Assam Terror Attack: असम में आर्मी कैंप पर आतंकी हमला! तीन जवान घायल, इस खूंखार उग्रवादी संगठन पर शक
Assam Terror Attack: असम के ऊपरी हिस्से में एक बार फिर से आतंकवाद ने सिर उठाया है। राज्य के तिनसुकिया जिले के काकोपाथर क्षेत्र में गुरुवार देर रात आतंकवादियों ने भारतीय सेना के कैंप पर हमला कर दिया। इस हमले में सेना के तीन जवान घायल हो गए हैं।
घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बलों और पुलिस ने संयुक्त रूप से व्यापक तलाशी अभियान (सर्च ऑपरेशन) शुरू कर दिया है। काकोपाथर और आसपास के गांवों में रातभर चली गोलीबारी और धमाकों की आवाजों से स्थानीय लोगों में डर और चिंता का माहौल है। हालांकि, प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि इलाके में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं।

कैसे हुआ हमला?
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, गुरुवार, 16 अक्टूबर की देर रात करीब 12.30 बजे आतंकियों ने एक चलती गाड़ी से काकोपाथर स्थित 19 ग्रेनेडियर्स यूनिट कैंप पर अंधाधुंध फायरिंग की। इतना ही नहीं, हमलावरों ने कैंप के मुख्य गेट के पास ग्रेनेड भी फेंके, जिससे जोरदार धमाके हुए। धमाकों की आवाज सुनकर आसपास के इलाकों में अफरातफरी मच गई और स्थानीय निवासी दहशत में घरों में दुबक गए।
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कैंप पर अचानक हुए हमले का सैनिकों ने तुरंत जवाब दिया। गोलीबारी करीब एक घंटे तक चली, जिसके बाद हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। जवानों ने जवाबी कार्रवाई में संयम बरता ताकि आसपास के घरों और नागरिकों को नुकसान न पहुंचे।
घायल जवानों की हालत स्थिर
हमले में घायल तीनों जवानों को तत्काल तिनसुकिया के मिशनरी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। सेना ने कहा है कि घायल जवानों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए विशेषज्ञ निगरानी में रखा गया है।
हमलावरों की तलाश में बड़ा सर्च ऑपरेशन
हमले के तुरंत बाद सेना और असम पुलिस ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया और नागरिकों की आवाजाही पर अस्थायी रोक लगा दी। तलाशी अभियान के दौरान अरुणाचल प्रदेश के तेंगापानी क्षेत्र में एक संदिग्ध ट्रक बरामद किया गया, जो हमलावरों द्वारा इस्तेमाल किया गया बताया जा रहा है।
जांच में पाया गया कि ट्रक में ग्रेनेड के अवशेष और हथियारों के निशान मौजूद थे। सुरक्षा एजेंसियां अब इस वाहन से हमलावरों की पहचान करने की कोशिश कर रही हैं।
क्या है ULFA(I) जिस पर सेना को है शक?
अब तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि यह हमला उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) यानी ULFA(I) का काम हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, यह गुट ऊपरी असम के तिनसुकिया, डिब्रूगढ़ और सिवसागर जिलों में सक्रिय है और इसी तरह के कई हमलों को पहले भी अंजाम दे चुका है। ULFA(I) का नेतृत्व म्यांमार स्थित कमांडर परेश बरुआ करता है, जो लंबे समय से भारतीय सुरक्षा बलों के निशाने पर है।
2023 में भी काकोपाथर क्षेत्र में इसी संगठन ने सेना कैंप पर ग्रेनेड हमला किया था, जिसमें दो मोटरसाइकिल सवार हमलावर शामिल थे। उस हमले में एनआईए ने परेश बरुआ समेत छह लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
AFSPA लागू क्षेत्र में बढ़ी सुरक्षा चिंता
यह ताजा हमला ऐसे समय हुआ है जब ऊपरी असम के चार जिलों - तिनसुकिया, डिब्रूगढ़, सिवसागर और चराइदेव - में अक्टूबर 2025 से सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (AFSPA) लागू है। इस अधिनियम के तहत सुरक्षा बलों को आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने के लिए विशेष शक्तियां दी गई हैं।
हमले के बाद इन जिलों में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। स्थानीय पुलिस प्रमुख उगाला कलित ने कहा कि "हमलावरों की तलाश के लिए सेना और पुलिस का संयुक्त अभियान जारी है। नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को दें।"
बता दें कि असम में पिछले कुछ वर्षों से उग्रवाद की घटनाओं में कमी आई थी, लेकिन तिनसुकिया में हुआ यह हमला सुरक्षा एजेंसियों के लिए चेतावनी का संकेत है कि ULFA(I) जैसे संगठन अब भी सक्रिय हैं। सेना और पुलिस का सर्च ऑपरेशन जारी है, और आने वाले दिनों में इस हमले से जुड़े और खुलासे होने की संभावना है।












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