चाचा शरद पवार को उन्हीं के दांव से भतीजे अजित ने किया चित, दोहराई 41 साल पुरानी कहानी

नई दिल्ली। महाराष्‍ट्र की राजनीति में शनिवार अचानक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। एक दिन पहले जहां लग रहा था कि शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन प्रदेश में सरकार बनाने जा रही है, उद्धव ठाकरे के सीएम बनने पर लगभग फैसला हो गया था। इसी बीच एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के भतीजे और एनसीपी नेता अजित पवार ने पूरा गेम ही बदल दिया। अजित पवार ने न केवल बीजेपी को समर्थन दिया, बल्कि फडणवीस के नेतृत्व में बनी नई सरकार में डिप्टी सीएम भी बन गए। भतीजे अजित के इस दांव से पार्टी के मुखिया शरद पवार ही नहीं पूरा परिवार ही सन्न रह गया। इस बीच शरद पवार ने साफ किया कि प्रदेश में बनी नई सरकार का उनकी पार्टी एनसीपी समर्थन नहीं करती है। बीजेपी को समर्थन देने का अजित का फैसला निजी है। भले ही शरद पवार ने भतीजे के कदम को लेकर सवाल उठाए हैं, लेकिन इतिहास पर नजर डालें तो अजित पवार ने कहीं न कहीं चाचा के ही दांव को आजमाया है।

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    Maharashtra: Sharad Pawar ने CM बनने के लिए छोड़ी थी Party, अब भतीजे ने दोहराया History । वनइंडिया
    अजित पवार ने एक दांव से शरद पवार को किया चित

    अजित पवार ने एक दांव से शरद पवार को किया चित

    एनसीपी नेता अजित पवार ने जिस तरह से बीजेपी के खेमे में जाने का फैसला लिया और नई सरकार में डिप्टी सीएम बने, उनके इस कदम ने पूरा सियासी परिदृश्य ही बदल दिया। हालांकि, अजित पवार ने इस दांव के लिए कुछ वैसा ही रास्ता अपनाया, जैसा कि उनके चाचा शरद पवार ने 1978 में अपनाया था। दरअसल, पूरे मामले की शुरुआत उस समय हुई थी जब 1977 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। जनता पार्टी ने कांग्रेस को हराया और इसके बाद महाराष्ट्र में हार की जिम्मेदारी लेते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री शंकरराव चव्हाण ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

    1978 में शरद पवार ने चला था जो दांव, अजित पवार ने उसे ही अपनाया

    1978 में शरद पवार ने चला था जो दांव, अजित पवार ने उसे ही अपनाया

    शंकरराव चव्हाण के बाद उनकी जगह वसंतदादा पाटिल प्रदेश के सीएम बने। हालांकि, इसके बाद कांग्रेस में दो फाड़ हो गया। फिर 1978 में विधानसभा चुनाव हुए तो उसमें कांग्रेस के दोनों धड़ों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। इस चुनाव में जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन बहुमत नहीं था। इस स्थिति में कांग्रेस के दोनों धड़ों ने समझौता करके सरकार बनाने का फैसला लिया और इस में शरद पवार को मंत्री पद मिला। हालांकि, इसमें बड़ा ट्विस्ट तब आया जब शरद पवार ने पार्टी छोड़ दी और कुछ विधायकों को भी तोड़ने में कामयाब रहे। इसके बाद जनता पार्टी से उनकी बातचीत हुई और उनके समर्थन से शरद पवार सीएम बन गए।

    1978 में 38 की उम्र में ऐसे सीएम बन गए थे शरद पवार

    1978 में 38 की उम्र में ऐसे सीएम बन गए थे शरद पवार

    इस तरह से 1978 में पहली बार शरद पवार ने महज 38 साल की उम्र में सीएम की कुर्सी संभालने में कामयाब हो गए। उस समय उन्होंने जनता पार्टी के साथ जो सरकार बनाई उसे प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन कहा गया। इसके बाद जैसे ही 1980 में देश में इंदिरा गांधी की सरकार बनी, उन्होंने शरद पवार की सरकार को बर्खास्त करने का फैसला लिया। इसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिला। कांग्रेस की तरफ से एआर अंतुले को मुख्यमंत्री बनाया गया। जिस तरह से 1978 में शरद पवार ने पूरा सियासी खेल बदला था बिल्कुल उसी अंदाज में अब अजित पवार ने एनसीपी के विधायकों को तोड़ने के बाद बीजेपी की सरकार में जा मिले और डिप्टी सीएम बने।

    अजित पवार के नए दांव पर क्या बोले चाचा शरद

    अजित पवार के नए दांव पर क्या बोले चाचा शरद

    इस बीच एनसीपी चीफ शरद पवार ने पार्टी से बगावत कर भाजपा के साथ जाने वाले अपने भतीजे अजित पवार के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि अजित पार्टी लाइन के बाहर गए हैं। उन्होंने निजी स्तर पर भाजपा के साथ जाने का फैसला किया है, ऐसे में उन पर नियमों के मुताबिक एक्शन होगा। पवार ने एनसीपी विधायक दल का नया नेता भी चुनने की बात कही है। बता दें कि अभी अजित पवार एनसीपी विधायक दल के नेता हैं। शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले ने भी अजित पवार को धोखा देने वाला कहा है।

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