Atul Subhash Case: नहीं चला अतुल के बेटे का पता, दादी ने लिया हेबियस कॉर्पस का सहारा, खटखटाया SC का दरवाजा

Atul Subhash Case Row: अतुल सुभाष सुसाइड केस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। बेंगलुरु बेस्ड इस इंजीनियर की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अतुल के सुसाइड नोट और वीडियो पर एक्शन लेते हुए उनकी पत्नी और ससुराल वालों को कस्टडी में ले लिया है। हर रोज इस मामले में नया मोड़ आ रहा है। अब अतुल सुभाष की मां अंजू मोदी ने अपने पोते की कस्टडी पाने के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (हेबियस कॉर्पस) दायर कर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

उनके बेटे अतुल सुभाष (Atul Subhash) की मौत के बाद अतुल की पत्नी निकिता, उनकी मां और भाई हिरासत में हैं। उनके चार साल का बच्चा कहां और किस हाल में है इसका पता अभी तक नहीं चल पाया है। पुलिस पूछताछ के दौरान निकिता ने दावा किया कि बच्चा उसके चाचा सुशील सिंघानिया के पास है, लेकिन सुशील ने इससे इनकार किया है।

Atul Subhash

न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और कर्नाटक की सरकारों को नोटिस जारी किए हैं। उन्हें लापता बच्चे का पता लगाने का काम सौंपा गया है। निकिता, उसकी मां निशा और भाई अनुराग की गिरफ्तारी के बावजूद बच्चे के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है। तीनों पर अतुल को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है।
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क्या है हेबियस कॉर्पस? (what is Habeas Corpus?)

"हेबियस कॉर्पस" शब्द लैटिन से लिया गया है जिसका अर्थ है 'सशरीर'। भारत में, नागरिक उच्च न्यायालयों में ऐसी याचिकाएं दायर की जा सकती है ताकि हिरासत में लिए गए व्यक्ति को उनके समक्ष पेश किया जा सके। अदालत ने जनवरी के लिए एक और सुनवाई निर्धारित की है। अतुल के पिता पवार कुमार ने अपने पोते का पता नहीं चल पाने पर चिंता व्यक्त की है और उसकी सुरक्षा को लेकर डर जताया।

नहीं चल सका है बच्चे का पता

कानूनी प्रतिनिधियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश (जौनपुर), बेंगलुरु (जहां अतुल की मृत्यु हुई) और हरियाणा (जहां निकिता को गिरफ्तार किया गया) के अधिकारी इस मामले में शामिल हैं। हालांकि, कोई भी बच्चे का पता नहीं लगा पाया है। वर्तमान में, निकिता सिंघानिया अपनी मां और भाई अनुराग उर्फ ​​पीयूष के साथ बेंगलुरु जेल में है।

पिता ने लगाई न्याय की गुहार

अतुल सुभाष के पिता पवन मोदी ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, यूपी और बिहार के सीएम से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा, "मेरे बेटे को इंसाफ मिलना चाहिए, नहीं तो बेटे की अस्थियां गटर में बहाकर आत्मदाह कर लूंगा। उन्होंने पोते व्योम की कस्टडी की भी मांग की है।"

अतुल के परिवार पर दहेज उत्पीड़न का आरोप

अदालत ने तीनों को 30 दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में रखा है। पुलिस पूछताछ के दौरान, उन्होंने अपने खिलाफ सभी आरोपों से इनकार किया। निकिता ने दावा किया कि उसने अदालत के अलावा तीन साल से ज्यादा समय तक अतुल से सीधे बात नहीं की। उसने आरोप लगाया कि अतुल के परिवार ने दहेज की मांग की और उसने उनके पैसे का दुरुपयोग किया।

अतुल पर वित्तीय शोषण के आरोप

निकिता ने अधिकारियों को बताया कि अतुल के दुर्व्यवहार और वित्तीय शोषण के कारण उसने नौकरी छोड़ दी। उसने बताया कि वह दिल्ली में काम करती थी और अपने बच्चे की परवरिश के लिए भरण-पोषण की मांग करती थी, क्योंकि उसका वेतन फ्लैट के खर्चों में चला जाता था। उसने अतुल से पैसे मांगने के दावों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अगर यह सच होता तो वह उसे छोड़कर नहीं जाती।

पैसे की लेनदेन में उलझी पेंच

जौनपुर कोर्ट के एक दस्तावेज से पता चला है कि अतुल ने निकिता पर रोहित निगम नाम के किसी व्यक्ति के साथ लंबी बातचीत करने का आरोप लगाया है, जिसके कारण उनके बीच विवाद हुआ। उसने दावा किया कि उसने निकिता के परिवार को 16 लाख रुपये दिए, जिन्होंने फिर 50 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की, जब उसने और भुगतान करने से इनकार कर दिया तो उन्होंने कथित तौर पर उसे प्रताड़ित किया।
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अतुल ने अपने नोट बताया था कि वह अपने बेटे व्योम से अलग हो चुका है, जिसे निकिता अपने साथ ले गई थी और दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं होने दी थी। उसके अनुसार निकिता का 80 हजार रुपये का वेतन उसकी मासिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त था।

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