनातन की जड़ें, उत्तर भारत की तुलना में आज भी कहीं ज्यादा जमी हुई हैं।












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