आखिर क्यों बीजेपी को पकानी पड़ रही दलितों के लिए खिचड़ी, जानें
नई दिल्ली। दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को बीजेपी ने 'भीम महासंगम' कार्यक्रम के दौरान 'समरसता खिचड़ी' पकाई। 1000 किलो दाल-चावल, 500 किलो सब्जी, 200 किलो घी, 100 लीटर तेल, 200 किलो मसाले और 5000 लीटर पानी की मदद से 5000 किलो खिचड़ी पकाई और वर्ल्ड रिकॉर्ड बना डाला। आखिर क्यों बीजेपी ने पकाई है 5000 किलो खिचड़ी। क्या हैं इसके राजनीतिक मायने, आइए जानते हैं:

- 2011 की जनगणना के हिसाब से देश में दलितों की आबादी 17 फीसद थी। मतलब इस समय लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
- 543 लोकसभा सीटों में से 80 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में इन 80 सीटों में से बीजेपी ने 41 पर जीत दर्ज की थी।
- 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में भी दलित बड़ी ताकत हैं। यहां करीब 20.7 प्रतिशत दलित आबादी है। राज्य की 17 लोकसभा और 86 विधानसभा सीटें आरक्षित हैं। बीजेपी ने 17 लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में 76 रिजर्व विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी।
- बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से दलितों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पास आए मामलों के हिसाब से 2013-2014 में कुल 12,410 केस सामने आए। 2014-2015 में यह आंकड़ा बढ़कर 16,175 पर पहुंच गया और 2015-2016 में संख्या बढ़कर 17, 321 पर पहुंच गई।
- मध्य प्रदेश की बात करें तो कुल 35 आरक्षित सीटों में से 2013 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 28 पर जीत दर्ज की थी, लेकिन 2018 वह सिर्फ 18 पर ही जीत दर्ज कर सकी।
- छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी को दलितों के गुस्से का सामना करना पड़ा। 2013 में बीजेपी ने रिजर्व सीटों में से 9 जीती थीं, लेकिन 2018 में सिर्फ 2 पर ही जीत पाई।
कुल मिलाकर नाराज दलितों को मनाने के लिए बीजेपी बड़ी कवायद कर रही है। देखना होगा कि 2019 में उसे कितना फायदा मिल पाता है।












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