आखिर 21 जुलाई को क्या है? ममता बनर्जी ने उपचुनाव में मिली जीत को क्यों किया इस दिन को समर्पित, जानिए
Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की चार सीट रायगंज, रणघाट दक्षिण, बगदा और मानिकटोला पर हुए उपचुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने शानदार जीत हासिल की है। इन चारों सीटों पर बुधवार 10 जुलाई को वोटिंग हुई थी और शनिवार 13 जुलाई को मतगणना हुई।
इन सीटों पर टीएमसी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विपक्षी पार्टियों का सूपड़ा साफ कर दिया। चारों सीटों पर टीएमसी की जीत के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। ममता बनर्जी ने इस जीत को जनता की जीत बताया। साथ ही, ममता बनर्जी ने जनता का धन्यवाद भी किया।

समाचार एजेंसी एएनआई की खबर के मुताबिक, ममता बनर्जी ने कहा कि चार में से तीन सीट भाजपा की थी जो अब तृणमूल ने जीती है...यह जीत जनता की जीत है और मैं जनता को धन्यवाद करती हूं, इस जीत को हम 21 जुलाई को समर्पित करेंगे।
आखिर 21 जुलाई को क्या है?
ममता बनर्जी ने उपचुनाव में मिली जीत को 21 जुलाई को समर्पित करने की बात की है। ऐसा उन्होंने क्यों कहा यह सवाल अब सब के मन में आकर खड़ा हो गया होगा। तो चलिए हम बता दें है कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस 21 जुलाई को शहीद दिवस मनाने जा रही है। पार्टी के गठन के बाद से टीएमसी हर साल 21 जुलाई को शहीद दिवस के रूप में मनाती है।
क्या हुआ था 21 जुलाई को?
खबर के मुताबिक, साल 1993 में ममता बनर्जी युवा कांग्रेस की पश्चि बंगाल की अध्यक्ष थीं। उस वक्त ममता बनर्जी ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए सचित्र वोटर कार्ड की मांग की थी। इतना ही नहीं, 21 जुलाई को ममता बनर्जी के नेतृत्व में युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता आंदोलन में शामिल हुए। उस वक्त उनके जुलूस पर पुलिस द्वारा गोलियां चलाई गईं, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई थी।
कांग्रेस छोड़ तृणमूल कांग्रेस का ममता बनर्जी ने किया गठन
इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल काफी बढ़ गई, जिसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस पार्टी को छोड़ दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद की पार्टी तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था। टीएमसी के गठन के बाद भी पार्टी 21 जुलाई के दिन को नहीं भूली और हल साल इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाती है।












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