धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की ये 10 जगहें नहीं घूमे आप तो जिंदगी में देखा ही क्या?
लेह। हिंदुस्तान 75वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है और ऐसे में देश का मुकुट कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर में भी जगह-जगह तिरंगे नजर आ रहे हैं। आर्टिकल 370 निष्क्रिय होने के बाद जम्मू-कश्मीर दो राज्यों में बंट गया। एक जम्मू-कश्मीर और दूसरा लद्दाख, लेकिन पर्यटकों द्वारा इन प्रांतों की पहचान आज भी धरती के स्वर्ग के रूप में की जाती है। कश्मीर घाटी के अतिरिक्त लेह-लद्दाख में सैर-सपाटे के लिए बहुत सी जगहें हैं। आज हम आपको इन्हीं में से 10 ऐसी जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां आपको मन को शांति के साथ ही वो सुकून मिलेगा, जब आप कुछ पलों के लिए सब-कुछ भूल जाएंगे।

हिमालय की तलहटियों में देखिए ये हिल पॉइंट–
लेह - लद्दाख यानी कि, दुनिया की सबसे ऊंची सडकें, सबसे ऊंची चोटियां, सबसे ऊंचा युद्धस्थल और सबसे बेहतर शांति। मनमोहक नजारा है यहां की घाटियों का। लद्दाख भारत में सबसे बड़ा जिला है, ये आप जानते ही होंगे। लेकिन घूमे नहीं होंगे, यहां के पवित्र स्थल। देखे नहीं होंगे यहां की खूबसूरती के बेमिसाल नजारे। इंडस रिवर देखिए, इसके किनारे ही बसा है लद्दाख। ये जगहें इतनी अनोखी और खूबसूरत हैं कि यहां हाजिर होने पर ही अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रकृति का अनमोल खजाना हैं यहां की झीलें, कई रंगों वाली पहाडियां, ऊंची-घुमावदार सड़कें, आकर्षक मठ और बर्फीली चाेटियां।

1.पैंगोंग त्सो लेक (पांगोंग झील):
बफ्रीली-पारदर्शी झीलों का देश भले ही फिनलैंड काे कहा जाता है, लेकिन आप कश्मीर में ये झील देखने पहुंचे हैं कभी? इन दिनों बस एक लीजिए कैमरा और अपने पार्टनर संग निकल पड़ें इधर के लिए। दुनिया में करीब 1.2 लाख झीलें हैं, लेकिन ट्रैवल एडवाइजर वेब पर जिसे 5/5रेटिंग मिला हो तो वो यही है। याद कीजिए आमिर खां वो फिल्म, जिसका लास्ट सीन फिल्माया गया था यहां- थ्री इडियट्स। आखिरी शूट इसी लेक प्लेस पर हुआ था।
वैसे इस लेक का नाम तो अब दुनिया जान चुकी है, क्योंकि चीन भारत के बीच इसी को लेकर ठनी हुई है। चीन ने यहां हजारों जवानों के साथ लाव-लश्कर जमा कर लिया था और आज भी इसके उत्तरी हिस्से को लेकर तनाव बरकरार है। यह झील 100 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी है। हालांकि, सरकार ने टूरिस्ट्स को परमीशन दी हुई है।

2.शांति स्तूप:
आपने स्वर्ग की तमन्ना की थी न? यानी एक दम शांति और सुरीली हवाएं... तो यह शांति स्तूप घूमिए। यह लेह के चंग्स्पा के कृषि उपनगर के ऊपर स्थित है, जिसका निर्माण बरसों पहले शांति संप्रदाय के जापानी बौद्धों ने कराया था। यह बेहद खूबसूरत और शांति के प्रतीक सफ़ेद रंग का है। आप लेह आएं और शांति स्तूप न जाएं.. ऐसा कैसे हो सकता है। यह देख लिया, अब और आगे चलते हैं..जानते हैं धरती के स्वर्ग की अन्य दिलकश जगहों के बारे में...

