कोरोना के केसों में भारी वृद्धि का कारण बन सकती है UNHCR दफ्तर के बाहर जमा अफगान नागरिकों की भीड़- हाईकोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दक्षिणी दिल्ली के वसंत विहार इलाके में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) के कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में अफगान नागरिकों के जमावड़े पर चिंता व्यक्त की है।

नई दिल्ली, 1 सितंबर। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दक्षिणी दिल्ली के वसंत विहार इलाके में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) के कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में अफगान नागरिकों के जमावड़े पर चिंता व्यक्त की है। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की खंडपीठ ने बुधवार को कहा कि ये लोग कोरोना के फैलने का बड़ा कारण बन सकते हैं, क्योंकि ये लोग कोरोना के दिशा-निर्देशों (सोशल डिस्टेंसिंग, मास्किंग) का पालन नहीं कर रहे हैं।

Afghan refugees

जस्टिस पाली ने कहा, 'इस तस्वीर को देखो, क्या होगा यदि ये कोरोना के केसों में वृद्धि का कारण बने? किसी ने भी मास्क नहीं पहन रखा है। यह क्या है। जब आप कार में बैठे लोगों के मास्क न पहने पर उनका चालान कर रहे हैं तो यहा भी कुछ प्रोटोकॉल होने चाहिए।'

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पीठ ने केंद्र, विदेश मंत्रालय, दिल्ली पुलिस आयुक्त, दिल्ली सरकार, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम और दिल्ली जल बोर्ड को नोटिस जारी कर वसंत विहार वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका पर जवाब मांगा है। जिसमें उसने वसंत विहार बी-ब्लॉक से बड़ी संख्या में अफगान नागरिकों के जमावड़े को हटाने का अनुरोध किया है। इसलिए यह क्षेत्र एक विरोध स्थल में बदल गया है, और यहां बच्चों सहित सभी आयु वर्ग के लोग इकट्ठा हो रहे हैं।

पिछले कुछ हफ्तों से, भारत में बड़ी संख्या में रहने वाले अफगान नागरिक यूएनएचसीआर कार्यालय के बाहर जमा हो रहे हैं और तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा करने के मद्देनजर शरणार्थी का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं।


हालांकि वे लोग शांति बनाए हुए हैं, लेकिन याचिकाकर्ता ने कहा है कि उन्होंने यूएनएचसीआर के कार्यालय, पार्कों और अन्य सामान्य क्षेत्रों में इकट्ठा होना और बैठना शुरू कर दिया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन व्यक्तियों को बसाने के लिए सरकार द्वारा किसी भी व्यवस्था के अभाव में, विदेशी नागरिक बड़ी संख्या में वसंत विहार की गलियों और पार्कों में निवास कर रहे हैं, जिससे निवासियों के लिए बड़ा स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो रहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील हृषिकेश बरुआ ने कोर्ट को लोगों की परेशानी से अवगत कराया।

वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि यह सामान्य स्थिति नहीं है। क्षेत्र के निवासियों को मानवीय दृष्टिकोण रखना चाहिए। यह एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है और इस पर रातोंरात निर्णय नहीं लिया जा सकता। वहीं दूसरी ओर दिल्ली सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि लगभग 500 प्रदर्शनकारी वहां मौजूद है और हालात से निपटने के लिए पर्याप्त बल तैनात किया गया है। इस मामले पर अगली सुनवाई 3 सितंबर को होगी।

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