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Agnivesh Agarwal Death Reason: क्या होती है स्कीइंग? जिसे करते समय अनिल अग्रवाल के बेटे हादसे का हुए शिकार

Anil Agarwal son Agnivesh Agarwal Death Reason: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन और देश के जाने-माने उद्योगपति अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल का 49 वर्ष की उम्र में अमेरिका के न्यूयॉर्क में निधन हो गया। 07 जनवरी 2025 को उनका निधन हुआ। अग्निवेश अमेरिका में स्कीइंग करते समय एक गंभीर हादसे का शिकार हो गए थे।

हादसे के बाद उन्हें न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई। स्कीइंग दुर्घटना के बाद ही अग्निवेश की हालत नाजुक हुई थी। ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या होती है स्कीइंग, जिसको करते समय हादसे का शिकार हुए अग्निवेश अग्रवाल।

Anil Agarwal son Agnivesh Agarwal Death Reason

🟡 क्या होती है स्कीइंग? (What is Skiing)

स्कीइंग एक रोमांचक शीतकालीन खेल और एडवेंचर एक्टिविटी है, जो बर्फ से ढकी पहाड़ियों पर की जाती है। इसमें खिलाड़ी अपने पैरों के नीचे लंबी और पतली पट्टियां बांधते हैं, जिन्हें स्की कहा जाता है और बर्फ पर फिसलते हुए आगे बढ़ते हैं। संतुलन बनाए रखने और रफ्तार को नियंत्रित करने के लिए हाथों में विशेष पोल यानी छड़ियां पकड़ी जाती हैं।

स्कीइंग केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि एक प्रतिस्पर्धी खेल भी है। सर्दियों में बड़ी संख्या में पर्यटक स्कीइंग का आनंद लेने पहाड़ी इलाकों की ओर रुख करते हैं। अमेरिका जैसे देशों में ये बहुत मशहूर है। हालांकि यह खेल जितना रोमांचक है, उतना ही जोखिम भरा भी माना जाता है, क्योंकि तेज रफ्तार और ऊंची ढलानों के कारण हादसों की आशंका बनी रहती है।

Anil Agarwal son Agnivesh Agarwal Death Reason

स्कीइंग के कई तरह के होते हैं। अल्पाइन स्कीइंग (Alpine Skiing) में ऊंची ढलानों से नीचे की ओर फिसलना शामिल होता है। नॉर्डिक स्कीइंग (Nordic Skiing) में क्रॉस-कंट्री स्कीइंग और स्की जंपिंग जैसे खेल आते हैं, जिनकी शुरुआत नॉर्वे से मानी जाती है। वहीं फ्रीस्टाइल स्कीइंग (Freestyle) में कलाबाजियां, छलांगें और स्टंट शामिल होते हैं। इसके अलावा स्नोबोर्डिंग (Snowboarding) भी एक अलग खेल है, जिसमें दोनों पैरों के नीचे एक चौड़ा बोर्ड लगाया जाता है।

Anil Agarwal son Agnivesh Agarwal Death Reason

🟡 कौन थे अग्निवेश अग्रवाल? (who was Agnivesh Agarwal)

अग्निवेश अग्रवाल का जन्म 3 जून 1976 को बिहार की राजधानी पटना में हुआ था। उन्होंने अजमेर के प्रतिष्ठित मेयो कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। पढ़ाई के बाद उन्होंने कॉरपोरेट जगत में एक सफल करियर बनाया। अग्निवेश ने फुजैराह गोल्ड की स्थापना में अहम भूमिका निभाई और वह हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के चेयरमैन भी रहे।

कॉमर्स में ग्रेजुएट अग्निवेश 2019 तक हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन रहे। उन्होंने माइनिंग सेक्टर में आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया। उनके नेतृत्व में हिंदुस्तान जिंक दुनिया की शीर्ष जिंक उत्पादक कंपनियों में शामिल हुई।

अग्निवेश अग्रवाल फुजैराह गोल्ड के प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर रहे। इसके अलावा वह अलुवर्क्स लिमिटेड, वेदांता से जुड़ी पावर कंपनियों और कई अन्य संस्थानों के बोर्ड में शामिल थे।

अग्निवेश अग्रवाल 1995 से 2013 तक मद्रास एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड के डायरेक्टर रहे और 2009 से स्टरलाइट एनर्जी लिमिटेड के गैर-कार्यकारी निदेशक भी थे। तेंगपानी टी कंपनी, ट्विन स्टार इंटरनेशनल, स्टरलाइट इंफ्रास्ट्रक्चर और प्राइमेक्स हेल्थकेयर जैसी कंपनियों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही।

🟡 लाइमलाइट से दूर रहते थे अग्निवेश अग्रवाल

अग्निवेश अग्रवाल हमेशा सुर्खियों और सोशल मीडिया की चकाचौंध से दूर रहे। वह सार्वजनिक मंचों पर भी बहुत कम नजर आते थे। हालांकि, वेदांता ग्रुप के भीतर उनकी पहचान एक अनुभवी, दूरदर्शी और मजबूत बोर्ड मेंबर के तौर पर थी, जिनकी सलाह और सोच को काफी अहम माना जाता था।

🟡 अनिल अग्रवाल का बेटे के निधन पर भावुक संदेश

बेटे के निधन के बाद अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बेहद भावुक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि यह उनके जीवन का सबसे काला और दुखद दिन है। उन्होंने बताया कि अग्निवेश सिर्फ उनके बेटे ही नहीं, बल्कि उनके सबसे अच्छे दोस्त, गर्व और पूरी दुनिया थे। अनिल अग्रवाल ने लिखा कि किरण और वह दोनों इस क्षति से पूरी तरह टूट चुके हैं और पूरा परिवार गहरे सदमे में है।

🟡 अब जानिए अनिल अग्रवाल के सफर के बारे में... (who is Anil Agarwal)

वेदांता ग्रुप के फाउंडर अनिल अग्रवाल को आज भले ही 'मेटल मैन ऑफ इंडिया' कहा जाता है, लेकिन उनका सफर संघर्षों से भरा रहा है। 1954 में पटना में जन्मे अनिल अग्रवाल ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की। उनके पिता द्वारका प्रसाद अग्रवाल एक छोटी सी दुकान चलाते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद अनिल अग्रवाल ने हार नहीं मानी और मुंबई जाकर कारोबार शुरू किया।

कई असफलताओं के बाद उन्होंने वेदांता रिसोर्सेज की नींव रखी, जिसने आगे चलकर जिंक, लेड, एल्युमिनियम और सिल्वर के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाई। लेकिन आज वही अनिल अग्रवाल अपने बेटे को खोने के गहरे दुख से गुजर रहे हैं।

अग्निवेश अग्रवाल का जाना न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि भारतीय उद्योग जगत के लिए भी एक बड़ी क्षति है। स्कीइंग जैसे रोमांचक खेल के दौरान हुआ हादसा और फिर अचानक आया दिल का दौरा यह दिखाता है कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है। यह घटना हर किसी को सावधानी और सुरक्षा के महत्व की याद दिलाती है।

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