कृषि कानूनः अनिल घनवट ने CJI को लिखा पत्र, कहा-कृषि कानूनों पर रिपोर्ट सार्वजनिक हो
नई दिल्ली, सितंबर 07: कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति के सदस्य कृषि अर्थशास्त्री अनिल सिंह घनवत ने मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना को पत्र लिखकर तीन विवादास्पद कृषि कानूनों पर रिपोर्ट सार्वजनिक करने का आग्रह किया है। उन्होंने पत्र में लिखा कि, इस पर सार्वजनिक रूप से बहस हो। चिट्ठी में कहा गया है कि कृषि कानूनों पर समिति की रिपोर्ट अभी तक जनता के लिए जारी नहीं की गई है। कमेटी द्वारा मार्च 2021 में ही रिपोर्ट सबमिट कर दी गई थी।

अनिल घनवत ने लिखा कि, सर्वोच्च न्यायालय ने तीन कृषि कानूनों के कार्यान्वयन को निलंबित कर दिया था और 12 जनवरी 2021 को इन कानूनों पर रिपोर्ट करने के लिए एक समिति का गठन किया। समिति को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए दो महीने का समय दिया गया था। समिति ने बड़ी संख्या में किसानों और कई हितधारकों से परामर्श करने के बाद 19 मार्च 2021 को निर्धारित समय से पहले अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
उन्होंने आगे लिखा कि, समिति ने किसानों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सभी हितधारकों की राय और सुझावों को शामिल किया। रिपोर्ट में किसानों की सभी आशंकाओं का समाधान किया गया है। समिति को विश्वास था कि इन सिफारिशों से चल रहे किसान आंदोलन के समाधान का मार्ग खुलेगा। समिति के सदस्य के रूप में, विशेष रूप से किसान समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हुए, मुझे इस बात का दुख है कि किसानों द्वारा उठाया गया मुद्दा अभी तक हल नहीं हुआ है और आंदोलन जारी है।
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घनवत ने पत्र में कहा कि, मुझे लगता है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिपोर्ट पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। माननीय सुप्रीम कोर्ट से नम्रतापूर्वक निवेदन कर रहा हूं कि किसानों की संतुष्टि के लिए गतिरोध के शांतिपूर्ण समाधान के लिए इसकी सिफारिशों को लागू करने के लिए कृपया रिपोर्ट जल्द से जल्द सार्वजनिक रूप से जारी करें। दो महीने तक किसान संगठनों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद, कृषि अर्थशास्त्रियों की तीन सदस्यीय एससी-नियुक्त समिति ने तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के बारे में अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंप दी थी।
माना जाता है कि समिति ने एपीएमसी अधिकारियों जैसे अन्य हितधारकों के अलावा 73 किसान संगठनों से बात की है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नियुक्त की गई कमेटी में कृषि विशेषज्ञ और शेतकारी संगठनों से जुड़े अनिल धनवत, अशोक गुलाटी और प्रमोद जोशी शामिल किए गए थे। घनवत के अलावा कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी और प्रमोद कुमार जोशी समिति के अन्य सदस्य बनाए गए। हालांकि, बेहतर समन्वय की दृष्टि से आंदोलनकारी किसानों की ओर से किसान नेता बीएस मान को भी समिति में शामिल किया गया था, लेकिन मान ने विरोध के चलते कमेटी में शामिल होने से इनकार कर दिया।












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