ऐसा क्या हुआ कि RSS,VHP के विचारों से सहमत हो गए ओवैसी और मुस्लिम संगठन?
आरएसएस-वीएचपी और मुस्लिम संगठन या मुसलमानों की राजनीति करने वाले हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी किसी मुद्दे पर सहमत हो जाएं, यह बहुत ही असामान्य सियासी घटना है। लेकिन, समलैंगिक विवाह को मान्यता नहीं दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के सर्वसम्मिति से आए फैसले पर ये सारा पक्ष एक ही तरफ खड़ा दिख रहा है।
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति से समलैंगिक शादियों को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया। यही नहीं सर्वोच्च अदालत ने बहुमत के फैसले से समलैंगिक जोड़ियों को बच्चा गोद लेने की अनुमति देने से भी मना कर दिया है।

आरएसएस ने किया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा है, 'सुप्रीम कोर्ट का समलैंगिक विवाह संबंधी निर्णय स्वागत योग्य है। हमारी लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था इससे जूड़े सभी मद्दों पर गंभीर रूप से चर्चा करते हुए उचित निर्णय ले सकती है।'
वीएचपी ने कहा हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले से संतुष्ट हैं
वहीं वीएचपी के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील आलोक कुमार ने कहा, 'हम इस बात से संतुष्ट हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समेत सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाया है कि विवाह के तौर पर दो समलैंगिकों के बीच संबंध रजिस्ट्रेशन के लिए योग्य नहीं है। यह उनका मौलिक अधिकार भी नहीं है। समलैंगिकों को बच्चा गोद लेने का अधिकार नहीं देना भी एक अच्छा कदम है।'
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी फैसले का स्वागत किया
वहीं मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता नहीं देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। इसने कहा है कि यह आदेश 'विवाह की पारंपरिक संस्था के संरक्षण को मजबूत बनाता है।'
शादी सिर्फ एक पुरुष और एक महिला के बीच होती है- ओवैसी
वहीं हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने अपने 'एक्स' पोस्ट में लिखा है कि 'सुप्रीम कोर्ट ने संसद की सर्वोच्चता के सिद्धांत को कायम रखा है। यह तय करना अदालतों पर निर्भर नहीं है कि कौन किस कानून के तहत शादी करेगा।'
उन्होंने आगे लिखा है, 'मेरा विश्वास और मेरी अंतरात्मा कहती है कि शादी सिर्फ एक पुरुष और एक महिला के बीच होती है.....यह 377 के मामले की तरह भेदभाव का सवाल नहीं है, यह शादी को मान्यता देने को लेकर है। यह सही है कि सरकार इसे किसी एक और सभी पर लागू नहीं कर सकती।'
सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाह को मान्यता देने से किया इनकार
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने समलैंगिक विवाह को विशेष विवाह अधिनियम (SMA) के तहत कानूनी मान्यता देने से सर्वसम्मति से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा कि यह अधिकार संसद के पास है कि ऐसी शादियों को मान्यता देने के लिए कानून में परिवर्तन करे।
भाजपा भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत
हालांकि, शीर्ष अदालत ने समलैंगिक लोगों को समान अधिकार और उनकी सुरक्षा को मान्यता दी है। साथ ही यह भी कहा कि इस समुदाय के प्रति आम जनता को जागरूक किया जाए। सत्ताधारी बीजेपी भी समलैंगिक विवाह को मान्यता नहीं दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ खड़ी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उलझ गया इंडिया ब्लॉक
लेकिन, विपक्षी गठबंधन इंडिया में इसको लेकर असमंजस की स्थिति है। जहां कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर इस फैसले का अध्ययन करने के बाद अपना विस्तृत नजरिया सामने रखने की बात कही है, वहीं इंडिया ब्लॉक की सहयोगी सीपीआई ने सर्वोच्च अदालत के फैसले को 'निराशाजनक' कह दिया है।












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