शोपियां फायरिंग को सेना ने ठहराया सही, कहा-आत्मरक्षा में चलाईं थी गोलियां
श्रीनगर। जम्मू कश्मीर के शोपियां में 27 जनवरी को सेना द्वारा चलाई गई गोलीबारी में तीन युवकों की मौत हो गई थी। इस पर सफाई देते हुए नॉर्दन आर्मी कंमाडर लेफ्टिनेट जनरल देवराज अंबू का कहना है कि सेना ने गोलियां आत्म सुरक्षा में चलाई थी। सैनिकों को उकसाने के लिए स्थानीय लोग पत्थरबाजी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह दुखद है, लेकिन हम जानते हैं कि जांच के बाद सच सामने आएगा। हमारे जवानों ने उस वक्त सही फैसला लिया।

जवानों के समर्थन में आई सेना
जनरल अंबू ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस केस में कोई गिरफ्तारी नहीं होगी, लेकिन मेजर आदित्य से पूछताछ की जा सकती है। उत्तरी क्षेत्र सेना कमांडर के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सेना पूरी तरह से जवानों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा, 'एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी है। सब कुछ अब जांच में सामने आएगा। हम अपनी जांच कर रहे हैं। इसमें साफ है कि हमे उकसाया गया इसके बाद जबाव दिया गया है।

जवानों ने सेल्फ डिफेंस में कार्रवाई की थी
सेना की आंतरिक जांच में भी यह बात सिद्ध हुई है कि जवानों ने सेल्फ डिफेंस में कार्रवाई की थी। उन्होंने कहा, 'समय और परिस्थिति के अनुसार जवानों का कदम बिल्कुल उचित था।' उत्तरी सेना के कमांडर अंबू ने कहा कि एक "सामान्य" प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसने किसी का नाम नहीं दिया गया है। बीजेपी ने एफआईआर का जोरदार विरोध किया है, जबकि जम्मू और कश्मीर में गठबंधन सहयोगी पीडीपी ने जोरदार ढंग से बचाव किया है।

मेजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज
जम्मू और कश्मीर पुलिस द्वारा दो सेना के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सेना के 10 गढ़वाल इकाई के कर्मचारियों के खिलाफ रणबीर दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 307 (हत्या की कोशिश) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस एफआईआर में सेना के एक मेजर का नाम भी शामिल किया गया है। जो उस समय जवानों की टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे। वहीं सेना सूत्रों की ओर से दावा किया गया है कि कि जम्मू कश्मीर के शोपियां जिले में गोलीबारी में दो नागरिकों की मौत को लेकर दर्ज प्राथमिकी में सेना के जिस मेजर का जिक्र किया गया है, वह घटना स्थल पर मौजूद नहीं थे। वह वहां से करीब 200 मीटर दूर थे।












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