आम आदमी पार्टी पर लगे ये दाग अच्छे हैं...

आखिर ये दाग क्या हैं, कौन से हैं, आइये इस पर चर्चा करते हैं। सबसे पहला दाग है क्रिमिनल रिकॉर्ड रखने वाले नेताओं का चुनाव लड़ना। केजरीवाल ने कहा था कि वो ऐसे किसी भी व्यक्ति को टिकट नहीं देंगे, जिनका बैकग्राउंड आपराधिक होगा। अब अगर चुनाव आयोग में दर्ज प्रत्याशियों की सूची उठाकर देखें तो आम आदमी पार्टी से पांच कैंडिडेट ऐसे हैं, जिन पर क्रिमिनल केस चल रहे हैं। उनमें सबसे ऊपर नाम खुद केजरीवाल का है। जिन पर पांच आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं।
दूसरा नाम मनीष सिशोधिया का है, जिनके खिलाफ 3 मुकदमें दर्ज हैं। तीसरा नाम गोपाल राय, चौथा राजेश गर्ग रोहिणीवाला का है। दोनों पर दो-दो आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं, जबकि पांचवां नाम हरीष अवस्थी का है, जिन पर एक मुकदमा दर्ज है। इसमें कोई शक नहीं कि आम आदमी पार्टी के समर्थक इस खबर को पढ़ने के बाद कहेंगे कि इनमें से कोई भी मामला सिद्ध नहीं हुआ है। तो उनसे मैं सवाल पूछना चाहूंगा कि ऐसे तो संसद में जितने भी सांसद बैठे हैं, उन पर भी मामले सिद्ध नहीं हुए हैं, तो केजरीवाल ने उन्हें बलात्कारी और हत्यारों की संज्ञा कैसे दी। खैर हम यहां वर्तमान केंद्र सरकार के सांसदों का पक्ष लेने नहीं बैठे हैं, हम सिर्फ इतना कहना चाहते हैं, कि दाग-दाग होता है, अच्छा हो या बुरा।
पुराने ढर्रे पर केजरीवाल की आप
आप पर एक और दाग है, जिसपर शायद आपने अभी तक गौर नहीं किया होगा। यह पार्टी भी उसी ढर्रे पर चल पड़ी है, जिस पर अन्य पार्टियां चल रही हैं। वो है कम पढ़े लिखों को विधायक बनाने की होड़। जब आम आदमी पार्टी आयी, तो लोगों को लगा कि शायद अब आठवीं, व पांचवीं पास विधायक नहीं होंगे, लेकिन आप ने भी ऐसे लोगों को टिकट दिया है, जो महज 5वीं, 10वीं या बारहवीं तक पढ़े हैं। आप के प्रत्याशियों की सूची में 15 प्रत्याशी 12वीं पास हैं, जबकि 10 प्रत्याशी 10वीं पास हैं, 4 प्रत्याशी आठवीं पास हैं और एक पांचवीं पास। दो ऐसे हैं, जो सिर्फ पढ़े लिखे हैं।
यानी अगर आप यह सोच रहे हैं कि आम आदमी पार्टी के आने से आपको उच्च शिक्षा प्राप्त विधायक मिलेंगे, तो आप अपनी गलत फहमी आज ही दूर कर लीजिये।












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