3. हेमिस मठ, हेमिस:
लेह के दक्षिण-पूर्व दिशा में शहर से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मठ देखिए..। इस शहर का मुख्य आकर्षण मानो यही है। दस्तावेजों के अनुसार, इसका निर्माण 1630 ई. में सबसे पहले स्टेग्संग रास्पा नंवाग ग्यात्सो ने करवाया था। 1972 में राजा सेंज ने इसे अपडेट किया। इसके बाद सरकार ने भी जिम्मेदारी संभाली। हेमिस का राष्ट्रीय उद्यान तो जैसे खूबसूरती की मिसाल हो, कैमरा वहां तो फोटो क्लिक होंगे यहां। इस मठ की दीवारों पर जीवन के चक्र को बहुत ही बखूबी चित्रित किया गया है, जिसकी तस्वीर लिए बिना आप कैसे रह सकते हैं।

4.लेह पैलेस, लेह:
लेह के महलों की बात करें तो नाम लिया जाता है- लेह पैलेस का। घूमने वालों की शान ही निराली है यहां। यह महल 9 मंजिलों का है, ऊंची मंजिलों में शाही परिवार और नीचे के मंजिलों में स्टोर रूम और अस्तबल हुआ करते थे। अब महल की देखभाल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के हाथों में है।

5. माथो मठ, लद्दाख:
इंडस नदी घाटी पर, शहर से 16 किमी की दूरी पर स्थित यह मठ देखिए। 400 साल पुराने 'थांगका' या सिल्क से बनाई जाने वाली धार्मिक तिब्बती पेंटिंग और इसके साथ जुड़ा त्योहार 'माथो नागरंग' पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय हैं। यहां सर्दियों में बर्फ जम जाती है।

6. पदुम, कारगिल:
करगिल को तो सभी जानते हैं। पदम नाम से जाने जानी वाली यह जगह कारगिल से 240 किमी की दूरी पर पड़ती है और जंस्कार तहसील का सबसे बड़ा टाउन है। यहां के राजा का मिट्टी का महल और एक सुन्दर छोटे मठ की तस्वीरें भी आप ले सकते हैं। अगस्त का महीना बेस्ट रहेगा।

7. शंकर गोम्पा:
लद्दाख में इस मठ को शंकर मठ भी कहते हैं। गोम्पा के अन्दर 'एवालोकितेश्वर', एक 'बोधिसत्व' या 'आत्मज्ञानी जीव' की एक प्रतिमा रखी गई है, जो समस्त बौद्धों की करुणा का प्रतीक है। इस प्रतिमा के 11 सिर, 1000 हाथ और प्रत्येक हाथ की हथेली पर आँखें हैं। प्राचीन वास्तुकला शैली का ये उपहार आप, कैमरे में जरूर लीजिए...

8. सेरज़ंग मंदिर:
लद्दाख के इस पैलेस की एक खास विशेषता यह है कि इसके निर्माण में सोने और तांबे का उपयोग बड़े पैमाने पर किया गया है। मैत्रेय बुद्धा की एक 30 फीट लंबी खड़ी प्रतिमा जिसे 'भविष्य के बुद्ध' या 'लाफिंग बुद्धा' के नाम से भी जाना जाता है, मंदिर में विराजमान हैं। टिलोपा, मार्पा, मिल रास्पा और नरोपा जैसी कुछ शानदार दृश्य हैं जिन्हें मंदिर में दर्शाया गया है। लेना चाहें तो तस्वीरें भी अनूठी होंगी......!

9. थिकसे मठ:
लद्दाख प्रांत में लेह से 19 किलोमीटर दूर यह 12 मंजिला इलाके में सबसे बड़ा मठ (आर्किटेक्चर) है। यहाँ आने वाल टूरिस्ट सुन्दर और शानदार स्तूप, मूर्तियाँ, पेंटिंग, थांगका और तलवारों को देख सकते हैं। वे सभी यहाँ के गोम्पा में रखी हुई हैं।

10. सुरुघाटी:
कभी सुरु नदी का ही हिस्सा रही ये घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण टूरिस्ट के बीच फेमस है। इस वैली के फोटो लेना आपके लिए काफी यादगार एक्सपीरियंस होगा। यहां से ऊंची-ऊंची पहाडियां अच्छे से नजर आती हैं।
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