वित्त मंत्रालय ने अरुण जेटली को किया याद, गिनाईं जीएसटी की उपलब्धियां
वित्त मंत्रालय ने पहली पुण्यतिथि पर अरुण जेटली को किया याद, गिनाईं जीएसटी की उपलब्धियां
नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली को उनकी पहली पुण्यतिथि पर याद करते हुए उन्हें कई सुधार लाने वाला मंत्री बताया है। वित्त मंत्रालय ने कई ट्वीट किए हैं, जिनमें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से हुए फायदे गिनाए गए हैं। वित्त मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि जीएसटी के आने से अधिकतर चीजों पर लगने वाले टैक्स रेट में कमी आई और आम आदमी को इससे काफी राहत मिली।
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जेटली के वित्त मंत्री रहते लागू हुआ था जीएसटी
देश में जीएसटी को एक जुलाई, 2017 को लागू किया गया था। तब अरुण जेटली वित्त मंत्री थे। वित्त मंत्रालय ने ट्वीट किया, आज हम अरुण जेटली को याद कर रहे हैं। जीएसटी के क्रियान्वयन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इतिहास में इसे भारतीय कराधान का सबसे बुनियादी ऐतिहासिक सुधार गिना जाएगा। लोग जिस दर पर कर चुकाते थे, जीएसटी व्यवस्था में उसमें कमी आई है।

गिनाए जीएसटी के फायदे
वित्त मंत्रालय ने कहा कि जीएसटी से कारोबारियों को काफी फायदा हुआ है। सरकार ने कारोबारियों को बड़ी राहत देते हुए 40 लाख रुपये सालाना तक के टर्नओवर वाले कारोबार को जीएसटी से मुक्त कर दिया गया है। पहले यह सीमा 20 लाख रुपये तक की थी। इसके अलावा जिन कारोबारियों की वार्षिक आमदनी 1.5 करोड़ रुपये तक है, वे कम्पोजिशन स्कीम को चुन सकते हैं। पूर्व में 75 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले कारोबारी ही कम्पोजिशन स्कीम को चुन सकते थे।

आम आदमी के जरूरत के सामानों पर कम हुआ टैक्स
वित्त मंत्रालय ने एक ट्वीट में कहा, फिलहाल सिर्फ कुछ लग्जरी और अन्य गैरजरूरी सामान पर ही 28 फीसद की जीएसटी का ऊंचा टैक्स लगाया गया है। पहले 230 आइटम पर 28 फीसदी टैक्स था जिसे घटाकर सिर्फ 30 आइटम तक कर दिया गया है। बाकी 200 आइटम को और कम टैक्स वाले स्लैब में लाया गया है। साथ ही निर्माण क्षेत्र एवं खासकर आवासीय सेक्टर को बड़ी राहत दी गई है। इसे अब पांच फीसद के टैक्स स्लैब के अंतर्गत रखा गया है। सस्ते मकानों पर जीएसटी की दर अब एक फीसद रह गई है।
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक टैक्सपेयर्स का बेस करीब दोगुना हो गया है। जीएसटी लागू होने के समय असेसीज की संख्या करीब 65 लाख थी जो अब बढ़कर 1.24 करोड़ तक पहुंच गई है। वहीं अब जीएसटी से जुड़ी सारी प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमैटेड हो गई है। अब तक 50 करोड़ रिटर्न ऑनलाइन फाइल किए जा चुके हैं और 131 करोड़ ई-बिल जेनरेट हुए हैं।
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