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अश्वगंधा से कोरोना वायरस का इलाज संभव! IIT दिल्ली और जापानी NIAIST की स्टडी

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नई दिल्ली- आईआईटी दिल्ली और जापान की एक रिसर्च संस्था ने अश्वगंधा में मौजूद प्राकृतिक तत्वों के इस्तेमाल से कोरोना वायरस की दवा बनाने की संभावना जताई है। उन्होंने अपने रिसर्च में पाया है कि इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व कोरोना वायरस का खात्मा करने में सक्षम साबित हो सकते हैं। उनकी यह स्टडी जल्द ही एक अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका जर्नल ऑफ बायोमॉलिक्यूलर डायनामिक्स में प्रकाशित होने वाली है, उसके बाद संभावित दवाई का इंसानों में प्रयोग के तौर पर इस्तेमाल करके देखा जा सकता है। बता दें कि इस समय पुरी दुनिया में कोरोना वायरस के संक्रमितों का आंकड़ा हर पल बढ़ता जा रहा है। भारत में यह आंकड़ा आज सुबह तक 1,01,1139 तक पहुंच चुका है तो पूरे विश्व में 48 लाख के करीब इससे पीड़ित हो चुके हैं।

अश्वगंधा से कोरोना का इलाज संभव!

अश्वगंधा से कोरोना का इलाज संभव!

आईआईटी दिल्ली और जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड इंडस्ट्रीयल साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने एक साझा अध्ययन में इस बात की खोज की है कि आयुर्वेदिक औषधि अश्वगंधा से नोवल कोरोना वायरस का इलाज संभव हो सकता है। इन्होंने पाया है कि अश्वगंधा में ऐसे प्रभावी प्राकृतिक तत्व हो सकते हैं, जिससे कोरोना वायरस की दवा तैयार की जा सकती है। शोधकर्ताओं ने इस बात की खोज की है कि अश्वगंधा से निकला नैचुरल कंपाउंड विदानन (Withanone) और न्यूजीलैंड के प्रॉपोलिस (मुधमक्खी के छत्ते के अंदर पाया जाने वाला मोमी गोंद) के प्राकृतिक यौगिक में सक्रिय वायरस के साथ घुल-मिल जाने और उसे रोक देने की क्षमता है।

इस रिसर्च ने जगाई नई उम्मीद

इस रिसर्च ने जगाई नई उम्मीद

आईआईटी, दिल्ली के बायोकेमिकल इंजीनियरिंग और बायोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रमुख डी सुंदर ने कहा है, "भारत में परंपरागत आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल हजारों वर्षों से हो रहा है। लेकिन, आधुनिक दवाओं की तरह प्राकृतिक दवाओं की मेकिनिज्म अभी तक नहीं तैयार हो पाई है।.........अध्ययन दल में शामिल वैज्ञानिकों ने अपने अनुसंधान के दौरान वायरस की प्रतिकृति बनाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले मुख्य सार्स-कोवी-2 एंजाइम को निशाना बनाया।" उन्होंने ये भी कहा है, "अनुसंधान के नतीजे न सिर्फ कोविड-19 रोधी दवाओं के परीक्षण के लिए जरूरी समय और लागत को बचा सकते हैं, बल्कि वे कोरोना वायरस महामारी के प्रबंधन में भी अहम साबित हो सकते हैं। इसलिए, इसकी प्रयोगशाला में और चिकित्सीय परीक्षण किए जाने की आवश्यकता है।"

इंसान पर ट्रायल की जरूरत

इंसान पर ट्रायल की जरूरत

सुंदर के मुताबिक दवा तैयार करने में कुछ वक्त लग सकता है और मौजूदा परिस्थितियों में ये प्राकृतिक संसाधन अश्वगंधा और प्रॉपोलिस चिकित्सीय महत्व वाले साबित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि आईआईटी दिल्ली और जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड इंडस्ट्रीयल साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्राकृतिक संसाधनों को आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ मिलाकर पारंपरिक जानकारियों को ठोस आधार देने में दशकों से लगे हुए हैं। सुंदर के मुताबिक इस शोधपत्र की पहली रिपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका जर्नल ऑफ बायोमॉलिक्यूलर डायनामिक्स में प्रकाशित होने की अनुमति मिल गई है। आने वाले कुछ ही दिनों में इसके प्रकाशन की उम्मीद है। इस शोध को आगे बढ़ाते हुए अश्वगंधा से कोविड-19 की दवा बनाने की दिशा में काम शुरू हो सकता है। बता दें कि नोवल कोरोना वायरस का पहला मामला पिछले साल दिसंबर के पहले हफ्ते में चीन के वुहान शहर में आया और आज यह आंकड़ा 48 लाख को पार करने वाला है। इस दौरान दुनिया भर में इसकी चपेट में आकर 3 लाख से ज्यादा लोगों की मौत भी हो चुकी है। लेकिन, अब तक पूरी दुनिया में इसके इलाज के लिए दवा और रोकथाम के लिए वैक्सीन की तलाश ही चल रही है, लेकिन अभी तक कोई बड़ी कामयाबी हाथ नहीं लगी है। ऐसे में अगर आईआईटी दिल्ली का ये रिसर्च कारगार साबित हुआ तो भारत ही नहीं पूरी दुनिया के दिन फिर सकते हैं।

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English summary
Ashwagandha is possible cure to corona virus! IIT Delhi and Japanese NIAIST study
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