सिंचाई घोटाले में अजित पवार को क्लीनचिट, दोबारा डिप्टी सीएम बनने का रास्ता साफ?
नई दिल्ली- महाराष्ट्र में एनसीपी नेता अजित पवार को एंटी-करप्शन ब्यूरो से सिंचाई घोटाले में क्लीनचिट मिल गई है है। दरअसल, सियासी गलियारों में चर्चा है कि अजित पवार को उद्धव सरकार में एनसीपी कोटे से डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। महाराष्ट्र एंटी करप्शन ब्यूरो ने बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में एफिडेविट देकर कहा है कि एसआईटी ने इस घोटाले में उनका कोई आपराधिक रोल नहीं पाया है। बता दे कि अजित पवार इससे पहले देवेंद्र फडणीस की कुछ घंटों की सरकार में भी डिप्टी सीएम बनाए गए थे, लेकिन वे फिर से वापस पाला बदलकर महा महा विका अघाड़ी के खेमे में जा चुके हैं।

सिंचाई घोटाले में अजित पवार को क्लीनचिट
महाराष्ट्र एंटी-करप्शन ब्यूरो ने एनसीपी नेता अजित पवार को सिंचाई घोटाले में क्लीनचिट दे दी है। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में शुक्रवार को दायर एक और हलफनामे में उन्हें विदर्भ इरिगेशन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (वीआईडीसी) से जुड़े 12 प्रोजेक्ट में हुए कथित घोटाले में क्लीनचिट दिया है। एंटी-करप्शन ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एजेंसी के डायरेक्टर जेनरल परमबीर सिंह ने बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में जो एफिडेविट दिया है, उसमें एक पूर्व सिंचाई मंत्री को क्लीनचिट दिए जाने की बात है। ये मामला वीआईडीसी से जुड़े सिंचाई के 12 प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है।

एफिडेविट में क्या है?
एसीबी की ओर से अदालत में दिए गए एफिडेविट में कहा गया है- 'जहां तक अजित पवार की भूमिका की बात है, स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम की जांच के दौरान कोई आपराधिक जिम्मेदारी नहीं पाई गई है।' इसी बेंच में एसीबी ने पहले भी एफिडेविट दाखिल की थी, जिसमें विदर्भ क्षेत्र में सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी देने में हुई अनियमितता में भी पवार की भूमिका खारिज की गई थी। यह एफिडेविट 27 नवंबर को दी गई थी, जिसके अगले ही दिन शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस की महा विकास अघाड़ी सरकार सत्ता में आई थी।

डिप्टी सीएम बनने का रास्ता साफ?
एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार महाराष्ट्र में 1999-2009 के कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार में जल संसाधन विकास मंत्री थे। पवार इस बार पुणे जिले की बारामती विधानसभा सीट से रिकॉर्ड वोटों से जीते हैं। पिछले 23 नवंबर को वे तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने अचानक देवेंद्र फडणवीस सरकार में उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। लेकिन, जब वे वादे के मुताबिक फडणवीस सरकार के लिए एनसीपी विधायकों का समर्थन नहीं जुटा पाए तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विधानसभा में फडणवीस के बहुमत साबित करने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद फडणवीस ने भी हथियार डाल दिए थे और उद्धव ठाकरे का महा अघाड़ी के नेता के रूप में मुख्यमंत्री बनने की रास्ता साफ हो गया। अब चर्चा है कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के बाद अजित पवार फिर से बतौर डिप्टी सीएम उद्धव सरकार में एंट्री कर सकते हैं।
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