कर्नाटक के बाद यहां भी 'ऐक्शन' के मूड में कांग्रेस, भंग हो सकती हैं इन राज्यों की इकाइयां
नई दिल्ली- कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने साफ कर दिया है कि लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार की जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इस्तीफा दिया है, तो अपने फैसले पर कायम रहेंगे। जाहिर है कि वह उन प्रदेश कांग्रेस कमेटियों पर भी नरमी नहीं बरतना चाहेंगे, जिनकी देखरेख में कांग्रेस पार्टी की भद्द पिटी है। कर्नाटक में प्रदेश कांग्रेस इकाई को भंग करके राहुल ने अपना मैसेज साफ कर दिया है कि वो बख्शने की मूड में नहीं हैं। अब जो खबरें मिल रही हैं, उससे लगता है कि आने वाले समय में कुछ और बड़े राज्यों में भी कर्नाटक जैसा ही बड़ा ऐक्शन देखने को मिल सकता है।

बिहार प्रदेश कमिटी पर भी लटकी है तलवार
खबरों के मुताबिक कांग्रेस आलाकमान जिन प्रदेश इकाइयों पर कार्रवाई की सोच रहा है, उसमें बिहार का नाम भी शामिल है। राज्य की 40 लोकसभा सीटों में से पार्टी को सिर्फ किशनगंज सीट पर ही जीत का स्वाद चखने को मिला है। जबकि, आरजेडी से गठबंधन के तहत मिली 9 में से 8 सीटों पर पार्टी बुरी तरह हार गई थी। इस हार के बाद से प्रदेश इकाई में स्थिति असहज बनी हुई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा और पार्टी के प्रदेश प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल पहले ही अपना इस्तीफा राहुल गांधी को भेज चुके हैं।

उत्तर प्रदेश में भी हो सकती है बड़ी कार्रवाई
कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में प्रिंयका गांधी वाड्रा को पूर्वी यूपी का प्रभारी महासचिव बनाकर उतारा था, तो उसे उम्मीद थी कि उनका जादू कांग्रेस नेताओं की तरह ही वोटरों पर भी चलेगा। लेकिन, कांग्रेस राज्य में अपनी सीट बढ़ाने के बजाय पार्टी अध्यक्ष और प्रियंका के भैया राहुल गांधी की अमेठी सीट भी गंवा बैठी। इसबार कांग्रेस यूपी के मैदान में उतरी थी, तो अपने दम पर सभी 80 सीटों पर लड़ने का दावा कर रही थी, लेकिन ज्यादातर सीटों पर उसके उम्मीदवारों को जमानत बचानी भी मुश्किल हो गई। इसलिए कांग्रेसी सूत्र जो संकेत दे रहे हैं, उससे तय लग रहा है कि पार्टी लीडरशिप प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भी भंग करने की सोच रहा है। प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर तो पहले ही अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं। प्रियंका जब 13 जून को मां सोनिया के साथ रायबरेली पहुंचीं थीं, तब उन्होंने नेताओं और कार्यकर्ताओं पर ऐक्शन लिए जाने की ओर इशारा भी किया था। लगता है वह समय अब काफी नजदीक आ चुका है।

इन प्रदेश इकाइयों पर भी गिर सकती है गाज
लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद राहुल गांधी ने जिन प्रदेश इकाइयों पर अपनी सबसे ज्यादा नाराजगी जताई थी, उसमें राजस्थान और मध्य प्रदेश सबसे आगे थे। राजस्थान,छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में 6 महीने पहले ही कांग्रेस की सरकार बनी थी और उसी के आधार पर पार्टी की ओर से यह नरेटिव सेट किया जा रहा था कि मोदी के दिन लद चुके हैं। लेकिन, नतीजा देखने के बाद राहुल ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत कई वरिष्ठ नेताओं पर खुलकर गुस्सा जताया था। ऐसे में इन तीनों राज्यों में पार्टी के पदाधिकारियों और प्रदेश इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई न हो, इसकी संभावना कम ही नजर आ रही है।

इन प्रदेश कमेटियों पर कोई खतरा नहीं
कांग्रेस वर्किंग कमिटी ने राहुल गांधी को संगठन में अपने मुताबिक सुधार करने के लिए अधिकृत कर रखा है। वैसे ये बात अलग है कि कांग्रेसी परंपरा में यह महज औपचारिकता भर है। इस आधार पर माना जा रहा है कि जल्द ही पार्टी नेतृत्व कई महासचिवों, सचिवों और प्रदेश प्रभारियों को बदलने पर भी विचार कर सकता है। अलबत्ता, कांग्रेसी संगठन के इस पुनर्गठन में कुछ प्रदेश की इकाइयों पर किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई की संभावना नहीं है। जानकारी के मुताबिक इन प्रदेशों में केरल, तमिलनाडु और पंजाब जैसे राज्य शामिल हैं, जहां पार्टी ने उम्मीद से भी कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है।












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