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नज़रियाः 'हिंद महासागर में चीन का सामना करने के लिए फ्रांस का साथ अहम'

By Bbc Hindi

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों चार दिवसीय यात्रा पर शनिवार को भारत आए हैं. मई 2017 में राष्ट्रपति बनने के बाद यह मैक्रों की पहली भारत यात्रा है.

2016 में फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के भारत दौरे के वक्त महाराष्ट्र के जैतपुर में छह परमाणु रिएक्टर लगाने का एलान किया गया था. उस दौरान दोनों देशों के बीच 36 लड़ाकू विमान रफ़ाएल ख़रीदने की डील भी की गई थी. इस डील की पारदर्शिता को लेकर विपक्ष मोदी सरकार पर हमला करता रहा है.

फ्रांस भारत में नौवां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है. अप्रैल 2000 से अक्तूबर 2017 के बीच इसने भारत में लगभग छह बिलियन अमरीकी डॉलर का निवेश किया है. जबकि अप्रैल 2016 से मार्च 2017 के बीच दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 11 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया है.

जिस तरह से रक्षा, अंतरिक्ष, सुरक्षा और ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच घनिष्टता बढ़ रही है उसे देखते हुए क्या यह माना जाए कि फ्रांस आज उसी भूमिका की ओर बढ़ रहा है जहां कभी रूस हुआ करता था?

इसी मुद्दे पर बीबीसी संवाददाता अभिजीत श्रीवास्तव ने विदेशी मामलों के जानकार हर्ष पंत से बात की.

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भारत और फ्रांस के बीच रिश्ते काफी पुराने और घनिष्ठ हैं. यह पारंपरिक होने के बावजूद बहुत व्यावहारिक हैं. दोनों देशों ने अपने संबंध को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बनी नई परिस्थितियों के अनुकूल बनाया है.

मैक्रौं की यात्रा यह बताती है कि वो भारत को महत्वपूर्ण साझेदार मानता है. रिपोर्ट्स यह भी थी कि कुछ महीने पहले अपनी चीन यात्रा से पहले वो भारत आना चाहते थे, लेकिन किन्हीं कारणों से ऐसा नहीं हो सका.

नई दिल्ली में सोलर समिट

फ्रांस की रणनीति या विदेश नीति में भारत की स्थिति पहले से बहुत मजबूत हुई है. भारत भी फ्रांस को एक नई दृष्टि से देख रहा है. इस दौरे में सबसे अहम सोलर एनर्जी को लेकर अंतरराष्ट्रीय सोलर गठबंधन समिट है जो रविवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया जाएगा और इसमें 23 देशों के राष्ट्राध्यक्ष समेत 125 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे.

ऐसे समय पर जब अमरीका जैसा देश पर्यावरण पर अपने प्रतिबद्धता से पीछे हट रहा है, भारत और फ्रांस ने पर्यावरण की चिंताओं और इस पर बातचीत को आगे बढ़ाने का काम किया है. अंतरराष्ट्रीय सोलर गठबंधन समिट भारत की पहल और बहुत महत्वपूर्ण कदम है. फ्रांस ने इसका पूरी तरह समर्थन किया है.

फ्रांस के पास वो तकनीक है जो पर्यावरण के मुद्दे को डील कर सकती हैं. आने वाले समय में यह बहुत अहम किरदार निभाएगा कि किस तरह ऊर्जा की ज़रूरतें और पर्यावरण की चिंता साथ साथ आगे बढ़ सके.

रक्षा नीति बनाम विदेश नीति

मैक्रों की यात्रा के समय राजनीतिक हलकों में रफ़ायल डील को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं. इस समय भारत की रक्षा नीति और रक्षा ख़रीद बहुत समस्याग्रस्त है. ऐसे में मैक्रों की यात्रा के समय रफ़ाएल को लेकर किसी भी पार्टी का आरोप लगाना महज़ राजनीति है.

हम यह नहीं देख रहे कि राष्ट्रहित क्या है. भारतीय वायु सेना की शक्ति बहुत तेज़ी से नीचे आ रही है. रक्षा ख़रीद पर बहुत पहले से सवाल उठता रहा है. यह रफ़ाएल या बोफोर्स डील की बात नहीं है. पारदर्शी ख़रीद नीति को अपनाए जाने की ज़रूरत है.

रफ़ाएल को लेकर फ्रांस ने बहुत बड़ा सौदा किया है. वो हमसे सह उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण की बात कह रहा है. इसके दूरगामी परिणाम अच्छे होंगे. भारत की ज़रूरतों के मुताबिक इसके अच्छे परिणाम होंगे.

रक्षा सौदों को लेकर फ्रांस के साथ भारत के रिश्ते बढ़ रहे हैं. लेकिन भारत को यह विश्वास दिलाना होगा कि इस तरह की डील पर बार-बार समझौते नहीं होंगे. हर डील में सवाल नहीं खड़े कर सकते हैं, जो कि राजनीतिक हैं.

