चीन सीमा से 25 किलोमीटर की दूरी पर भारत के अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर ने दिखाई ताकत, देखें VIDEO

नई दिल्ली, 8 अगस्त: पिछले साल मई में लद्दाख और सिक्किम में भारत का चीन के साथ सीमा विवाद हुआ था। कुछ दिनों बाद सिक्किम में हालात सामान्य हो गए, लेकिन लद्दाख में अभी भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। जिस वजह से भारतीय सेना और वायुसेना दोनों वहां पर पूरी तैयारी करके बैठी हैं। अब लद्दाख से ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर चीन की टेंशन बढ़ सकती है। (वीडियो-नीचे)

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    चीन सीमा से 25 किलोमीटर की दूरी पर भारत के अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर ने दिखाई ताकत, देखें VIDEO
    सीमा के पास भरी उड़ान

    सीमा के पास भरी उड़ान

    न्यूज एजेंसी एएनआई ने एक वीडियो जारी किया है, जो 33 सेकंड का है। ये वीडियो पूर्वी लद्दाख के न्योमा इलाके का है, जो चीन सीमा से सिर्फ 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि अपाचे हेलीकॉप्टर अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रहा। इसके अलावा जमीन से कुछ ही फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरकर अपाचे ने करतब दिखाए। लद्दाख में कम ऊंचाई पर उड़ने से ये हेलीकॉप्टर चीन के रडार की पकड़ में नहीं आएगा। वैसे सभी हेलीकॉप्टर्स के लिए इनती कम ऊंचाई पर उड़ान भरना मुश्किल है।

    चिनूक ने भी दिखाई ताकत

    चिनूक ने भी दिखाई ताकत

    वहीं अपाचे के बाद भारतीय वायु सेना के विशेष बलों ने लगभग 13,500 फीट की ऊंचाई पर न्योमा एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड पर चिनूक हेवी-लिफ्ट हेलीकॉप्टर से विशेष अभियान चलाने की क्षमता का प्रदर्शन किया। मामले में ग्रुप कैप्टन अजय राठी ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास होने की वजह से न्योमा एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी) का सामरिक महत्व है। ये लेह हवाई क्षेत्र और एलएसी के बीच महत्वपूर्ण अंतर को घटाता है, जिससे पूर्वी लद्दाख में जवानों और सामग्री की त्वरित आवाजाही होती है।

    न्योमा तीसरा ALG

    न्योमा तीसरा ALG

    आपको बता दें कि न्योमा को दुनिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित एडवांस लैंडिंग ग्राउंड कहा जाता है। वायुसेना के अधिकारियों के मुताबिक न्योमा हवाई पट्टी को वायुकमान में तब्दील करने का काम शुरू हो गया है। हाल ही में वहां पर एएन 32 विमान ने सफलतापूर्वक लैंडिंग की थी। लद्दाख के उत्तरी इलाके में दौलत बेग ओडी और पूर्वी इलाके के फक चे के बाद न्योमा तीसरा एडवांस लैंडिंग ग्राउंड ( ALG) होगा। वैसे इस इलाके में पिछले साल मई-जून से ही अपाचे हेलीकॉप्टर ऑपरेशनल है।

    नाम से खौफ खाते हैं दुश्मन

    नाम से खौफ खाते हैं दुश्मन

    अपाचे को अपाचे गार्डियन हेलीकॉप्‍टर के नाम से भी जाना जाता है। एएच-64ई (I) अपाचे गार्डियन एक एडवांस्‍ड और हर मौसम में हमला करने की क्षमता से लैस हेलीकॉप्‍टर है। जिसे जमीन के अलावा हवा में मौजूद दुश्‍मन पर भी हमला करने में प्रयोग किया जा सकता है। ये हेलीकॉप्‍टर कम ऊंचाई पर पेड़ों और पहाड़ों के बीच भी उड़ान भरकर दुश्‍मन को नेस्‍तनाबूद कर सकता है। जब अमेरिका की सेना अफगानिस्तान गई थी, तो इसने वहां पर अपनी श्रेष्ठता को साबित किया। जिस वजह से इसका नाम सुनते ही दुश्मन खौफ खाते हैं।

    रूसी हेलीकॉप्टर की ली जगह

    बोइंग का अपाचे चार ब्‍लेड और ट्विन इंजन हेलीकॉप्‍टर है। इसके अलावा ये दुनिया का पहला ऐसा अटैक हेलीकॉप्‍टर है जो रडार की पकड़ से दूर है। इसके कॉकपिट में दो लोगों के क्रू की जगह है। अपाचे में फिट सेंसर की मदद से ये अपने दुश्‍मनों को आसानी से तलाश कर उन्‍हें खत्‍म कर सकता है। साथ ही इसमें नाइट विजन सिस्‍टम भी इंस्‍टॉल हैं। पहले पठानकोट एयरबेस पर में रूसी हेलीकॉप्‍टर एमआई-35 की एक यूनिट थी, जिसकी जगह पर भारतीय वायुसेना ने अपाचे को तैनात किया।

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