असम: कोरोना काल में अफ्रीकी स्वाइन फ्लू का कहर, 13,000 सूअरों की मौत
नई दिल्ली- देश कोरोना वायरस संक्रमण से परेशान है और असम में फ्लू जैसी ही एक और बीमारी सूअरों के लिए मौत बनकर आई है। वहां अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से अब तक करीब 13,000 सूअरों की मौत हो चुकी है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि वहां पशुपालन विभाग को सूअरों को अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के संक्रमण से बचाने के लिए कई तरह के एहतियाती कदम उठाने पड़ रहे हैं।
Recommended Video

अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से हजारों सूअरों के मरने के बाद असम के पशुपालन विभाग ने अगोराटोली रेंज में एक गहरी नहर की खुदाई की है ताकि, जंगली सूअरों को नजदीकी गांवों में घुसने से रोका जा सके। ऐसा इसलिए किया गया है, जिससे जंगली सूअरों को अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के इंफेक्शन से बचाया जा सके। ये जानकारी असम के पशुपालन मंत्री अतुल बोरा ने दी है। अभी तक वहां इस बीमारी की वजह से 13,000 सूअरों की जान जा चुकी है।
सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि सूअरों की मौते के चलते इसके पालन में लगे हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है। असम के 9 जिलों में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का प्रकोप है और राज्य में इसका पहला मामला इस साल फरवरी में सामने आया था। राज्य सरकार के अनुसार ये वायरस पहले राज्य के 6 जिलों में फैला हुआ था। उसके बाद यहा तीन और जिलों माजुली, गोलाघाट और कामरूप मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में भी फैल चुका है। पहले इसका प्रकोप डिब्रूगढ़, शिवसागर, जोरहाट, धेमाजी, लखीमपुर और बिश्वनाथ जिलों में ही था। अब जंगली सूअरों में इस वायरस को पहुंचने से रोकने के लिए जो नहर खोदी गई है, उसकी लंबाई 2 किलोमीटर है। बता दें कि बोरा के मुताबिक असम में अब सूअरों की आबादी 30 लाख हो चुकी है। यानि इतनी बड़ी संख्या पर संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है।
सबसे बड़ी बात ये है कि असम सरकार के मुताबिक यह वायरस भी अप्रैल 2019 में पहली बार अरुणाचल प्रदेश से सटे चीन के शिजांग प्रांत के एक गांव से ही शुरू हुआ। असम सरकार को संदेह है कि चीन से यह वायरस पहले अरुणाचल प्रदेश पहुंचा फिर असम आया।












Click it and Unblock the Notifications