एम्स के डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया ने दिए कोरोना वैक्सीन से जुड़े हर सवाल का जवाब

नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के निदेशक डाॅ रणदीप गुलेरिया(AIIMS Director randeep guleria ) से कोरोना वैक्सीन(coronavirus vaccine) को लेकर बातचीत हुई। डॉ. रणदीप गुलेरिया बता रहे हैं कि कोरोना वैक्सीन क्यों जरूरी है और कोरोना टीकाकरण को लेकर सरकार की आगे क्या योजना है। पेश है उस बातचीत के प्रमुख अंश:

AIIMS Director randeep guleria on coronavirus vaccine
सवाल: कोरोना वैक्सीन महामारी को नियंत्रित करने में किस प्रकार सहायता करेगी?

कोरोना की वैक्सीन दो प्रमुख बातों में मदद करेगी। पहला यह कि वैक्सीन के बाद संक्रमण के शिकार मरीजों की संख्या और मृत्यु दर में कमी आएगी। कोरोना की वजह से पचास साल की उम्र से अधिक 84 प्रतिशत ऐसे लोगों की मृत्यु हुई जिन्हें पहले से ही किडनी, सांस और फेफड़ों की गंभीर बीमारियां थीं। दूसरा यह कि यदि हम एक बड़े समूह का टीकाकरण करने में सक्षम हैं और ऐसे लोग जिन्हें कोरोना संक्रमण हो चुका है और उन्होंने प्राकृतिक रूप से इम्यूनिटी (प्रतिरक्षण प्रतिक्रिया) विकसित कर ली है तो यह दोनों ही बातें हमें हर्ड इम्यूनिटी हासिल करने में मदद कर सकती है और हम दोबारा सामान्य जीवन जी सकते हैं।

सवाल: आपको क्या लगता है आने वाले समय में कोरोना साधारण सर्दी खांसी की तरह हो जाएगा?

यदि हम संक्रमण के अधिक जोखिम वाले समूह जैसे स्वास्थ्य कर्मचारी, फ्रंट लाइन वर्कर और इसके साथ ही बुजुर्गो को वैक्सीन के जरिए सुरक्षित कर देते हैं तो निश्चित रूप से इससे मृत्यु दर में भी कमी आएगी और कोरोना साधारण खांसी और सर्दी की तरह हो जाएगा। ऐसा नहीं है कि इससे मृत्यु दर को जीरो किया जा सकता है, लेकिन सीजनल फ्लू से भी हर साल कई लोगों की मौत होती है।

सवाल: क्या हम इस बात के लिए आश्वस्त हैं कि कोरोना की वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी है?

अब तक के प्राप्त डाटा के अनुसार हम यह कह सकते हैं कि वैक्सीन सुरक्षित है। कुछ मामूली साइड इफेक्ट्स जैसे दर्द, सूजन और बुखार आदि हो सकते हैं। जिसका यह मतलब है कि वैक्सीन शरीर में पहुंच कर इम्यून रेपांस दे रही है। यदि हम वैक्सीन प्रतिभागियों की बात करें तो विश्वभर में 90 हजार से अधिक लोगों पर इसका परीक्षण किया जा चुका है। वैक्सीन के दूरगामी दुष्प्रभाव पता लगाने के लिए हमें अभी एक लंबे समय के फॉलोअप का इंतजार करना होगा। इस तरह के फॉलोअप को हम फेज चार का ट्रालय भी कहते हैं जिसमें हम किसी भी वैक्सीन को बाजार में लांच करने और वैक्सीन लोगों को देने के बाद होने वाले दुष्प्रभावों पर नजर रखी जाती है। अब हम कोरोना वैक्सीन की प्रभावकारिता की बात करते हैं। वैक्सीन प्रयोग करने के प्रारंभिक डाटा के अनुसार हम यह कह सकते हैं हमें वैक्सीन कम से कम छह महीने और अधिक से अधिक एक से दो साल तक के लिए प्रतिरक्षा प्रदान करेगी। अच्छी बात यह है कि अभी वैश्विक स्तर पर पचास से अधिक वैक्सीन निर्माता कोरोना वैक्सीन निर्माण के विभिन्न चरणों पर हैं। यह संभव है कि भविष्य में हमें अधिक बेहतर किस्म की वैक्सीन उपलब्ध हो सके, हालांकि वर्तमान वैक्सीन को भी हम अच्छा कह सकते हैं। उदाहरण के लिए जब इंफ्लूएंजा वैक्सीन को लांच किया गया था, उस समय यह ट्राइवैलेंट थी, मतलब इसमें वायरस के स्ट्रेन ए और बी से मुकाबला करने की क्षमता थी। इसके बाद यह महूसस किया गया कि बी स्ट्रेन के दो नये रूप यागामाटा और विक्टोरिया का भी असर विश्व के कई हिस्सों में देखा जा रहा है। इसलिए अब हम इंफ्लूएंजा की क्वाड्राईवैलेंट वैक्सीन दे रहे हैं जो स्ट्रेन ए के दो रूप और स्ट्रेन बी के दो रूप के खिलाफ सुरक्षा कवच देती है। समय बीतने के साथ हम कोरोना की अधिक बेहतर और नये जेनेरेशन के कोरोना वैक्सीन उपलब्ध करा सकेंगें जो वर्तमान से कहीं अधिक बेहतर और प्रभावकारी होगें।

