अरविंद केजरीवाल ने मानी हार, चुनाव के लिए फिर से तैयार

अरविंद केजरीवाल को कहीं न कहीं इस बात का भी मलाल है कि उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए वाराणसी की जगह को ही क्यों चुना? वाराणसी से करारी शिकस्त और उसके बाद दिल्ली में एक भी सीट नहीं मिल पाने का गम अब अरविंद को सत्ता की याद फिर से दिला रहा है। केजरीवाल ने मोर्चा भले ही भ्रष्टाचार के खिलाफ खोला था लेकिन अंतिम पारी सिर्फ व्यक्तिगत रूप लेकर नरेंद्र मोदी तक ही सिमट गई। जनता ने इस बात को कतई नहीं स्वीकारा और केजरीवाल को इसका बेहतर जवाब भी दे दिया।
अरविंद केजरीवाल के बोल:
आम चुनाव समाप्त होने के बाद जब केजरीवाल को बुरी तरह हार मिली तो वो तिलमिलाए हुए नई दिल्ली के गर्र्नर से जा मिले और चुनाव कराने की बात कही। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि- ' मुझे पता है दिल्ली की जनता मुझसे बेहद नाराज है लेकिन इसके लिए मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया है और मैंने सभी आम जनों से इस बात की सार्वजनिक माफी भी मांग ली है। मैं चाहता था कि दिल्ली में एक बार फिर से जनमत संग्रह कर सरकार बनाने का मुझे मौका दिया जाए लेकिन अब ऐसा हो पाना काफी मुश्किल हो गया है। मैं दिल्ली की जनता से यह कहना चाहता हूं कि आम आदमी पार्टी एक बार फिर से चुनाव के लिए तैयार है।'

नई दिल्ली की जनता ने अरविंद को नकारा
आम चुनाव में अरविंद केजरीवाल को दिल्ली की जनता ने जिस तरीके से नकारा है उसे देख यही लगता है कि अब उन्हें विदेश चले जाना चाहिए।

तू-तू, मैं-मैं
अरविंद केजरीवाल की पार्टी सदस्यों और नेताओं से ही नहीं बनती है। कभी मनीष सिसोदिया और तो शाजिया इल्मी व कुमार विश्वास उनके दुश्मन बन जाते हैं।

थके हुए अरविंद केजरीवाल
अब तो बहुत खाली समय मिलगा अरविंद केजरीवाल को ये सब करने का। जिसे अपनी ही रैली में नींद आए वो देश के लिए जग नहीं सकता है।

कांग्रेस ने डुबेाया आप को
आप के अरविंद केजरीवाल के लिए गले की फांस बन गया कांग्रेस। अंतत: उसे स्वयं की तरह कहीं का नहीं छोड़ा।

अरविंद की राजनीति
अरविंद केजरीवाल ने सदैव ही दूसरों को बाहर का रास्ता दिखाया लेकिन आम चुनाव में जनता ने उन्हें ही बाहर कर दिया।












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