कोरोना महामारी के बीच महाराष्‍ट्र मुख्‍यमंत्री उद्वव ठाकरे की कुर्सी पर मंडराने लगे संकट के बादल, जानें कैसे

महाराष्‍ट्र राज्य खासकर राजधानी मुंबई जबरदस्‍त कोरोनावायरस की चपेट में आ चुके हैं। इस कोरोना संकट से जूझ रही महाराष्‍ट्र सरकार के सामने एक और समस्‍या आन खड़ी हैं वो समस्‍या हैं महाराष्‍ट्र सीएम उद्वव ठाकरे की कुर्सी को लेकर। कोरोना महामारी के बीच सीएम की कुर्सी पर संकट के बादल गहराता नजर आ रहा हैं।

मुंबई। महाराष्‍ट्र राज्य खासकर राजधानी मुंबई जबरदस्‍त कोरोनावायरस की चपेट में आ चुके हैं। इस कोरोना संकट से जूझ रही महाराष्‍ट्र सरकार के सामने एक और समस्‍या आन खड़ी हैं वो समस्‍या हैं महाराष्‍ट्र सीएम उद्वव ठाकरे की कुर्सी को लेकर। कोरोना महामारी के बीच सीएम की कुर्सी पर संकट के बादल गहराता नजर आ रहा हैं।

सीएम की कुर्सी पर इसलिए मंडरा रहा खतरा

सीएम की कुर्सी पर इसलिए मंडरा रहा खतरा

बता दें उद्धव ठाकरे ने पिछले साल 28 नवंबर को मुख्यमंत्री पद संभाला था और उन्हें पद पर बने रहने के लिए अब एक महीने के भीतर ही विधानमंडल का सदस्य बनना होगा, क्योंकि उसके बाद 6 महीने की समय सीमा समाप्त हो जाएगी। अब तक वह राज्य विधानसभा अथवा परिषद के सदस्य नहीं हैं। कोरोना वायरस महामारी के कारण सभी चुनाव टाले जाने की वजह से उद्धव ठाकरे चुनाव लड़कर विधायक नहीं बन पाए हैं। ऐसे में सीएम पद पर बने रहने के लिए उन्‍हें विधायक बनना आवश्‍यक हैं।

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    Maharashtra: Chief Minister Uddhav Thackeray की कुर्सी पर मंडराने लगे संकट के बादल | वनइंडिया हिंदी
    राजनीतिक अस्थिरता को रोकने की सरकार लड़ रही जंग

    राजनीतिक अस्थिरता को रोकने की सरकार लड़ रही जंग

    यहीं कारण हैं कि कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने के साथ राजनीतिक अस्थिरता को रोकने के लिए महाराष्‍ट्र में शिवसेना,एनसीपी और कांग्रेस के गठबंधन से बनी अघाड़ी सरकार लड़ाई लड़ रही हैं। मालूम हो कि विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद जिस तरह से महाराष्‍ट्र में कुछ-कुछ समय बाद राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बना और राष्ट्रपति शासन तक लग गया था उसी स्थिति की पुनरावृत्ति नहीं हो, इसके लिए सत्ताधारी गठबंधन कोई कसर नहीं छोड़ रहा।

    सारी उम्मीदें राज्यपाल कोश्‍यारी के निर्णय पर टिकी हैं

    सारी उम्मीदें राज्यपाल कोश्‍यारी के निर्णय पर टिकी हैं

    महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए उद्धव ठाकरें की सारी उम्मीदें राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर जा टिकी हैं और राज्यपाल कोटे से एमएलसी बनाने के लिए महाराष्‍ट्र कैबिनेट राज्यपाल से लगातार गुजारिश कर रहा है। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर दबाव बनाते हुए उद्धव कैबिनेट ने सोमवार को एक बार फिर उनसे मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) मनोनीत करने को कहा। मालूम हो कि महाराष्‍ट्र के राज्यपाल कोश्‍यारी भाजपा के एक दिग्गज नेता भी हैं, यहीं कारण हैं कि ठाकरे को अपनी कुर्सी को लेकर खतरा सता रहा हैं।

    ठाकरे को विधायक मनोनीत करने की दोबारा की अपील

    ठाकरे को विधायक मनोनीत करने की दोबारा की अपील

    गौरतलब है कि 9 अप्रैल को भी मंत्रिमंडल की तरफ़ से राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को एक प्रस्ताव भेजा गया था कि प्रदेश में विधान परिषद की 9 सीटों के चुनाव पर कोरोना की वजह से चुनाव आयोग ने रोक लगा रखी है, इसलिए उन्हें राज्यपाल द्वारा मनोनीत की जाने वाली दो सीटों के कोटे से विधायक मनोनीत कर दिया जाए। राज्यपाल कोटे से कला और सामाजिक क्षेत्र में अच्छा कार्य करने वाले लोगों का मनोनयन होता है। इसके बाद विगत सोमवार को राज्यपाल को भेजे गए प्रस्ताव में एक बार फिर राज्यपाल से अपील की गयी है कि वह तत्काल उद्धव ठाकरे को विधायक मनोनीत करें और प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता दूर करें।

