क्या एयर इंडिया क्रैश प्लेन का Black Box जांच के लिए विदेश भेजा गया? पब्लिक बोली- 9cr में लैब बना, क्या हुआ उस
Air India Plane Crash Black Box: अहमदाबाद के पास हुए एयर इंडिया फ्लाइट AI171 के भीषण हादसे के बाद मीडिया में कुछ रिपोर्ट्स सामने आईं, जिनमें कहा गया कि फ्लाइट के ब्लैक बॉक्स -यानी CVR (Cockpit Voice Recorder) और DFDR (Digital Flight Data Recorder)- को डेटा रिकवरी के लिए विदेश भेजा जा रहा है। कुछ रिपोर्ट में दावा किया गया कि हो सकता है कि एयर इंडिया क्रैश प्लेन का ब्लैक बॉक्स जांच के लिए अमेरिका भेजा जाए। अब सरकार की ओर से इसका खंडन कर दिया गया है।
ब्लैक बॉक्स की जांच में विदेश कराने को लेकर सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने सवाल उठाए। कई सोशल यूजर ने लिखा कि इस साल अप्रैल में डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (DFDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) विश्लेषण लैब का बनाया गया था, जिसका खर्च 9 करोड़ था...उस लैब का आखिर क्या हुआ? बता दें कि अप्रैल 2025 में नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने नई दिल्ली के उड़ान भवन स्थित एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) के परिसर में इस लैब का उद्घाटन किया था। इस लैब को लगभग 9 करोड़ रुपये खर्च कर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के सहयोग से बनाया गया था।

Black Box के विदेश में जांच कराने पर नागर विमानन मंत्रालय ने क्या कहा?
ब्लैक बॉक्स के विदेश में जांच कराने पर नागर विमानन मंत्रालय (MoCA) ने साफ जवाब दिया, ''एयर इंडिया की दुर्घटनाग्रस्त फ्लाइट AI171 से जुड़ी कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ब्लैक बॉक्स जांच के लिए विदेश भेजे जा रहे हैं। लेकिन असल में ब्लैक बॉक्स की जांच कहां और कैसे होगी, इसका फैसला विमान हादसों की जांच करने वाली एजेंसी AAIB (Aircraft Accident Investigation Bureau) द्वारा तकनीकी और सुरक्षा जांच के बाद ही लिया जाएगा।''
नागर विमानन मंत्रालय ने लोगों से ऐसी संवेदनशील जांच प्रक्रिया पर अटकलें न लगाएं और जांच को गंभीरता से लेने की भी गुजारिश की है। उन्होंने कहा है कि हमें इन जांच प्रक्रिया को गंभीरता से लेना चाहिए।
ब्लैक बॉक्स: विमान हादसे के जांच का सबसे अहम सुराग
विमान के दो ब्लैक बॉक्स सेट -जिनमें एक 13 जून को और दूसरा 16 जून को क्रैश साइट से बरामद किया गया -अब जांच की सबसे अहम कड़ी बन चुके हैं।
ब्लैक बॉक्स में DFDR में होती है जो फ्लाइट से जुड़ी अहम जानकारी -ऊंचाई, रफ्तार, इंजन की स्थिति, आदि बताती है। वहीं CVR रिकॉर्ड करता है कॉकपिट की आवाजें, पायलट्स की बातचीत और अलार्म सिग्नल्स। इन रिकॉर्डिंग्स से यह जानना संभव होगा कि विमान के क्रैश होने से ठीक पहले अंदर क्या चल रहा था।
भारत में ही है हाई-टेक लैब -फिर विदेश क्यों?
दिल्ली स्थित "उड़ान भवन" में अप्रैल 2025 में ही एक आधुनिक ब्लैक बॉक्स लैबोरेट्री खोली गई है, जो HAL (हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड) की मदद से बनी है। इसका मकसद था कि भविष्य में भारत को ऐसी जांच के लिए विदेश पर निर्भर न रहना पड़े।
लेकिन फिर भी अगर ब्लैक बॉक्स, बहुत ज्यादा क्षतिग्रस्त निकले, या उनकी डिकोडिंग के लिए और भी एडवांस टेक्नोलॉजी की जरूरत हो,
तो ऐसे में उन्हें अमेरिका जैसे देशों में भेजा जा सकता है। खासकर क्योंकि यह विमान बोइंग 787 ड्रीमलाइनर मॉडल था, जो अमेरिका की कंपनी बोइंग द्वारा बनाया गया है।
जांच अब किस दिशा में है?
AAIB इस हादसे की प्रमुख जांच एजेंसी है, जो 12 जून यानी हादसे वाले दिन से ही जांच में जुटी है।
उनके साथ अमेरिकी एजेंसी NTSB (National Transportation Safety Board) और बोइंग जैसी कंपनियों के एक्सपर्ट्स भी जुड़े हुए हैं -ये सब अंतरराष्ट्रीय एविएशन नियमों (ICAO प्रोटोकॉल) के तहत हो रहा है।
इसके अलावा, DGCA (डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) और एयर इंडिया खुद भी आंतरिक स्तर पर जांच कर रहे हैं।
एयर इंडिया प्लेन क्रैश की रिपोर्ट कब तक आएगी?
एक प्रारंभिक रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर आने की उम्मीद है। जबकि फाइनल रिपोर्ट ICAO मानकों के मुताबिक 1 साल के भीतर प्रकाशित की जाएगी।
अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं?
- ब्लैक बॉक्स को कहां डिकोड किया जाएगा?
- क्या हादसे से पहले पायलट्स ने कोई चेतावनी दी थी?
- तकनीकी खराबी थी या मानवीय चूक?
हादसे के बाद की सबसे अहम कड़ी -ब्लैक बॉक्स -अब सच्चाई सामने लाने की दिशा में सबसे बड़ी उम्मीद है। भारत की नई लैब इस जांच को यहां ही सुलझाने का प्रयास कर रही है, लेकिन रिपोर्ट है कि जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय मदद भी ली जा सकती है। हालांकि इसका फैसला नहीं हुआ है। अब सबकी निगाहें AAIB की रिपोर्ट पर टिकी हैं -क्या इससे मिलेगा जवाब या और सवाल खड़े होंगे?












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