सवाल: वैक्सीन को किस आधार पर प्रमाणित किया गया है?

जब भी कभी हम वैक्सीन बनाने के बारे में विचार करते हैं तो हम दो प्रमुख बातों पर ध्यान देते हैं पहला है प्रभावकारिता और सुरक्षा, दूसरा, वैक्सीन को संरक्षित करने के लिए जरूरी तापमान के साथ हम किसने बड़ी आबादी का टीकाकरण कर सकते हैं इसके साथ ही कीमत पर भी विचार किया जाता है, जिससे वैक्सीन सबको उपलब्ध हो सके। हमारी वैक्सीन इन सभी मानकों पर खरी उतरती है। जहां तक वैक्सीन की उपलब्धता की बात है तो हम यह सुनिश्चित करते हैं कि वैक्सीन को दो से आठ डिग्री सेंटिगे्रट के तापमान पर संरक्षित किया गया हो। क्योंकि अभी हम बच्चों और महिलाओं लिए विश्व का सबसे बड़ा नियमित टीकाकरण कार्यक्रम संचालित करते हैं जिसमें वैक्सीन संरक्षण के इस तापमान का पालन किया जाता है इसलिए हमारे पास वैक्सीन संरक्षण की जरूरी सुविधाएं और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद हैं। यदि हम वैक्सीन संरक्षण और संसाधन की वर्तमान सुविधाओं को बढ़ा दें तो हम अधिक व्यापक टीकाकरण कर सकते हैं।

सवाल: लोगों में कोरोना वैक्सीन को लेकर झिझक है, ऐसे लोगों के लिए आपका क्या संदेश होगा जो कोरोना वैक्सीन लेने से डर रहे हैं?

हमारे देश के औषधि नियंत्रक और नियामक संस्थाओं ने जिन भी वैक्सीन के प्रयोग की अनुमति दी है वह पूरी तरह प्रभावी और सुरक्षित हैं। हमें उनका विश्वास करना चाहिए, नियामक संस्थाएं किसी भी असुरक्षित वैक्सीन को देश की जनता को लगाने की अनुमति नहीं देगीं।
दूसरा, यदि हम कोरोना से आर्थिक और सामाजिक रूप से छुटकारा पाना चाहते हैं तो इसके लिए वैक्सीन बहुत जरूरी है। हमारे आम जीवन के हर पहलू जैसे कि हमारे बच्चों की पढ़ाई, नौकरी, व्यवसाय, स्वास्थ्य सेवाएं आदि सभी महामारी की वजह से प्रभावित हुए हैं। दोबारा से वहीं सामान्य जीवन में वापसी के लिए कोरोना का वैक्सीन लगवाना जरूरी है।

सवाल: कोरोना का वैक्सीन लेने के बाद भी हमें कोरोना अनुरूपी व्यवहार का पालन करना क्यों जरूरी है?

किसी ने मुझसे कहा कि यदि मैने कोरोना वैक्सीन की पहली डोज ले ली है तो इसका मतलब है कि मैं संक्रमण से पचास प्रतिशत सुरक्षित हो गया, यह सत्य नहीं है। कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के दस से पन्द्रह दिन बाद ही आप संक्रमण के खतरे से सुरक्षित हो पाते हैं। ऐसा इसलिए होता है इस अंतराल मे आपके शरीर में कोरोना वायरस के प्रति आपकी सुरक्षा करने वाली एंटीबॉडी पर्याप्त मात्रा में आपके शरीर में विकसित हो चुकी होती है और यह आपको गंभीर खतरे से बचाती हैं। कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लेने के बाद भी आप संक्रमित हो सकते हैं और दूसरों के लिए संक्रमण की वजह बन सकते हैं, इसलिए वैक्सीन लेने के बाद मास्क पहले, नियमित रूप से हाथ धोएं और भीड़ में जाने से बचें।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+