शिवसेना का पीएम मोदी से सवाल- आखिर आप पर CAA और आर्टिकल 370 के निर्णय को रद्द करने का दवाब कौन बना रहा?

मुंबई। शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' के जरिए एक बार फिर से केंद्र सरकार पर तीखा वार किया है, पार्टी ने 'सामना' के जरिए मोदी सरकार को सीएए, कश्मीर, अनुच्छेद 370, कश्मीरी पंडितों और PM के वाराणसी दौरे को लेकर घेरा है और शिवसेना ने वाराणसी में दिए गए पीएम मोदी के भाषण का जिक्र करते हुए उनसे पूछा है कि आप पर आखिर किसका दवाब है?

'दिल्ली चुनाव में पीएम मोदी-शाह के भाषण रहे फेल'

'दिल्ली चुनाव में पीएम मोदी-शाह के भाषण रहे फेल'

सामना में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने यही कहा कि किसी भी परिस्थिति में सीएए और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का जो हमारा फैसला है, उसे रद्द नहीं करेंगे, यहां तक कि दिल्ली चुनाव के लिए भाजपा का प्रचार का भी यही मुद्दा था, लेकिन वह चला नहीं.. बल्कि हुआ यह कि दिल्ली में लोगों ने इस प्रचार का दुष्‍प्रभाव किया, प्रधानमंत्री ने वाराणसी में भी यही भाषण दिया है वाराणसी में यह भाषण चल सकता है, क्योंकि वाराणसी का माहौल अलग है लेकिन हर जगह ये नहीं चल सकता है।

प्रधानमंत्री पर आखिर दवाब कौन डाल रहा है?

प्रधानमंत्री पर आखिर दवाब कौन डाल रहा है?

सामना में लिखा है कि प्रधानमंत्री पर अनुच्छेद-370 के निर्णय या सीएए को रद्द करने के लिए दवाब कौन डाल रहा है, इसे उन्हें स्पष्ट करना चाहिए, इस मुद्दे पर धूल न उड़ाएं, कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने का निर्णय देशहित में ही है, इस पर हो-हल्ला मचाने की आवश्यकता नहीं है, हमारा प्रश्न ये है कि कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटने के बाद वहां पर अलग क्या हुआ? कश्मीर में रोजगार नहीं है, कश्मीरी पंडितों की घर वापसी नहीं हो रही इसलिए केंद्र सरकार काम ज्यादा करे और बोलना कम करें।

'संशय को दूर किया जाए तो सारे बवाल शांत हो जाएगें'

'संशय को दूर किया जाए तो सारे बवाल शांत हो जाएगें'

सामना में ये भी लिखा है कि जहां तक CAA का सवाल है, वहां भी अगर संशय को दूर किया जाए तो सारे बवाल शांत हो जाएगें, हमारा सिर्फ इतना ही कहना है कि सरकार काम करें बोलना-डोलना कम करें क्योंकि दिल्ली में यह बोलना-डोलना काम नहीं कर पाया।

नागरिकता संशोधन कानून

उसे नागरिकता संशोधन कानून के सारे संशय को लोगों के बीच में क्लीयर करने चाहिए क्योंकि देश का हर नागरिक यही चाहता है कि यहां से अवैध बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों को लात मारकर निकाला जाए, इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार को सारी बातें स्पष्ट करनी चाहिए ना कि गोल-मोल बातों में उलझाना चाहिए।

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