आम्रपाली के अनिल शर्मा की कहानी, एक मेधावी इंजीनियर कैसे हो गया दिवालिया
नई दिल्ली। शोहरत और दौलत की भूख इंसान की अच्छी-भली जिंदगी में जहर घोल देती है। आम्रपाली ग्रुप के मालिक अनिल कुमार शर्मा अगर बिहार में इंजीनियर की नौकरी से खुश रहे होते तो उन्हें आज ये जिल्लत नहीं उठानी पड़ती। फरेब से जमा की गयी अरबों-खरबों की सम्पत्ति आज किसी काम की नहीं। जो इंसान एक गजटेड ऑफिसर के रूप में सम्मानित जीवन जी रहा होता आज वह जेल की सलाखों के पीछे है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने अनिल शर्मा की कलई खोल दी। कोर्ट के मुतिबक अनिल शर्मा ने प्लैटों का बोगस एलॉटमेंट किया, खरीदारों के पैसे कहीं और डायवर्ट कर दिये। इसके जरिये काले धन को सफेद करने का आरोप है जिसकी जांच होनी है। फर्जीवाड़ा को देखते हुए कोर्ट ने आम्रपाली के रेरा रजिस्ट्रेशन को रद्द् कर दिया। अनिल शर्मा जिस तेजी से ऊपर चढ़े, उतनी ही तेजी से नीचे गिरे।

कौन हैं अनिल शर्मा ?
बिहार की राजधानी पटना करीब 50 किलोमीटर दूर बसा पंडारक गांव पटना जिले का हिस्सा है। अनिल शर्मा का जन्म इसी गांव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ। वे बचपन से पढ़ने में बहुत तेज थे। गांव के स्कूल में ही पढ़े। मैट्रिक में बहुत अच्छे नम्बरों से पास होने के बाद उनका एडमिशन पटना साइंस कॉलेज में हुआ। साइंस कॉलेज, बिहार का टॉप कॉलेज है। पहले यह माना जाता था कि जिसका एडमिशन साइंस कॉलेज में हुआ उसका जीवन सफल हो गया। ऐसा हुआ भी। अनिल शर्मा ने यहां पढ़ कर इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की। बी टेक की पढ़ाई के लिए वे एनआइटी कटक गये। वहां से उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। फिऱ उन्होंने स्ट्रक्चरल इंजिनीयरिंग में आइआइटी खड़गपुर से एम टेक की डिग्री ली।

इंजीनियर बनने के बाद सरकारी नौकरी
अनिल कुमार शर्मा को इंजीनियरिंग में उच्च शिक्षा हासिल करने की वजह से बहुत जल्द नौकरी मिल गयी। पहले उन्होंने एनटीपीसी में नौकरी ज्वाइन की। वहां कई पदों पर काम करने के बाद नेशनल प्रोजेक्ट्स कंस्ट्रक्शन कंपनी की सेवा में आये। फिर उन्होंने बिहार सरकार के नगर विकास विभाग में असिस्टेंट इंजीनियर के रूप में नौकरी शुरू की। बिहार सरकार की सेवा में रहने के दौरान उनका तबादला हाजीपुर नगर पालिका में हुआ था। 1981-82 में वे हाजीपुर नगर पालिका में असिस्टेंट इंजीनियर के रूप में तैनात थे। हाजीपुर में ही पहली बार अनिल शर्मा को लगा कि इस सरकारी नौकरी से कुछ नहीं होने वाला, कुछ अलग करना चाहिए। उस समय उनकी तनख्वाह इतनी नहीं थी कि वे अपने लिए कार खरीद सकें। कहा जाता है कि हाजीपुर के तत्कालीन जिला परिषद अध्यक्ष जगन्नाथ राय ने अनिल शर्मा को इस्तेमाल के लिए अपनी कार दे दी थी। बाद में उन्होंने इस सेकेंड हैंड कार को किसी तरह खरीद लिया। लेकिन उनका मन सरकारी नौकरी में लग नहीं रहा था। आखिरकार उन्होंने ये सरकारी नौकरी छोड़ दी और नोएडा आ गये। वे एक काबिल सिविल इंजीनियर थे, इसलिए उन्होंने रियल एस्टेट बिजनेस में किस्मत आजमाने की सोची।

