Karnataka: चुनाव से क्यों दूर है राज्य का सबसे बड़ा हिंदू चेहरा, BJP को झटका देगी अनंत हेगड़े की गैरमौजूदगी
karnataka election, कर्नाटक में चुनाव प्रचार चरम पर है लेकिन बीजेपी का एक बड़ा चेहरा अनंत कुमार हेगड़े अपने ही राज्य में कहीं नजर नहीं आ रहे हैं।

karnataka election, कर्नाटक में 10 मई को होने वाली वोटिंग से पहले राजनीतिक दलों का चुनाव प्रचार चरम पर है। कांग्रेस और बीजेपी के बड़े नेताओं ने राज्य में डेरा डाल रखा है। पीएम मोदी , राहुल गांधी नड्डा , खड़गे समेत कई नेता राज्य में चुनावी रैलियां कर रहे हैं।
इन सब के बीच कर्नाटक का एक बड़ा राजनीतिक चेहरा पूरे चुनाव के दौरान गायब नजर आ रहा है। उत्तर कन्नड़ से छह बार के सांसद और तेजतर्रार हिंदुत्ववादी नेता अनंत कुमार हेगड़े पूरे चुनाव में कही नजर नहीं आ रहे हैं।
चुनाव में अनंत कुमार हेगड़े की अनुपस्थिति से इस जिले में भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। अनंत हेगड़े करीब दो साल तक पार्टी की गतिविधियों से दूर चल रहे हैं।

भाजपा के पदाधिकारियों का कहना है कि सांसद स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, इसलिए वह सार्वजनिक या पार्टी की गतिविधियों में भाग नहीं ले रहे हैं। लेकिन भाजपा के अन्य नेताओं का कहना है कि पार्टी आलाकमान द्वारा उन्हें दरकिनार किए जाने के बाद हेगड़े नाराज हैं।
टीओआई की खबर के मुताबिक, बताया जा रहा है कि,अनंत कुमार हेगड़े के बीजेपी के शीर्ष नेताओं के साथ संबंध इतने खराब हो गए हैं कि बुधवार को कारवार में होने वाली पीएम मोदी की रैली में वह शामिल नहीं हो रहे हैं।
हिंदुत्व के समर्थक और भड़काऊ भाषणों के लिए जाने जाने वाले अनंत कुमार हेगड़े को 2019 के लोकसभा चुनावों के तुरंत बाद संविधान को लेकर उनके द्वारा दिए गए कथित विवादास्पद बयान के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटा दिया गया था। जिसके बाद से उनकी तल्खी काफी बढ़ गई थी।

वहीं जानकारों का कहना है कि, बाद में बीजेपी के केंद्रीय नेताओं ने उन्हें राज्य बीजेपी अध्यक्ष बनाने के लिए बेंगलुरु बुलाया था। लेकिन अंतिम समय में उनका नाम हटा दिया गया और मेंगलुरु के सांसद नलिन कुमार कतील को राज्य का ये शीर्ष पद सौंप दिया गया। जो कि अनंत हेगड़े को नागवार गुजरा।
इसके अलावा पार्टी के सूत्रों का कहना है कि, आलाकमान द्वारा भटकल और सिरसी के उम्मीदवारों को बदलने के उनके अनुरोध को नजरअंदाज किए जाने के बाद उन्होंने चुनाव से दूरियां बना ली थीं। बता दें कि, भटकल और सिरसी उनके लोकसभा क्षेत्र में आते हैं। यही नहीं इस महीने की शुरुआत में जब बीजेपी ने अपने स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी की तो उसमें भी हेगड़े का नाम गायब था।

इसके अलावा हाल ही में जब बीजेपी उम्मीदवार और विधानसभा अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी अपना नामांकन दाखिल करने गए तो हेगड़े उनके साथ भी शामिल नहीं हुए थे। जबकि वह अपने गृहनगर सिरसी में थे। 2018 के चुनावों में हेगड़े ने कांग्रेस के पदाधिकारियों राहुल गांधी और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रचार किया था। उनके कई भाषणों ने विवादों को जन्म दिया था।
कई स्थानीय जानकारों का मानना है कि, अनंत कुमार हेगड़े के भड़काऊ भाषण के चलते होन्नावर में परेश मेस्ता की मौत हुई थी। जिसके कारण उत्तर कन्नड़ में व्यापक सांप्रदायिक दंगे हुए थे। हालांकि मेस्ता की मौत को सीबीआई ने एक दुर्घटना करार दिया था।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि, उत्तरी कर्नाटक में अनंत हेगड़े काफी प्रभाव रखते हैं। अगर वह पार्टी से दूरी बनाते हैं तो इसका सीधा नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ सकता है। सूत्रों का कहना है कि, उनके अगले साल लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावना ना के बराबर है। हो सकता है कि वे राजनीति से संन्यास ले लें।
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