स्पीकर बनने के बाद आपातकाल पर ओम बिरला के बयान पर सदन में जमकर हंगामा, कार्रवाई कल तक के लिए स्थगित

लोकसभा के स्पीकर के तौर पर एक बार फिर से ओम बिरला चुन लिए गए हैं। उन्हें ध्वनि मत से सदन का पीठासीन अधिकारी चुना गया। इसके बाद तमाम नेताओं ने स्पीकर चुने जाने पर ओम बिरला को बधाई दी। जिसके बाद सदन में विपक्ष के हंगामे के चलते कल तक के लिए स्थगित कर दिया।

लोकसभा का अध्यक्ष चुने जाने के बाद ओम बिरला ने आपातकाल के दौर को याद करते हुए कहा कि यह देश का काला दिन था। आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने के मौके पर ओम बिरला ने कहा कि ये सदन 1975 में देश में आपातकाल लगाने के निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा करता है।

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ओम बिरला के इस बयान से सदन में भारी हंगामा हुआ। विपक्ष के नेताओं ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया। लेकिन इसके बाद भी ओम बिरला ने आपातकाल पर बोलना जारी रखा। ओम बिरला ने कहा कि हम उन सभी लोगों के संकल्प की सराहना करते हैं, जिन्होंने इमरजेंसी का पूरजोर विरोध किया, अभूतपूर्व संघर्ष किया।

भारत के लोकतंत्र की रक्षा का दायित्व निभाया। भारत के इतिहास में 25 जून 1975 हमेशा काले अध्याय के रूप में जाना जाएगा। उस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगाई और बाबा साहब अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान पर प्रचंड प्रहार किया था। भारत की पहचान पूरी दुनिया में लोकतंत्र की जननी के रूप में है।

भारत हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करता है और इसे प्रोत्साहित करता रहा है,ऐसे भारत पर इंदिरा गांधी द्वारा तानाशाही थोप दी गई, भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचला गया अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोटा गया। इमरजेंसी के दौरान भारत के नागरिकों के अधिकार नष्ट दिए गए। नागरिकों से उनकी आजादी छीन ली गई।

यह वह दौर था जब विपक्ष के नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया। पूरे देश को जेलखाना बना गया। तब की तानाशाही सरकार ने मीडिया पर अनेक पाबंदियां लगाई। न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर अंकुश लगा दिया गया था। इमरजेंसी का वह समय हमारे देश के इतिहास में अन्याय काल का काला खंड था।

ओम बिरला ने कहा कि मुझे फिर से इस महान सदन के पीठासीन अधिकारी के रूप में दायित्व निर्वहन करने का अवसर प्रदान किया, इसके लिए मैं आपका हार्दिक आभार प्रकट करता हूं। मैं पीएम और सभी दलों के नेताओं और सांसदों का जिन्होंने मेरे प्रति विश्वास प्रकट किया, उसके लिए आपका आभारी हूं।

यह 18वीं लोकसभा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का उत्सव है। मैं निर्वाचन आयोग, जिसने निष्पक्ष, निर्बाध एवं पारदर्शी तरीके से चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराई, उसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं।

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