कैसे बनी आम्रपाली कंपनी
पढ़ने लिखने में मेधावी रहे अनिल शर्मा ने अपनी कंपनी का नाम इतिहास के पन्नों से निकाला। बौद्धकाल में वैशाली के लिक्ष्वी राजवंश में एक राजनर्तकी थी जिसका नाम था आम्रपाली। उसने अपने राज्य वैशाली की एकता और अखंडता के लिए अपने जीवन का मोल नहीं समझा था। अनिल शर्मा ने एक बार कहा था कि उन्होंने इतिहास की इस राष्ट्रभक्त महिला के नाम पर ही अपनी कंपनी का नाम आम्रपाली रखा था। एक रियल एस्टेट कंपनी के रूप में आम्रपाली ने 2003 में अपना पहला प्रोजेक्ट शुरू किया। उसने दो साल के अंदर ही नोएड़ा में 174 फ्लैट बना कर रियल एस्टेट के धंधे में तहलका मचा दिया। हर तरफ उनकी चर्चा होने लगी। फिर उनका यह धंधा चल निकला। लेकिन अनिल शर्मा कामयाबी के नशे में कुछ ऐसे खो गये कि उन्हें गलत सही का अहसास नहीं रहा। कहा जाता है कि उन्होंने बिहार कैडर के कई आइएएस, आइपीएस अफसरों के काले धन को इस धंधे में लगाना शुरू कर दिया। इनके सहयोग से नोएडा में महंगी जमीन कौड़ियों के मोल खरीदी। प्लैट खरीदारों के पैसे को दूसरे धंधे में लगा दिया। आखिरकार गलत काम का भांडा फूट गया। अब ये काला कारोबार अदालत के सामने है।

पैसा कमाया तो सांसद बनने की तमन्ना
अनिल शर्मा ने जब अकूत दौलत कमा ली तो सांसद बनने की तमन्ना जोर मारने लगी। राजनीतिक दलों को पार्टी चलाने के लिए पैसा चाहिए तो धन्ना सेठों को चुनाव लड़ने के लिए टिकट। 2014 के लोकसभा चुनाव में अनिल शर्मा ने जहानाबाद लोकसभा सीट से जदयू का टिकट हासिल कर लिया। जब अनिल शर्मा को टिकट मिला तो ये अफवाह उड़ गयी कि वे चुनाव लड़ने के लिए बोरा में भर कर पैसा लाये हैं। अनिल शर्मा को भी लगा कि पैसा के बल ही वे चुनाव जीत जाएंगे। लेकिन वे पैसा खर्च करने के बाद भी चुनाव नहीं जीत सके। लोकसभा चुनाव के ठीक बाद बिहार में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव हुआ था। उस समय जनता दल यूनाइटेड में असंतोष की आग जल रही थी। अनिल शर्मा ने फिर पैसे बल के बल पर सांसद बनने की कोशिश की। वे जदयू के बागी विधायकों की मदद से राज्यसभा चुनाव के लिए निर्दलीय उम्मीदवार बन गये। इस चुनाव में भी उनका खूब पैसा खर्च हुआ। फिर भी वे जीत नहीं पाये।

आम्रपाली ग्रुप दिवालिया , दुर्दिन शुरू
अगस्त 2014 में लखीसराय के चर्चित शिक्षण संस्थान बालिका विद्यापीठ के प्रमुख कुमार शरद चंद्र की हत्या हो गयी। अनिल शर्मा को इस मामले में आरोपी बनाया गया। अनिल शर्मा ने लखीसराय में इंजीनियरिंग कॉलेज खोला था। कहा जाता है कि इस इंजीनियरिंग कॉलेज की जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इससे अनिल शर्मा की साख को बहुत धक्का लगा। उन्हें कुछ दिन फरार रहना पड़ा। इसका असर बिजनेस पर भी पड़ा। फिर पूंजी के गलत इस्तेमाल की वजह से आम्रपाली ग्रुप 2018 के आते- आते दिवालिया हो गया। अनिल शर्मा अर्श से फर्श पर आ गये। अब वे पिछले पांच महीने से जेल में बंद हैं।
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