मोदी को श्रेय दिया जाना चाहिए

मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना कर सकते हैं लेकिन उन्हें इस बात का श्रेय देना होगा कि जब वो फ्रांस गए थे तो उन्होंने मेक इन इंडिया नीति के बावजूद भारत की ज़रूरतों को आगे बढ़ाया. उन्होंने यह सोचते हुए यह डील की कि मेक इन इंडिया की नीति के कारण देश की ज़रूरतों को दरकिनार नहीं किया जा सकता.

इसके अलावा हमारी समुद्रीय नीति को नया आयाम मिलेगा.

रफ़ाएल लड़ाकू विमान
Getty Images
रफ़ाएल लड़ाकू विमान

अमरीका, रूस की बराबरी नहीं

एक समय भारत को विकासशील देशों का फ्रांस कहते थे. क्योंकि दोनों देशों की विदेश नीति में स्वतंत्र स्थिति लगभग एक जैसी है. अब हम रणनीतिक मुद्दों को बढ़ा रहे हैं, समुद्री मुद्दों, आतंकवाद से मुकाबले, ऊर्जा और परमाणु समझौते की बात कर रहे हैं तो यह रिश्ता एक नए दौर से गुजर रहा है.

एक छोटे समय में यह रूस को बहुत कम समय में पीछे नहीं छोड़ पाएगा लेकिन रणनीतिक रूप से 21वीं सदी में भारत का एक बहुत महत्वपूर्ण साझेदार बनेगा.

हालांकि फ्रांस बहुत छोटी इकोनॉमी है. फ्रांस की वजह से भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच संबंध अच्छे होंगे और इनके बीच आर्थिक संबंध प्रगाढ़ होंगे. फ्रांस, अमरीका की बराबरी तो नहीं कर सकेगा लेकिन वो यूरोपियन यूनियन के साथ भारत के संबंध की अगुवाई कर सकता है.

मेक इन इंडिया
Getty Images
मेक इन इंडिया

मेक इन इंडिया और फ्रांस

फ्रांस ने महाराष्ट्र में जॉइंट प्रोडक्शन फेसिलिटी का उद्घाटन किया था. रिलायंस और डसाल्ट ने मिलकर इसे शुरू किया था. यहां रफ़ाएल और स्‍कॉर्पिन पनडुब्‍बी के उत्पादन की बात भी थी.

लेकिन हमारी नीतियां अभी भी विदेशी कंपनियों को आकर्षित नहीं कर पा रही है, नौकरशाही के काम करने के तरीकों में संशोधन करने की जरूरत है. दोनों देशों के बीच में बहुत संभावनाएं बहुत हैं.

अगर ये रिश्ते आगे बढ़ते हैं तो फ्रांस मेक इन इंडिया में बहुत ज़्यादा योगदान देने वाला देश हो सकता है.

रियूनियन आइलैंड और जिबूती बेहद अहम

इसके अलावा इस दौरे में भारत और फ्रांस के बीच लॉजिस्टिक क्षेत्र में करार बहुत महत्वपूर्ण हो सकते हैं. फ्रांस मेडागास्कर के पास स्थित रियूनियन आइलैंड और अफ्रीकी बंदरगाह जिबूती में भारतीय जहाज को एंट्री दे सकता है.

भारत दूसरे देशों की लॉजिस्टिक को इस्तेमाल करना चाहता है और हिंद महासागर में अपनी शक्ति को बढ़ाना चाह रहा है ऐसे में फ्रांस जिसकी हिंद महासागर स्थायी उपस्थिति है भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.

यदि भारत को अपने जल सेना की ऑपरेशन क्षमता बढ़ानी है और किसी भी तरह से आपको चीन के ख़िलाफ़ खड़ा होना है तो यह संयुक्त प्रयास से ही संभव हो पाएगा. अकेले न भारत में और न ही फ्रांस में ऐसी क्षमता है कि जिस तरह से चीन का प्रभुत्व बढ़ रहा है उसे काबू कर सकें. जिबूती में चीनी सैन्य बेस भी है. यानी यह स्ट्रैटेजिक रूप से अहम है.

मोदी की बोट डिप्लोमसी

इसके अलावा मैक्रों वाराणसी भी जाएंगे जहां प्रधानमंत्री मोदी मैक्रों को गंगा की सैर कराएंगे. ठीक इसी तरह 2015 में जब मोदी फ्रांस गए थे तो तब के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने उन्हें सीन नदी की सैर कराई थी.

फ्रांस संस्कृति और विरासत को बहुत महत्व देते हैं. मोदी मैक्रों के सामने भारत की एक अलग तस्वीर दिखाना चाहते हैं. मोदी मैक्रों को दिखाना चाहते हैं कि भारत नई दिल्ली से बाहर भी है और इसकी अपनी सांस्कृतिक विरासत है. यह सॉफ्ट पॉवर प्रोजेक्शन के लिए अच्छी बात है.

इस तरह दोनों देशों में बोट डिप्लोमेसी का एक नया ट्रेंड देखने को मिलेगा.

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English summary
Attitude France is important to face China in the Indian Ocean

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