सेना के पास गोला-बारूद की कमी नहीं, आगामी बजट पर निर्भर नहीं है हमारी तैयारी: आर्मी चीफ
नई दिल्ली। मोदी सरकार अपना अगला बजट 1 फरवरी 2020 को पेश करने वाली है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश के सामने सरकार के खर्च का ब्यौरा रखेंगी। इस बीच ऐसी भी उम्मीदें लगाई जा रही हैं कि मोदी सरकार भारत की सुरक्षा के लिए भी अपना खजाना खोल सकती है। बजट पेश होने से पहले आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने सुरक्षा बेड़े में गोला-बारूद की कमी को सिरे से नाकार दिया है। उन्होंने कहा, भारतीय सेना ने पिछले दो वर्षों में गोला बारूद की कमी को पूरा करने में कामयाबी हासिल की है।

बजट के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आगामी आवंटन में सेना की आवश्यकताओं को पूरा किया जाएगा। हालांकि उन्होंने कहा कि चिंतित होने के लिए कुछ भी नहीं है, गोला-बारूद की कमी अब अतीत की बात है। पिछले कुछ वर्षों में हमने उच्च तकनीक प्लेटफॉर्म को शामिल किया है। आर्मी चीफ ने कहा, सेना ने अपनी आवश्यकताओं को सरकार को भेज दिया है और आशा व्यक्त की है कि आवंटन मौजूदा जरूरतों के अनुसार किया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा कि हमारे भंडार अभी भरे हुए हैं, और स्टॉक भी काफी ज्यादा है। अतीत में कुछ कमी पाई गई थी लेकिन उसे अब पूरा कर लिया गया है। आर्मी चीफ ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 30,000 करोड़ से अधिक की खरीद ने सुनिश्चित किया है कि सेना की मारक क्षमता में वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि 2016 में उरी हमले के बाद सेना को गोला बारूद की कमी का सामना करना पड़ा था। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय सेना के पास सिर्फ 10 दिन तक युद्ध लड़ने लायक गोला बारूद था। लेकिन यह पिछले कुछ वर्षों में बदल गया है। टैंक और तोपखाने के लिए गोला-बारूद के स्टॉक को बढ़ाने के लिए जो भी जरूरी कदम था वह उठाया गया है।
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