    इसलिए कला और समाजिक क्षेत्र के लिए मनोनीत करने की गई मांग

    इसलिए कला और समाजिक क्षेत्र के लिए मनोनीत करने की गई मांग

    बता दें कला और सामाजिक क्षेत्र में अच्छा कार्य करने वाले लोगों का मनोनयन होता है क्योंकि उद्धव ठाकरे कुशल फ़ोटोग्राफ़र हैं, उनकी फ़ोटोग्राफ्स की प्रदर्शनियाँ हुई हैं और किताबें भी प्रकाशित हुई है।इसी को ध्‍यान में रखते हुए कला के कोटे से उन्हें विधायक मनोनीत किया जाना चाहिए। लेकिन राज्यपाल ने इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया।

    राजनीतिक अटकलें हुई तेज

    राजनीतिक अटकलें हुई तेज

    वहीं राजभवन में विरोधी पक्ष के नेताओं में इसको लेकर राजनीतिक अटकलें लगानी शुरु हो गई हैं। इन गतिविधियों पर शरद पवार, सांसद संजय राउत आदि नेताओं आरोप लगाया कि क्या जानबूझकर प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का खेल खेला जा रहा है। वहीं राज्य के पूर्व एटॉर्नी जनरल, संविधान विशेषज्ञों ने भी मीडिया को दिए इंटरव्‍यू में बताया कि राज्यपाल मंत्रिमंडल के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए बाध्य होते हैं। वहीं भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ने ये बयान दे दिया कि सत्ताधारी गठबंधन के नेता ख़ुद चाहते हैं कि ठाकरे इस्तीफ़ा दें। इतना ही नहीं एक भाजपा नेता ने मंत्रिमंडल के प्रस्ताव को ही तकनीकी आधार पर अदालत में चुनौती दे डाली।

     कैबिनेट की बैठक के बाद की गई ये सिफारिश

    कैबिनेट की बैठक के बाद की गई ये सिफारिश

    मालूम हो कि महाराष्‍ट्र के डिप्‍टीसीएम अजि पवार की अध्‍यक्षता में सोमवार को एक कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। जिसमें कोश्‍यारी से परिषद में राज्यपाल की ओर से मनोनीत किए जाने वाले दो सदस्‍यों में एक सदस्‍य के रुप में सीएम उद्ध्व ठाकरे को मनोनी‍त करने की अपील की गई। बता दें उद्धव ठाकरे को विधान परिषद में मनोनीत करने को लेकर अब तक कोश्यारी ने मंजूरी नहीं दी है। जिस पर शिवसेना सांसद संजय राउत ने देरी को लेकर पार्टी के मुखपत्र सामना में रविवार को लिखे एक लेख में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर निशाना साधा था।

    दोबारा इसलिए राज्यपाल को भेजनी पड़ी सिफारिश

    दोबारा इसलिए राज्यपाल को भेजनी पड़ी सिफारिश

    आपको बता दें कि जब 9 अप्रैल को एक बार कैबिनेट में प्रस्‍ताव पारित होने के बाद राज्यपाल को ठाकरे को विधाान परिषद सदस्‍य मनोनीत करने की सिफारिश की गई थी। परंतु इस पर कोई निर्णय राज्यापाल ने अभी तक नहीं लिया। इस बीच ये मामला मुंबई हाईकोर्ट भी पहुंच गया जहां कहा गया कि मंत्रीमंडल की मीटिंग सीएम की अध्‍यक्षता में होती है जबकि नौ अप्रैल की बैठे डिप्‍टी सीएम अजीत परवा की अध्‍यक्षता में हुई थी। जिस कारण अब दोबारा ठाकरे को विधान परिषद सदस्‍य मनोनीत करने की सिफारिश करनी पड़ी।

    उद्धव ठाकरे महाराष्‍ट्र के 8वें ऐसे सीएम जो...

    उद्धव ठाकरे महाराष्‍ट्र के 8वें ऐसे सीएम जो...

    मालूम हो कि उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के आठवें ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जो बिना किसी सदन के सदस्य हुए मुख्यमंत्री बने हैं। इनसे पहले कांग्रेस नेता ए आर अंतुल्य, वसंतदादा पाटिल, शिवाजी राव निलंगेकर पाटिल, शंकर राव चाव्हान, सुशील कुमार शिंदे और पृथ्वीराज चौहान और एनसीपी चीफ शरद पवार भी बिना सदन के सदस्य हुए सीएम बन चुके हैं।

    ये हैं नियम

    ये हैं नियम

    मालूम हो कि नियम के अनुसार विधायक दल का नेता किसी भी व्यक्ति को चुना जा सकता है भले ही वह विधानसभा या विधानपरिषद का सदस्य हो या न हो। लेकिन उसे छह महीने के अंदर विधानसभा या विधानपरिषद (जिन राज्यों में है) का सदस्य होना अनिवार्य होता है। उद्धव ठाकरे के लिए समयसीमा अगले महीने खत्म हो रही है। उन्होंने 28 नवंबर 2019 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और महाराष्‍ट्र में कोराना संकट के बीच विधानसभा चुनाव तो होना संभव नहीं हैं ऐसे में सीएम की कुर्सी पर बने रहने के लिए विधानपरिषद का सदस्‍य बनना ही एकमात्र विकल्‍प हैं और जिसका निर्णय राज्यापाल कोश्‍यारी को करना हैं।

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