1983 असम आंदोलन को लेकर विवादित बयान देने वाले कांग्रेस विधायक शर्मन अली सस्पेंड, पुलिस कर चुकी है अरेस्ट
गुवाहटी, अक्टूबर 04। 1983 के असम आंदोलन को लेकर विवादित टिप्पणी करने वाले कांग्रेस के विधायक शर्मन अली अहमद को पार्टी ने सस्पेंड कर दिया है। आपको बता दें कि पार्टी ने उनके बयान को भड़काऊ बयान माना है, जिसके तहत कार्रवाई करते हुए सोमवार को उन्हें कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया। इससे पहले शर्मन अली अहमद को पार्टी ने उनके बयान को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसका जवाब देने के बाद उन पर ये कार्रवाई की गई। एक लाइन के बयान में पार्टी की तरफ से कहा गया है कि शर्मन अली बार-बार पार्टी के अनुशासन का उल्लंघन कर रहे थे, इसीलिए अहमद को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया है।
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शनिवार को गिरफ्तार किए गए थे शर्मन अली
आपको बता दें कि शर्मन अली अहमद को पुलिस ने शनिवार को उनके बयान को लेकर हिरासत में लिया था। कुछ देर की पूछताछ के बाद फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने शर्मन अली के खिलाफ IPC की धारा 124ए (राजद्रोह) के तहत मामला भी दर्ज किया गया है। शर्मन अली के खिलाफ ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन और बीजेपी युवा सहित कई संगठनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।
क्या कहा था शर्मन अली ने अपने बयान में?
- आपको बता दें कि शर्मन अली अहमद ने 1983 के असम के दारांग जिले में एक आंदोलन के दौरान मारे गे 8 लोगों को हत्यारा बता दिया था, जबकि असमिया समाज उन आठ लोगों को आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाने की वजह से शहीद का दर्जा देता है। शर्मन अली ने कहा था कि वो 8 शहीद नहीं बल्कि हत्यारे थे। क्योंकि वे सिपाझार इलाके के अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को मारने में शामिल थे। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि आठ लोगों पर हुआ "हमला" उस क्षेत्र की मुस्लिम आबादी द्वारा "आत्मरक्षा" का कार्य था।
- शर्मन अली ने ये बयान जिले में पिछले महीने की बेदखली अभियान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए की थी जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। 20 सितंबर को, सिपाझार से लगभग 9 किलोमीटर दूर धौलपुर में चार स्थानों पर बेदखली अभियान चलाया गया था, जहां 800 परिवारों को 4500 बीघा जमीन से हटा दिया गया था। इनमें अधिकतर मुस्लिम परिवार थे। इस जमीन पर सरकार ने अपने स्वामित्व का दावा किया था।












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